एडवांस्ड सर्च

चांद पर लैंडर से संपर्क नहीं हुआ तो चंद्रयान-3 में दोबारा भेजे जा सकते हैं विक्रम-प्रज्ञान

अगर विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं हुआ तो क्या होगा....ये सवाल सबके जेहन में है. आइए, आपको बताते हैं कि अगर किसी भी तरह से इसरो के वैज्ञानिक विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं कर पाते हैं तो भविष्य की क्या योजना है.

Advertisement
aajtak.in
ऋचीक मिश्रा नई दिल्ली, 12 September 2019
चांद पर लैंडर से संपर्क नहीं हुआ तो चंद्रयान-3 में दोबारा भेजे जा सकते हैं विक्रम-प्रज्ञान चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर और विक्रम लैंडर. (फोटो-इसरो)

इसरो (Indian Space Research Organisation - ISRO) के वैज्ञानिक लगातार चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर मौजूद चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क साधने में लगे हैं. हालांकि, चांद की सतह पर विक्रम की लैंडिंग के बाद से अब तक 6 दिन बीत गए हैं. लेकिन उससे संपर्क नहीं हो पाया है. इसरो के वैज्ञानिकों का प्रयास रंग नहीं ला पा रहा है. इसके बावजूद इसरो, उसके वैज्ञानिकों और देश की जनता ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. वैज्ञानिक प्रयास कर रहे हैं कि संपर्क हो जाए और लोग प्रार्थना कर रहे कि वैज्ञानिक सफल हो जाए. देखते हैं कि किसका लोगों की प्रार्थना और वैज्ञानिकों का प्रयास कितना सफल होता है.

हमारे वैज्ञानिक हारे नहीं हैं. बस जीत की खुशी उनके हाथ से निकलकर कुछ समय के लिए आगे निकल गई है. अगर विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं हुआ तो क्या होगा....ये सवाल सबके जेहन में है. आइए, आपको बताते हैं कि अगर किसी भी तरह से इसरो के वैज्ञानिक विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं कर पाते हैं तो भविष्य की क्या योजना है.

2.1 KM नहीं, 335 मीटर पर टूटा था विक्रम से ISRO का संपर्क, ये ग्राफ है सबूत

चंद्रयान-3 में भेजे जाएंगे अपग्रेडेड विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर

इसरो के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि इसरो ने इस बात पर विचार करना शुरू कर दिया है कि अगर विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं हुआ तो वे विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का अपग्रेडेड यानी आधुनिक वर्जन को चंद्रयान-3 में भेजेंगे. चंद्रयान-3 में जाने वाले लैंडर और रोवर में ज्यादा बेहतरीन सेंसर्स, ताकतवर कैमरे, अत्याधुनिक नियंत्रण प्रणाली और ज्यादा ताकतवर संचार प्रणाली लगाई जाएगी. ऐसा भी कहा जा रहा है कि चंद्रयान-3 के सभी हिस्सों में बैकअप संचार प्रणाली भी लगाई जा सकता है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी होने पर बैकअप संचार प्रणाली का उपयोग किया जा सके.

लेट हो सकता है अंतरिक्ष में भारत का ब्रह्मास्त्र, सर्जिकल स्ट्राइक में था अहम रोल

जापान दे सकता है चंद्रयान-3 में भारत का साथ

ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के चंद्रयान-3 मिशन में जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा (JAXA) भी मदद करे. इसके लिए वह अपना सबसे ताकतवर रॉकेट एच-3 का उपयोग करेगा. हालांकि, अभी यह रॉकेट बनाया जा रहा है. इस मिशन के लिए भारत लैंडर और ऑर्बिटर देगा और जापान रॉकेट और रोवर की सुविधा प्रदान करेगा. इससे उम्मीद जताई जा रही है कि जापान के ताकतवर रॉकेट की वजह से चंद्रयान-3 जल्दी चांद पर पहुंचेगा.

ये कैसा इनाम? Chandrayaan-2 से पहले सरकार ने काटी ISRO वैज्ञानिकों की तनख्वाह

चंद्रयान-2 से मिले आंकड़ों के आधार पर तय होगा चंद्रयान-3 मिशन

अभी, इसरो में चंद्रयान-3 के बारे में तैयारियों के लेकर कोई चर्चा नहीं है. लेकिन, यह स्पष्ट किया जा चुका है कि चंद्रयान-2 से मिले आंकड़ों के आधार पर ही चंद्रयान-3 मिशन पूरा किया जाएगा. चंद्रयान-3 की संभावित तारीख 2024 थी लेकिन अब लग रहा है कि इस मिशन में थो़ड़ा देर हो सकता है. ऐसा भी हो सकता है कि इसरो दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियों से पेलोड्स बनाने के लिए कहे.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay