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Operation370: कश्मीर को सुलगाने की कीमत 5 करोड़!

ये अंडरकवर जांच ऐसे वक्त में हुई जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद से जम्मू और कश्मीर में सख्त पाबंदियों की गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही थी.

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aajtak.in
जमशेद खान / नितिन जैन नई दिल्ली, 04 December 2019
Operation370: कश्मीर को सुलगाने की कीमत 5 करोड़! प्रतीकात्मक तस्वीर

  • 370 हटने के बाद पहली अंडरकवर जांच, कश्मीर में तूफान से पहले की शांति?
  • खुराफाती तत्व पैसे के बदले आगजनी, पथराव, लोगों को भड़काने के लिए तैयार

कश्मीर में पाबंदियों के एलान को करीब 4 महीने बीत चुके हैं लेकिन घाटी में अब भी ऐसे खुराफ़ाती लोग हैं जो पहला मौका मिलते ही गड़बड़ियों को अंजाम देने के लिए तैयार बैठे हैं. ये निष्कर्ष  इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच से सामने आया है.

ये अंडरकवर जांच ऐसे वक्त में हुई जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद से जम्मू और कश्मीर में सख्त पाबंदियों की गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही थी.

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में पिछले महीने एक बयान में कहा था कि अशांत क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है. यानी सब ठीक ठाक है. लेकिन इंडिया टुडे की जांच से जो सामने आया वो केंद्र सरकार के इस बयान से मेल नहीं खाता. इस जांच से निकली ज़मीनी सच्चाई इसलिए भी अहम है क्योंकि जम्मू और कश्मीर में नई दिल्ली की ओर से उठाए कदमों की ग्लोबल मीडिया आलोचना कर रहा है.

संदिग्ध भड़काऊ तत्व

घाटी में विभिन्न वर्गों से ताल्लुक रखने वाले संदिग्ध भड़काऊ तत्वों ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक का सफर इसलिए किया कि वो हिंसक प्रदर्शनों को लेकर अपने ब्लू प्रिंट को साझा कर सकें. इंडिया टुडे SIT के अंडर कवर रिपोटर्स ने ऐसे तत्वों को अपना परिचय कॉर्पोरेट लॉबिस्ट्स के तौर पर दिया था.

गांदरबल के स्थानीय क्रिकेटर फयाज़ अहमद बट ने अंडर कवर रिपोटर्स से कहा कि अगर भुगतान किया जाए तो उसके लोग श्रीनगर में और आस-पास के सौरा और बचपोरा जैसे इलाकों में गड़बड़ी फैला सकते हैं.  

बट ने दावा किया कि वो घाटी में सख्त बंदिशों के बावजूद क्या क्या करवा सकता है. इसके लिए उसने 'मुंह ढक कर हिंसक प्रदर्शन, पुलिस वाहनों पर पथराव और सड़कों को ब्लॉक करना.' को गिनवाया.

बट ने कहा, 'इससे उन पर फायरिंग या पेलेट (पुलिस की ओर से) बरसाई जा सकती हैं. 10 से 15 युवक आएंगे और सौरा और बचपोरो जैसे क्षेत्रों में हिंसक प्रदर्शन कर सकते हैं. उनके चेहरे पर पेलेट भी लग सकती हैं.' 

बट ने गड़बड़ी के अपने तरीके का खुलासा भी किया. बट के मुताबिक 'इसके लिए शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिदों से प्रदर्शन का आह्वान किया जाएगा. साथ ही लोगों को अनुच्छेद 370 पर भड़काया जाएगा.'

बट ने कहा, 'एक तरीका इसे इमामों (स्थानीय मस्जिदों के) के ज़रिए कराने का है. आपको इसके लिए इजाज़त की जरूरत नहीं. मस्जिदों की अपनी प्रबंध कमेटियां होती हैं. मुझे इसके लिए उनसे भाषण देने के लिए लिखित आग्रह करना होगा.'

बट ने कहा, 'मैं भी उनसे बात करूंगा. सुनिए, इसे हमें ज़बरन करना होगा. हमें इसे धार्मिक भाषण शुरू होने से पहले करना होगा. मुझसे एक दो मिनट के लिए बोलने को कहा जाएगा. इसके बाद मैं नारे लगाऊंगा और वहां से हट जाऊंगा.' 

कश्मीरी क्रिकेटर बट ने हिंसक प्रदर्शनों को 20 दिन तक खींचने का वादा किया जिसमें हर तीसरे दिन सुरक्षा को गच्चा देने के लिए प्रदर्शन किए जाएंगे.

बट ने कहा, 'प्रदर्शन जिस दिन होंगे उसके एक दिन बाद प्रदर्शन वाली जगहों पर सुरक्षा का कड़ा हो जाना तय है. इसलिए इसे फैलाना होगा. ये संभव नहीं है कि एक ही जगह पर अगले एक या दो दिन में इकट्ठा हुआ जाए. लेकिन ये हर तीसरे दिन पर किया जा सकता है.' बट ने 20 दिन तक ये सब करने के लिए एक करोड़ रुपए की मांग की. प्रदर्शन के लिए हर दिन के 5 लाख रुपए के हिसाब से.

