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व्यंग्य: जयललिता ने अंबानी और सांघवी को भी पीछे छोड़ा

'कांग्रेचुलेशंस... जया बेन...' पटाखों के भारी शोरगुल के बीच जयललिता के मोबाइल की घंटी बजी. कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के बाद ये पहली कॉल थी. कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.
व्यंग्य: जयललिता ने अंबानी और सांघवी को भी पीछे छोड़ा जयललिता
मृगांक शेखरनई दिल्ली, 12 May 2015

'कांग्रेचुलेशंस... जया बेन...'

पटाखों के भारी शोरगुल के बीच जयललिता के मोबाइल की घंटी बजी. कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के बाद ये पहली कॉल थी. कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.

'थैंक्स'. रस्म अदायगी में बोलना था इसलिए जयललिता ने बोल दिया. सोचा, शशि होगी, लेकिन इसकी आवाज को क्या हुआ? अगले ही पल मन में एक साथ कई सवाल गूंजने लगे.

आखिर वो 'बेन' क्यों बोलेगी? कहीं ये आनंदी बेन पटेल तो नहीं? अभी उधेड़बुन चल ही रही थी कि तस्वीर साफ हो गई.

'मायावती बोल रही हूं. आपने तो सोचा भी नहीं होगा. फैसले के बाद पहली कॉल मेरी होगी, बहुत बहुत बधाई हो बहन,' दूसरी तरफ से बात का सिलसिला जारी था, 'अभी-अभी मैंने आईपैड पर फोर्ब्स की साइट देखी तो सबसे ऊपर तुम्हारा नाम है. नीचे नोट लिखा है - नेक्स्ट कवर स्टोरी ऑन जयललिता : कैसे जया ने अंबानी और सांघवी को पीछे छोड़ा.' 'कमाल है - तूने तो सबको भी पीछे छोड़ दिया. मतलब अब तेरे सारे महंगे सामान - आय के स्रोत के दायरे में हैं! कमाल है!'

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