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भारत में अमेरिकी परमाणु रिएक्टरों की स्थापना के लिए अंतर एजेंसी समूह गठित करने का फैसला

भारत में अमेरिकी परमाणु रिएक्टरों की स्थापना के मार्ग की बाधाएं दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबामा के साथ मिलकर एक अंतर एजेंसी समूह का गठन करने का फैसला लिया है. ताकि जवाबदेही, प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों जैसे सभी मसलों का समाधान किया जा सके और भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई ऊंचाई दी जा सके.

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aajtak.in [Edited by: नंदलाल शर्मा]नई दिल्ली, 01 October 2014
भारत में अमेरिकी परमाणु रिएक्टरों की स्थापना के लिए अंतर एजेंसी समूह गठित करने का फैसला PM नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में जब अमेरिका के साथ परमाणु समझौता हुआ, उस वक्त भारत-अमेरिका संबंध एक नई ऊंचाई पर था. समझौता हो गया लेकिन इस क्षेत्र में दोनों देश आगे बढ़ पाए और इसी के साथ अमेरिका के साथ संबंधों में शिथिलता आती गई. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद दोनों देश इस क्षेत्र में आगे बढ़ने को उतावले दिख रहे हैं.

भारत में अमेरिकी परमाणु रिएक्टरों की स्थापना के मार्ग की बाधाएं दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबामा के साथ मिलकर एक अंतर एजेंसी समूह का गठन करने का फैसला लिया है. ताकि जवाबदेही, प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों जैसे सभी मसलों का समाधान किया जा सके और भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई ऊंचाई दी जा सके.

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव विक्रम दुरई स्वामी ने मोदी और ओबामा के बीच मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया, ‘हम भारत में अमेरिका निर्मित परमाणु रिएक्टरों की तुरंत स्थापना के लिए जवाबदेही, प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों जैसे सभी मसलों के समाधान की खातिर एक अंतर एजेंसी समूह का गठन कर रहे हैं.

दुरईस्वामी ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी गठबंधन में शामिल नहीं होगा, लेकिन दोनों पक्ष ऐसे सहयोग पर सहमत हुए हैं जिसके तहत आतंकवाद फैलाने वाले तत्वों पर लगाम कसी जाएगी. दुनियाभर में घूम घूम कर लोगों को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें पश्चिम एशिया में आतंकवादी गतिविधियों में भाग लेने वालों के मकसद नाकामयाब किए जाएंगे.

उन्होंने कहा, 'यह हमारे लिए बहुत बड़ा मुद्दा है. अफगानिस्तान के संबंध में मोदी और ओबामा ने वहां जारी राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक संक्रमण के दौर पर चर्चा की.'

भारतीय अधिकारी ने कहा, ‘हम अफगानिस्तान की इस संक्रमणकालीन प्रक्रिया को समर्थन देना जारी रखेंगे.' भारत और अमेरिका स्वाभाविक वैश्विक सहयोगी के रूप में अपने रक्षा सहयोग को और दस वर्ष के लिए बढ़ाने पर सहमत हुए है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी कंपनियों को भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया. रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को हाल ही में 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी किया गया है.

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