जांच के दौरान एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के पूर्व कार्यकर्ता उमर मेराज ने भी अपना प्लान साझा किया. श्रीनगर के सौरा में रहने वाले उमर मेराज ने घाटी के स्कूलों में आगजनी जैसे हमले कराने का खतरनाक इरादा व्यक्त किया.

उमर मेराज ने कहा, 'हम 6-7 स्कूलों में आग लगा सकते हैं. मैंने मस्जिद से दो दिन पहले बात की थी. वो भी ऐसा करेंगे.'

अंडर कवर रिपोर्टर ने जानना चाहा, 'ये सरकारी स्कूल होंगे या प्राइवेट?

उमर हैदर- 'प्राइवेट बेहतर रहेंगे. सरकारी स्कूलों को क्यों आग लगाएं. वहां कोई नहीं पढ़ता है. प्राइवेट ज्यादा अहम हैं.'

मेराज ने 'पैकेज डील' की पेशकश की. इसमें एक महीने तक पथराव और आगजनी की घटनाएं कराने की बात कही. मेराज ने हिंसा भड़काने के लिए 2 करोड़ रुपए की मांग की.

मेराज ने कहा, 'ये एक हफ्ता चल सकता है, 10 दिन, 20 दिन...यहां तक कि एक महीना भी. इसके लिए 1 (करोड़ रु) से 2 (करोड़ रु) तक का खर्च आएगा.'

डाउनटाउन श्रीनगर के हजरतबल में रीयल एस्टेट एजेंट के तौर पर काम करने वाला अल्ताफ़ अहमद सोफी भी नकदी के बदले गड़बड़ी कराने की गारंटी देता दिखा.

सोफी ने कहा, ये तीन चीज़ सबसे आसान हैं- 'पथराव, बाज़ार बंद कराना और सड़क पर ट्रैफिक जाम. ये छोटी बाते हैं. आगजनी कराना भी ऐसा ही है. जहां तक कश्मीर का सवाल है तो ये हमारे घर के पीछे के आंगन (बैकयार्ड) जैसा है.'

सोफी ने दावा किया कि अगर उसके लोगों को पैसा दिया जाए तो वो घाटी की सड़कों पर साइकिल तक नहीं चलने देंगे. सोफी ने कहा, 'मैं अपने इलाके के बारे में बात कर रहा हूं. इसमें गांदरबल तक राष्ट्रीय राजमार्ग का 8-9 किलोमीटर का हिस्सा आता है.'

अंडर कवर रिपोर्टर- 'इसे कितना लंबा ब्लॉक किया जा सकता है.'

सोफी- 'जब तक मुझे हिरासत में नहीं ले लिया जाता. जब तक मुझे गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता. मुझे लगता है कि हमें इसके लिए 1-2 करोड़ रु की ज़रूरत होगी.'  

श्रीनगर के ही रहने वाले असद सिद्दीकी का गैर मुनाफ़ाकारी एनजीओ है. असद सिद्दीकी ने इंडिया टुडे एसआईटी के सामने कबूल किया कि वो असल मे हिंसक प्रदर्शनों के लिए कश्मीरी बेरोजगार युवकों की भर्ती करता है. सिद्दीकी ने दावा किया कि उसका एनजीओ पत्थरबाज़ों की भर्ती के लिए फंड इकट्ठा करता है.

सिद्दीकी ने कहा,'ऐसे लोग हैं जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं. वो सब युवा हैं. पूरा मूवमेंट इन्हीं युवकों की ओर से चलाया जाता है. पत्थरबाज़ी, प्रदर्शन की सारी घटनाएं यही युवा करते हैं. उन्हें इसके लिए फंड मिलता है.' सिद्दीकी ने अपने गैर मुनाफाकारी संगठन का आड़ में 12 लाख रुपए की मांग की.

सिद्दीकी ने कहा, 'डाउनटाउन के युवा लोगों को तैयार करना होगा. एक बार इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह दोबारा चालू हो जाएं और सुरक्षा थोड़ी कम हो जाए, तो देखेंगे कि क्या किया जा सकता है.'

सत्तारूढ़ भाजपा ने इंडिया टुडे की जांच की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे घाटी के खतरों का पता चलता है. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, ''इंडिया टुडे टेरर फंडिंग को लेकर एक और बड़ी पड़ताल की है. उन्होंने कहा, "इस पड़ताल से स्पष्ट रूप से संभावित खतरे का पता चलता है."

वहीं श्रीनगर में लेफ्टिनेंट-जनरल (सेवानिवृत्त) एस.ए. हसनैन ने कहा, “यह पूरा एक इकोसिस्टम है जो आतंकवाद का समर्थन करता है. यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में हम बता रहे हैं. आपको एक उदाहरण बताते हैं कि नियंत्रण रेखा पर लोग कैसे काम करते हैं- ऐसे नहीं है कि ये भारतीय विरोधी हों, लेकिन 4-6 लाख रुपये की खातिर ये साल में चार से पांच क्रॉसिंग करा देते हैं.''

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस प्रमुख कुलदीप खोड़ा ने कहा कि घाटी में उपद्रवियों की पहुंच अभी भी है. हालांकि एनआईए ने पिछले दो वर्षों में बहुत सारी कार्रवाई की है.

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