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...तो मेड इन इंडिया हथियारों से सर्जिकल स्ट्राइक करेगी आर्मी!

भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स के जवानों ने जब पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया उस वक्त उन्होंने इजराइल में बनी तवोर-21 और गलिल असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल करके आतंकियों का सफाया किया था लेकिन अगली बार जब सेना के जवान ऐसा कोई ऑपरेशन करेंगे तो वे देश में बनी तवोर-21 और गलिल असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल करेंगे. पहली बार देश में मेक इन इंडिया के तहत भारतीय कम्पनी पुंज लॉयड इजराइली वेपन कम्पनी के साथ मिलकर सेनाओं के लिए घातक राइफल बनाने जा रही हैं.

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aajtak.in
मंजीत सिंह नेगी ग्वालियर, 05 May 2017
...तो मेड इन इंडिया हथियारों से सर्जिकल स्ट्राइक करेगी आर्मी! फाइल फोटो

भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स के जवानों ने जब पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया उस वक्त उन्होंने इजराइल में बनी तवोर-21 और गलिल असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल करके आतंकियों का सफाया किया था. लेकिन अगली बार जब सेना के जवान ऐसा कोई ऑपरेशन करेंगे तो वे देश में बनी तवोर-21 और गलिल असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल करेंगे. पहली बार देश में मेक इन इंडिया के तहत भारतीय कम्पनी पुंज लॉयड इजराइली वेपन कम्पनी के साथ मिलकर सेनाओं के लिए घातक राइफल बनाने जा रही हैं.

पीएम मोदी की इजराइल यात्रा से पहले ही मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ये राइफल बननी शुरू हो जाएंगी. पीएम मोदी लम्बे समय से देश में रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया की बात कर रहे हैं, ऐसे में पहली बार देश में मेक इंडिया का पहला प्लांट शुरू हुआ है. भारतीय सेना लम्बे समय से इंसास राइफल की जगह करीब एक लाख 85 हजार नई राइफल लेना चाहती है. इसके साथ ही सेना अपनी घातक प्लाटून के लिए करीब 3500 स्नाइपर राइफल की तलाश में है. इसी तरह सेना की स्पेशल फोर्सेस ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए करीब 44 हजार से ज्यादा क्लोज क्वार्टर कार्बाइन के लिए टेंडर निकला है. पुंज लॉयड के अध्यक्ष अशोक वधावन ने बताया कि वायुसेना के गरुड़ और नौसेना के मरीन कमांडो तवोर-21 और गलिल असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल कर रहे हैं.

तवोर असॉल्ट राइफल
दुनिया भर में स्पेशल फोर्सेस तवोर असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल कर रही हैं. तीन किलो से कम वजन की इस राइफल के गुरुत्व का केंद्र पीछे की तरफ है, इस कारण इसे एक हाथ से भी अच्छी तरह चलाया जा सकता है. इस राइफल में 5.56 एमएम के कारतूस के साथ ही 9 एमएम कारतूस का भी उपयोग हो सकता है. इस राइफल से एक साथ 25 राउंड गोली चलाई जा सकती है. खराब से खराब मौसम में यह राइफल पूरी क्षमता से काम करती है. अभी तक सेना के जवान ऑपरेशन में इंसास, एके 47 या एके 56 राइफलों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

गलिल असॉल्ट राइफल
बात अगर गलिल राइफल की जाय तो इस राइफल की मारक क्षमता का भी कोई सानी नहीं है. इस राइफल में 7.62 एमएम का राउंड का इस्तेमाल होता है. इसे भी एक हाथ से भी अच्छी तरह चलाया जा सकता है. नजदीकी लड़ाई में 5oo मीटर तक इससे दुश्मन को ढेर किया जा सकता है. दुनिया भर में स्पेशल फोर्सेस और अफगानिस्तान में नाटो सेनाएं गलिल राइफल का इस्तेमाल कर रही हैं.

एक्स-95 असॉल्ट राइफल
इसी तरह एक्स-95 की खासियत की बात की जाय तो तीन किलो से कम वजन की इस राइफल को भी एक हाथ से भी अच्छी तरह चलाया जा सकता है. इस राइफल में 5.56 एमएम के राउंड के साथ ही 9 एमएम राउंड का भी उपयोग हो सकता है. इस राइफल से एक साथ 260 राउंड गोली चलाई जा सकती है. खराब से खराब मौसम में यह राइफल पूरी क्षमता से काम करती है. इसकी प्रभावी मारक क्षमता भी 500 मीटर है. भारत में बीएसएफ, सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो एक्स-95 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल कर रही हैं.

नेगेव एलएमजी
दुनिया भर में नेगेव एलएमजी का कोई सानी नहीं है. इस राइफल में 5.56 एमएम और 7. 62 के राउंड का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी मारक क्षमता की बात की जाय तो 800 मीटर तक ये दुश्मन को बर्बाद कर सकती सकती है. दुनिया भर में स्पेशल फोर्सेस और

अफगानिस्तान में अमेरिकी सेनाएं नेगेव एलएमजी का इस्तेमाल कर रही हैं.
आने वाले दिनों में ग्वालियर के मालनपुर में पुंज लॉयड के आधुनकि प्लांट में हर साल 50 हजार से ज्यादा घातक राइफल बनेंगी. जिससे तीनों सेनाओं के लिए आधुनिक राइफल की कमी को दूर किया जा सकेगा लेकिन सबसे ख़ास बात इससे देश और स्पेशल फोर्सेस की ताकत कई गुना बढ़ जायेगी.

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