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Exclusive: 10 हजार रुपये में बन सकते हैं भारत के फर्जी नागरिक

बांग्लादेशी अप्रवासियों के लिए भारत की नागरिकता पाना कितना आसान है यह जानने के लिए इंडिया टुडे की टीम ने असम के ढुबरी का दौरा किया. ढुबरी असम-बांग्लादेश बॉर्डर के इलाके में आता है. ब्रह्मपुत्र नदी की वजह से इस जिले का बड़ा हिस्सा खुला है. जिले में 75 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है.

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aajtak.in
प्रियंका झा/ राहुल कंवल गुवाहाटी, 09 April 2016
Exclusive: 10 हजार रुपये में बन सकते हैं भारत के फर्जी नागरिक इंडिया टुडे की खास पड़ताल

असम के विधानसभा चुनावों में इस बार सीमापार से गैरकानूनी घुसपैठ सबसे बड़ा मुद्दा रही है. लेकिन यह समस्या कितनी बड़ी है इसे जानने के लिए इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने असम का दौरा किया और जाना कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी विदेशी के लिए भारतीय नागरिकता पाना कितना आसान है.

विदेशी भी देंगे वोट
जांच के दौरान जो सबसे ज्यादा परेशान कर देने वाली बात सामने आई वो यह कि कुछ अवैध अप्रवासी, जिन्हें ट्रिब्यूनल ने आधिकारिक तौर पर विदेशी घोषित किया हुआ है लेकिन उनके पास अब भी वोट देने का अधिकार है. तो जब 11 अप्रैल को असम में दूसरे चरण का मतदान होगा तब सिर्फ भारतीय नागरिक ही नहीं बल्कि बांग्लादेश से आए कुछ अवैध अप्रवासी भी वोट देंगे.

बांग्लादेशी अप्रवासियों के लिए भारत की नागरिकता पाना कितना आसान है यह जानने के लिए इंडिया टुडे की टीम ने असम के ढुबरी का दौरा किया. ढुबरी असम-बांग्लादेश बॉर्डर के इलाके में आता है. ब्रह्मपुत्र नदी की वजह से इस जिले का बड़ा हिस्सा खुला है. जिले में 75 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. असम और खासतौर पर ढुबरी में मुस्लिमों की आबादी पूरे भारत की तुलना में तेजी से बढ़ रही है. स्थानीय लोगों की शिकायत है कि क्षेत्र में मुस्लिमों की बढ़ती आबादी की वजह बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ है.

कितना आसान है फर्जी दस्तावेज से नागरिकता पाना?
सच्चाई का पता लगाने के लिए इंडिया टुडे की टीम सबसे पहले डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिस गई. जहां सिर्फ भारतीयों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनते हैं. लेकिन ऑफिस के बाहर रहने वाले दलालों को इससे खास फर्क नहीं पड़ता कि लाइसेंस बनवाने वाला भारतीय है या बांग्लादेशी. इंडिया टुडे की टीम अबु तहब नाम के एक दलाल से मिली. उसे बताया गया कि जिसका लाइसेंस बनवाना है वह बांग्लादेशी है. दलाल ने इसके बदले 10 हजार रुपये मांगे और कहा कि लाइसेंस ढुबरी के पते पर बन जाएगा. दलाल ने इसके लिए 1 महीने का समय मांगा.

सिर्फ ढुबरी में रहते हैं 27 हजार अवैध घुसपैठिए
बांग्लादेश से असम आना काफी आसान है. क्योंकि ब्रह्मपुत्र नदी की वजह से सीमा पर बाड़ लगाना लगभग असंभव है. किसी भी अप्रवासी को सबसे पहले नागरिकता सर्टिफिकेट की जरूरत होती है, जो कि सिर्फ 10000 रुपये में उपलब्ध है. साल 2013 से ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स ऑफिस यह राज्य में विदेशियों की संख्या पता लगाने की कोशिश कर रहा है.

इंडिया टुडे की टीम जब ढुबरी के डिस्ट्रिक्ट ऑफिस ऑफ एनआरसी पहुंची तो पता लगा कि बांग्लादेशी अप्रवासी द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागरिकता हासित करने के कई मामले सामने आ चुके हैं. एनआरसी की जांच में पता लगा कि सिर्फ ढुबरी जिले में ही 27 हजार अवैध घुसपैठिए हैं. बता दें कि यह वो आंकड़ा है जो आधिकारिक तौर पर दाखिल है, असल में इससे ज्यादा संख्या में बांग्लादेशी अप्रवासी मौजूद हैं.

इंडिया टुडे की टीम ने इसके बाद असम के चिरांग जिले का दौरा किया. यहां भी स्थिति लगभग ढुबरी जैसी ही थी. यहां महज 5 हजार रुपये में बर्थ सर्टिफिकेट मिल रहे थे. अगर किसी को फर्जी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट बनवाना हो तो उसके लिए भी 5 हजार रुपये और अगर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो तो उसके लिए 3500 रुपये चुकाने होंगे. जो सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था वह यह कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स ने ऐसे कई मामलों का पता लगाया है जहां अवैध अप्रवासी असली भारतीय वोटर कार्ड तक बनवाने में सफल हो चुके हैं.

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