एडवांस्ड सर्च

लेट हो सकता है अंतरिक्ष में भारत का ब्रह्मास्त्र, सर्जिकल स्ट्राइक में था अहम रोल

ISRO अक्टूबर में अपने सबसे ताकतवर निगरानी सैटेलाइट को लॉन्च करने वाला था. लेकिन, हो सकता है कि इस मिशन को एक महीने तक के लिए टाल दिया जाए. वैसे, इसके लॉन्च होते ही पाकिस्तान समेत देश के दुश्मनों के होश उड़ जाएंगे.

Advertisement
aajtak.in
ऋचीक मिश्रा नई दिल्ली, 11 September 2019
लेट हो सकता है अंतरिक्ष में भारत का ब्रह्मास्त्र, सर्जिकल स्ट्राइक में था अहम रोल टल सकती है कार्टोसैट की लॉन्चिंग, बाकी मिशन समय पर ही होंगे. (फोटो-इसरो)

इसरो (Indian Space Research Organisation - ISRO) अक्टूबर के अंत तक देश के सबसे ताकतवर निगरानी सैटेलाइट कार्टोसैट-3 की लॉन्चिंग करने वाला था, लेकिन अब ऐसी चर्चा है कि इसकी लॉन्चिंग एक महीने तक टल सकती है. इसरो के विश्वस्त सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है. इसरो चीफ डॉ. के. सिवन ने कहा था कि चंद्रयान-2 मिशन के बाद इस साल वे एक और बड़ा मिशन लॉन्च करेंगे. उनका इशारा कार्टोसैट-3 की तरफ ही था.

हालांकि, जब यह मिशन (कार्टोसैट-3) लॉन्च होगा तब इससे देश के दुश्मनों के होश उड़ जाएंगे. इसके टलने की वजह चंद्रयान-2 मिशन में आई गड़बड़ी है. कहा जा रहा है कि अभी इसरो की एक बड़ी और महत्वपूर्ण टीम विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने में लगी है, इसलिए कार्टोसैट-3 की लॉन्चिंग में थोड़ी बहुत देरी हो सकती है. आपको बता दें कि कार्टोसैट-1 और 2 की मदद से ही हमारी सेनाओं ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक की थी.

2.1 KM नहीं, 335 मीटर पर टूटा था विक्रम से ISRO का संपर्क, ये ग्राफ है सबूत

वैसे तो इस सैटेलाइट का काम होगा अंतरिक्ष से भारत की जमीन पर नजर रखना. आपदाओं में और ढांचागत विकास के लिए मदद करना लेकिन इसका उपयोग देश की सीमाओं की निगरानी के लिए भी होगा. पाकिस्तान और उसके आतंकी कैंपों पर नजर रखने के लिए यह मिशन देश की सबसे ताकतवर आंख होगी. यह सीमाओं पर नजर रखेगी. दुश्मन या आतंकियों ने हिमाकत की तो इस आंख की मदद से हमारी सेना उन्हें उनके घर में घुस कर मारेगी.

ये कैसा इनाम? Chandrayaan-2 से पहले सरकार ने काटी ISRO वैज्ञानिकों की तनख्वाह

आइए...जानते हैं यह कौन सी सैटेलाइट है और इसकी ताकत कितनी है?

इस सैटेलाइट का नाम है - Cartosat-3 (कार्टोसैट-3). यह कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट होगा. कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम (9.84 इंच) की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा. यानी आप की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे सही समय की भी सटीक जानकारी देगा. बता दें कि पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम. प्राकृतिक आपदाओं में मदद करेगा.

1 साल के लिए गया था चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर, जानिए कैसे 7 साल तक करता रहेगा काम

दुनिया का सबसे ताकतवर सैटेलाइट कैमरा होगा Cartosat-3 में

कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 0.25 मीटर यानी 9.84 इंच की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है. संभवतः अभी तक इतनी सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है. अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है. वहीं, इसी कंपनी का वर्ल्डव्यू-2 उपग्रह 18.11 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है. इसे पृथ्वी से 450 किमी ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

कार्टोसैट सीरीज के 8 सैटेलाइट अब तक किए गए हैं लॉन्च

कार्टोसैट सीरीज का पहला सैटेलाइट कार्टोसैट-1 पांच मई 2005 को पहली बार लॉन्च किया गया था. इसकी लाइफ 5 साल की थी. इसके बाद 10 जनवरी 2007 को कार्टोसैट-2 लॉन्च किया गया. इसके बाद, 28 अप्रैल 2008 को कार्टोसैट-2ए लॉन्च किया गया. 12 जुलाई 2010 को कार्टोसैट-2बी, 22 जून 2016 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट, 15 फरवरी 2017 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट, 23 जून 2017 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट और 12 जनवरी 2018 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट लॉन्च किए गए.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay