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महाभियोग: उपराष्ट्रपति अपने आप को जज समझ रहे हैं तो उनकी सोच गलत है: कपिल सिब्बल

महाभियोग के प्रस्ताव पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं जैसे- पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबम के हस्ताक्षर न होने के सवाल पर सिब्बल ने कहा कि इन दोनों नेताओं से साइन करने को नहीं कहा गया. साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूर्व पीएम को किसी विवाद में नहीं घसीटना चाहती थी.

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राजदीप सरदेसाई / भारत सिंह नई दिल्ली, 24 April 2018
महाभियोग: उपराष्ट्रपति अपने आप को जज समझ रहे हैं तो उनकी सोच गलत है: कपिल सिब्बल कपिल सिब्बल

कांग्रेस समेत सात राजनीतिक दलों की ओर से देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले पर इंडिया टुडे ग्रुप के सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत की. पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश.

मनमोहन-चिदंबरम से नहीं कहा- साइन करो

महाभियोग के प्रस्ताव पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं जैसे- पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबम के हस्ताक्षर न होने के सवाल पर सिब्बल ने कहा कि इन दोनों नेताओं से साइन करने को नहीं कहा गया था. साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूर्व पीएम को किसी विवाद में नहीं घसीटना चाहती थी, इसलिए उन्हें इससे दूर रखा गया. सिब्बल ने कहा कि अश्विनी कुमार और सलमान खुर्शीद सांसद नहीं हैं, इसलिए उनके साइन भी नहीं लिए गए. उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर विभिन्न दलों के सांसदों के साइन करीब एक महीना पहले ही ले लिए गए थे. इसका लोया केस में आए फैसले से कुछ लेना-देना नहीं है. यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी.

उम्मीद थी कि दीपक मिश्रा कुछ करेंगे

सिब्बल ने कहा कि पिछले हफ्ते उपराष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला दिया था. उपराष्ट्रपति ने 20 अप्रैल को 12 बजे सांसदों को मिलने के लिए बुलाया था, लेकिन यह प्रक्रिया काफी पहले से ही शुरू हो गई थी, लेकिन इंतजार इसलिए किया गया क्योंकि मुख्य न्यायाधीश के कुछ करने की उम्मीद थी.

न्यायिक संस्था नहीं हैं उपराष्ट्रपति

महाभियोग प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति के स्तर से खारिज किए जाने के बारे में कपिल सिब्बल ने कहा कि इतिहास में ऐसा कभी देखने को नहीं मिला, सभी मामलों में जांच की गई. उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति को सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में गिनाई गई वजहों पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए था. सिब्बल ने आगे कहा कि यह तय करने का अधिकार जजों की समिति का होता. जांच के बाद ही सबूत सामने आते. उपराष्ट्रपति को समिति गठित करनी चाहिए थी. साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या वह खुद को न्यायिक संस्था मानते हैं, अगर ऐसा है तो वह गलत हैं. वह जज नहीं हैं. वह उच्च पद पर आसीन हैं, मैं उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाना चाहता हूं.

सोराबजी करते हैं बीजेपी के लिए बैटिंग

सिब्बल ने कहा कि वह फाली नरीमन की इस बात से सहमत हैं कि मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन है. उन्होंने कहा कि सोली सोराबजी हमेशा बीजेपी के लिए बैटिंग करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक भी ऐसा मौका नहीं है जब सोराबजी ने कांग्रेस के पक्ष में कोई बात की हो.

नायडू के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे

आगे की प्रक्रिया के बारे में पूछने पर कपिल सिब्बल ने कहा कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे. उन्होंने दोहराया कि इस मामले में जजों की कमेटी के स्तर से जांच होनी चाहिए. सिब्बल ने सवाल किया कि क्या सरकार यह चाहती है कि महाभियोग के बारे में जजों की कमेटी की जांच न हो? उन्होंने कहा कि जांच से ही पता चलेगा कि कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं.

अपनी अंतररात्मा की आवाज सुनें दीपक मिश्रा

सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार न्यायपालिका पर कब्जा करने की कोशिश में है. उन्होंने कहा कि केसों के बंटवारे में पक्षपात का आरोप सुप्रीम कोर्ट के ही चार जजों ने लगाया है, कांग्रेस पार्टी ने नहीं. उन्होंने फिर से दोहराया कि वह उन केसों में पेश नहीं होंगे जिनकी सुनवाई सीजेआई दीपक मिश्रा करेंगे. सिब्बल ने कहा कि दीपक मिश्रा को अपनी अंतररात्मा की आवाज सुननी चाहिए तब कोई फैसला करना चाहिए. हम चाहते हैं कि गंगोत्री पवित्र और न्यायपालिका साफ हो. 

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