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भिवंडी लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को मतदान, 15 उम्मीदवार मैदान में

इस सीट पर बीजेपी ने मौजूदा सांसद कपिल पाटिल को फिर टिकट दिया है. जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद सुरेश तावड़े को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं.

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अमित कुमार दुबे नई दिल्ली, 28 April 2019
भिवंडी लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को मतदान, 15 उम्मीदवार मैदान में भिवंडी से बीजेपी उम्मीदवार कपिल पाटिल (Photo: Twitter)

महाराष्ट्र की भिवंडी लोकसभा सीट पर चौथे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. इस सीट पर बीजेपी ने मौजूदा सांसद कपिल पाटिल को फिर टिकट दिया है. जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद सुरेश तावड़े को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं.

महाराष्ट्र की भिवंडी लोकसभा सीट परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आई थी. इसके बाद यहां पहला चुनाव 2009 में हुआ. आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी के कपिल पाटिल ने चुनाव जीता था. उन्हें 4,11,070 वोट हासिल हुए थे. उन्होंने कांग्रेस के विश्वनाथ पाटिल को चुनाव हराया. उन्हें 3,01,620 वोट हासिल हुए थे. वहीं, मनसे के सुरेश महात्रे तीसरे स्थान पर रहे. उन्हें 93,647 वोट मिले थे.

बता दें कि भिवंडी सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के कारण किसी भी एक पार्टी की एकतरफा जीत नहीं हो पाती है. पिछले कुछ चुनाव से यहां कांग्रेस और बीजेपी का खेल मनसे बिगाड़ती रही है.

2009 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही समीकरण उलझा था. यहां कांग्रेस के सुरेश तावरे चुनाव जीते थे. उन्हें 1,82,789 वोट मिले. तावरे ने बीजेपी के जगन्नाथ पाटिल को चुनाव हराया. पाटिल को 1,41,425 वोट मिले. वहीं, तीसरे स्थान पर रहे देवराज महरात्रे उन्हें 1,07,090 वोट मिले थे.

कैसे बदले भिवंडी के समीकरण....

ठाणे जिले में आने वाली भिवंडी सीट परिसीमन के पहले डहाणू लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा थी. डहाणू से अलग होने के बाद भिवंडी में वो तीन विधानसभा आई जहां बीजेपी का दबदबा रहा. यही वजह है कि शिवसेना से गठबंधन के बाद बीजेपी इस सीट को अपने पास ही रखती आई है.

मालूम हो कि 1999 में बीजेपी के चिंतामन वनगा ने डहाणू लोकसभा सीट पर कांग्रेस के डी एम शिंगडा को हराया. उसके बाद से डहाणू में बीजेपी का दबदबा बढ़ा. लेकिन परिसीमन के बाद जिन इलाकों में बीजेपी का दबदबा था उनमें से तीन विधानसभा सीट जवाहर, डहाणू और इगतपुरी भिवंडी लोकसभा से कट गई.

जिसका असर भिवंडी में 2009 के लोकसभा चुनाव में भी दिखाई दिया. यहां बीजेपी की हार हुई कांग्रेस के सुरेश तावरे जीते. जबकि बीजेपी के जगन्नाथ पाटिल को हार का सामना करना पड़ा.

क्या है विधानसभा सीटों की स्थिति...

भिवंडी लोकसभा सीट की 6 विधानसभा सीटों पर हमेशा ही कांग्रेस और एनसीपी का दबदबा रहा है. लेकिन पिछले कुछ चुनाव से यहां शिवसेना और बीजेपी ने दम भरा है. पिछले विधानसभा चुनाव में यहां समीकरण बदले हैं. भिवंडी ग्रामीण और भिवंडी ईस्ट विधानसभा पर शिवसेना का राज है. तो भिवंडी वेस्ट, कल्याण वेस्ट और मुर्बाद पर बीजेपी का राज है. जबकि एनसीपी यहां की शाहपुर सीट पर काबिज है.

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