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करतारपुर कॉरिडोर पर जल्दी के पीछे पाकिस्तान की मंशा क्या है?

करतारपुर कॉरिडोर के लिए दूसरे दौर की वार्ता एक बार गोपाल चावला के नाम पर रद्द हो जाने के कारण पाकिस्तान के इस कदम को भारत के दबाव के आगे झुकने के रूप में देखा गया.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 14 July 2019
करतारपुर कॉरिडोर पर जल्दी के पीछे पाकिस्तान की मंशा क्या है? प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटोः Aajtak.in)

करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भारत के साथ होने वाली अधिकारी स्तर की वार्ता से ठीक एक दिन पहले इमरान खान की सरकार ने पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) से कुख्यात खालिस्तानी आतंकवादी गोपाल चावला समेत चार खालिस्तानी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया. पाकिस्तान ने गोपाल चावला को बाहर किया, लेकिन अन्य खालिस्तानी आतंकवादियों को भर लिया.

करतारपुर कॉरिडोर के लिए दूसरे दौर की वार्ता एक बार गोपाल चावला के नाम पर रद्द हो जाने के कारण पाकिस्तान के इस कदम को भारत के दबाव के आगे झुकने के रूप में देखा गया. लेकिन पाकिस्तान ने जिस तरह पीएसजीपीसी में गोपाल चावला को हटाकर दूसरे खालिस्तानी आतंकवादियों को बिठा दिया, उससे यही लग रहा कि यह भारत को भ्रमित करने के लिए उठाया गया कदम है.

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान की तत्परता पर शंका जताई थी कि कहीं पाकिस्तान इसलिए तो जल्दी में नहीं कि इसका इस्तेमाल खालिस्तानी आतंकवादी कर सकें. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भी पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर के सहारे खालिस्तानी आंदोलन को बढ़ावा देने की फिराक में है.

विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर को लेकर इसीलिए बेचैन है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी काफी वक्त से भारत में ड्रग्स की सप्लाई का नया रूट खोज रही है. करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते नशे के कारोबार को बढ़ावा देना भी उसका लक्ष्य हो सकता है.

तीन दशक से पाक कर रहा प्रयास

पाकिस्तान पिछले तीन दशकों से करतारपुर कॉरिडोर के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन सुरक्षा समेत कई कारणों से भारत इसके लिए तैयार नहीं था. अब मोदी सरकार इसके लिए तैयार हुई है. हालांकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि करतारपुर कॉरिडोर को किसी भी कीमत पर खालिस्तानियों के फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. बता दें कि भारत ने पाकिस्तान से दो टूक कह दिया था कि जब तक करतारपुर कॉरिडोर कमेटी में गोपाल चावला जैसे खालिस्तानी आतंकवादी रहेंगे, तब तक करतारपुर कॉरिडोर पर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी.

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