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एयरसेल-मैक्सिस केस: ED ने कार्ति से दूसरी बार की पूछताछ

पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की मुसीबत कम होती नहीं दिख रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एयरसेल-मैक्सिस मामले में एक महीने के भीतर दूसरी बार कार्ति चिदंबरम से पूछताछ की है. इससे पहले 10 अप्रैल को जांच एजेंसी द्वारा कार्ति चिदंबरम से लंबी पूछताछ की गई थी. इस दौरान उनसे कई सवाल-जवाब किए गए थे.
एयरसेल-मैक्सिस केस: ED ने कार्ति से दूसरी बार की पूछताछ कार्ति चिदंबरम
मुनीष पांडे [Edited by: राम कृष्ण]नई दिल्ली, 17 April 2018

पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की मुसीबत कम होती नहीं दिख रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एयरसेल-मैक्सिस मामले में एक महीने के भीतर दूसरी बार कार्ति चिदंबरम से पूछताछ की है. इससे पहले 10 अप्रैल को जांच एजेंसी द्वारा कार्ति चिदंबरम से लंबी पूछताछ की गई थी. इस दौरान उनसे कई सवाल-जवाब किए गए थे.

मालूम हो कि कार्ति चिदंबरम द्वारा साल 2006 में एयरसेल-मैक्सिस सौदे के तहत विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी मिलने के मामले की जांच CBI और ED कर रहे हैं. उस समय पी चिदंबरम वित्तमंत्री थे. सूत्रों ने आजतक को बताया कि कार्ति चिदंबरम पूछताछ के दौरान ED का सहयोग नहीं कर रहे थे.

एक अधिकारी के मुताबिक जब कभी उनसे इस सिलसिले में पूछताछ की जाती है, तो वह जवाब नहीं देते हैं. ज्यादा कुरेदने पर कहते हैं कि उनको इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. यही कारण है कि कार्ति चिदंबरम को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया था. एयरसेल-मैक्सिस मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम भी जांच एजेंसी की रडार में हैं.

उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एयरसेल-मैक्सिस को एफडीआई के अनुमोदन के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी को नजरअंदाज कर दिया था.  ED के मुताबिक एयरसेल-मैक्सिस डील में तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कैबिनेट कमेटी की अनुमति के बिना ही मंजूरी दी थी, जबकि ये डील 3500 करोड़ रुपये की थी.

नियमों के मुताबिक वित्तमंत्री 600 करोड़ रुपये तक की डील को ही मंजूरी दे सकते थे. एफआईपीबी ने फाइल को वित्तमंत्री के पास भेजा और उन्होंने इसे मंजूर कर दिया. इस मामले में एफआईपीबी के अधिकारियों के बयान भी ईडी ने दर्ज किए हैं. कार्ति चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में भी आरोपी हैं. उन पर 305 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करने के लिए बिना नियम के एफआईपीबी की मंजूरी लेने का आरोप है.

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