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मोदी को हराने के लिए साथ आए सारे दल तो ममता बनर्जी हो सकती हैं थर्ड फ्रंट की नेता

घटनाएं जिस तरह से स्वरूप ले रही हैं, उससे ऐसा लगता है कि साल 2019 में तीसरे मोर्चे की नेता ममता बनर्जी हो सकती हैं.

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aajtak.in
कृतिका बनर्जी/ दिनेश अग्रहरि नई दिल्ली, 26 March 2018
मोदी को हराने के लिए साथ आए सारे दल तो ममता बनर्जी हो सकती हैं थर्ड फ्रंट की नेता ममता बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सोमवार को दिल्ली पहुंच रही हैं. वह एनसीपी नेता शरद पवार से उनके आवास पर मिलेंगी. घटनाएं जिस तरह से स्वरूप ले रही हैं, उससे ऐसा लगता है कि साल 2019 में तीसरे मोर्चे की नेता ममता बनर्जी हो सकती हैं.

कुछ दिनों पहले ही तेलंगाना के सीएम और टीआरएस नेता के. चंद्रशेखर राव कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से मिले हैं. ऐेसे संकेत हैं कि दोनों के बीच एक गैर कांग्रेसी, गैर बीजेपी 'संयुक्त मोर्चा' बनाने पर बातचीत हुई है. ममता बनर्जी के लगातार आ रहे ट्वीट से यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे खुद को ऐसी नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रही हैं जिसकी सभी दलों तक पहुंच है.

मायावती ने जब यह घोषणा की कि यूपी में राज्यसभा चुनाव में बसपा कैंडिडेट की हार से सपा-बसपा गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, तो ममता ने ट्वीट किया, 'हम देश के इस मिशन में पूरी तरह से उनके और अखिलेश के साथ हैं.' उसी दिन ममता बनर्जी ने एनडीए से बाहर जाने के चंद्रबाबू नायडू के कदम का समर्थन किया.

अररिया में लोकसभा उपचुनाव में आरजेडी कैंडिडेट की जीत पर ममता ने ट्वीट किया था, 'अररिया और जहानाबाद में जीत के लिए लालू प्रसादी जी को बधाई. यह एक बड़ी जीत है.'

लोकसभा में ममता बनर्जी की टीएमसी के 34 सांसद हैं और बीजेपी, कांग्रेस, अन्नाद्रमुक के बाद उनकी पार्टी का ही स्थान है. इसलिए विपक्ष के नेता बनने की उनकी दावेदारी मजबूत होती है. अन्नाद्रमुक बीजेपी की तरफ झुका दिख रहा है, इसलिए टीएमसी संसद में सबसे बड़े गैर कांग्रेसी दलों में शामिल हो गया है. पार्टी के अब राज्यसभा में भी 12 सदस्य हो गए हैं. हाल के राज्यसभा चुनाव में पार्टी के चार कैंडिडेट विजयी हुए हैं और इसके सहयोग से ही कांग्रेस कैंडिडेट अभिषेक मनु सिंघवी को जीत मिली है.

पश्चिम बंगाल में भी पार्टी की स्थ‍िति काफी मजबूत है. राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में टीएमसी के 213 सदस्य हैं.

ममता बनर्जी के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है. वह केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुकी हैं. उनके सोनिया गांधी, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं से अच्छे रिश्ते हैं.

गौरतलब है कि इन दिनों कांग्रेस के नेतृत्व में एक महागठबंधन और उससे इतर एक तीसरा मोर्चा बनाने, दोनों पर समानांतर रूप से बातचीत चल रही है. ऐसे में ममता बनर्जी अपने लिए सभी विकल्प खुले रखना चाहते हैं.

हाल में वे सोनिया गांधी द्वारा आयोजित डिनर में शामिल तो नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को भेजा ताकि कांग्रेस से भी संवाद का रास्ता बना रहे. वह मंगलवार को शरद पवार द्वारा आयोजित विपक्ष के नेताओं की बैठक में भी शामिल हो रही हैं.

पहले ऐसा माना जाता था कि जेडीयू नेता नीतीश कुमार केंद्र में 2019 में मोदी और बीजेपी सरकार को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद जब वह मोदी सरकार के साथ हो चुके हैं, तो ममता बनर्जी ही ऐसी कद्दावर नेता दिख रही हैं, जो संयुक्त मोर्चा का नेतृत्व कर सके.

विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता जूनियर माने जा रहे राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने में हिचकेंगे, लेकिन ममता बनर्जी के साथ उन्हें कोई समस्या नहीं होगी. कांग्रेस के पास महज 48 सांसद हैं, इसलिए वह भी बहुत मोलभाव करने की स्थ‍िति में नहीं है.

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