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India Couture week का बैकस्टेज...अभिसारिका और अद्भुत खोज

कोई भी कला अद्भुत हो जाती है जब इसमें आसपास का वातावरण, ऊर्जा और परिस्थितियां समाहित हो जाती हैं. ठीक उसी प्रकार जैसे किसी गाने के शब्द आपको याद नहीं होते लेकिन जब उस मधुर संगीत को आप सुनते हैं तो शब्द भी याद आते हैं और धुन आपको मंत्रमुग्ध कर देती है. एक शो के फोटोग्राफी के दौरान मेरा अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा.

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बंदीप सिंहनई दिल्ली, 19 August 2019
India Couture week का बैकस्टेज...अभिसारिका और अद्भुत खोज India Couture week के दौरान शो में भाग लेने वाली मॉडल

कोई भी कला अद्भुत हो जाती है जब इसमें आसपास का वातावरण, ऊर्जा और परिस्थितियां समाहित हो जाती हैं. ठीक उसी प्रकार जैसे किसी गाने के शब्द आपको याद नहीं होते लेकिन जब उस मधुर संगीत को आप सुनते हैं तो शब्द भी याद आते हैं और धुन आपको मंत्रमुग्ध कर देती है. एक शो के फोटोग्राफी के दौरान मेरा अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा.

पिछले साल 2018 में जब मैं India Couture week के दौरान फैशन डिजाइनर सुनीत वर्मा के शो में फोटोग्राफी के लिए पहुंचा तो रैंप पर जलवा बिखेरने से ठीक पहले मैंने एक मॉडल को देखा. वो गहरे रंग के भारी परिधान में अलौकिक खूबसूरती बिखेर रही थीं.

model3edited_081419032509.jpgIndia Couture week के दौरान सज - धजकर भाग रहीं इन मॉडल्स को देखकर यूं लगा जैसे बेसुध होकर कोई प्रेयसी अपने प्रेमी से मिलने के लिए दौड़े जा रही है. जैसे वो एक पल भी गंवाना नहीं चाहती, और तुरंत प्रेमी के आपस पहुंच जाना चाहती है.

उसके चेहरे पर जो भाव थे, उसे बयां करना आसान नहीं है. वह अपनी मनमोहक पोशाक और श्रृंगार में सज कर पूरी तरह तैयार थी. रैंप पर जाने के पहले आखिरी मिनट की तैयारियों में वह व्यस्त थी. कभी वह आईने में अपने रूप को निहारती तो कभी परिधानों को.

main2edited_081419111605.jpgभारतीय परंपरा की सिंड्रेला जो सज धजकर प्रेमी से मिलने के लिए निकली तो है लेकिन ऐसे निकलती है जैसे दुनिया की नजरें उसे जाते हुए न देखें. वो प्रेम में तो सरोबार है लेकिन दुनिया को अपनी मोहब्बत की भनक नहीं लगने देना चाहती. 

इस साल 2019 में मैं फिर India Couture week में सुनीत वर्मा के शो में फोटोग्राफी के लिए पहुंचा. लेकिन इस बार शो की जगह अजीब थी, एक मॉल. यहां कोई बैकस्टेज नहीं था, कोई आईना नहीं था और ना ही एंबियंस लाइट और ना ही फोटोग्राफी के लिए ठीक जगह. लेकिन जैसे ही अंधेरे को चीरती हुई सेल्फी कैमरे की लाइट मॉडल के बालों पर पड़ी तो मंत्रमुग्ध करने वाला समां बंध गया. सफेद लाइट की रोशनी में नहाते उसके जुल्फ खूबसूरत छटा बिखेर रहे थे.

abhisariedited_081419032329.jpgभारतीय कला की अभिसारिका जिसे प्रेम की ऐसी लगन लगी है कि उसे किसी भी बात की फ़िक्र नहीं है. वो एक अलग ही दुनिया में है. वो अपने प्रेमी से मिलने के लिए इतनी तड़प रही है कि उसे फर्क ही नहीं पड़ता कि जंगल है, सांप हैं, वो प्रेमी के लिए हर जोखिम से गुजरने के लिए निकल पड़ी है.  

अब भी फोटोशूट के लिए सही जगह नहीं मिल रही थी. रैंप पर एंबियंस लाइट का अभाव था. मैंने अपना कैमरा बगल में रखा और शो देखने लगा. लेकिन शो के शुरू होने के पांच मिनट बाद ही कुछ जादुई चीजें हुईं.

painting_cut_081619052502.jpgप्रेम के लिए प्रेयसी सारी  के लिए तैयार है. जैसे उसे फर्क ही नहीं पड़ता कि दुनिया में और क्या है, दुनियावाले क्या कहेंगे. 

चूंकि शो एक मॉल में हो रहा था. इसलिए वहां रैंप के पास कपड़े बदलने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं थी. रैंप पर एक बार परफार्मेंस देने के बाद मॉडल को दूसरे परफार्मेंस के लिए ड्रेस बदलने की जल्दी थी.

model2edited_081419033612.jpgये प्रेम की अगन ही है कि अपने देवदास की एक झलक पाने के लिए ये पारो बेतहाशा भागे जा रही हो.

तभी मेरी नजर एक खूबसूरत मॉडल पर पड़ी. अजीब सुंदरता थी. वह मनमोहक लहंगा और गाऊन में बहुत ही मनमोहक लग रही थी.

abhisari2edited_081419033142.jpgप्रेम में पड़ी प्रेयसी की हालत बेसुध हो जाती है. उसे जमाने की चिंता नहीं है, वो खुद में प्रेमी के साथ खोई रहती है. हालांकि उसकी अवस्था लोगों से छिपती भी नहीं है.

मार्बल फ्लोर पर उसके लंबे-लंबे पैर पड़े और जब वह मेरे बगल से गुजरी तो मेरी नजर उसके चेहरे के भाव पढ़ने लगी. जैसे ही उसकी नजर मेरे कैमरे पर पड़ी उसके चेहरे पर मधुर मुस्कान बिखर गई.

mainedited_081419111723.jpgएक प्रेयसी के लिए सबसे ख़ूबसूरत पल वो होता है जब उसका प्रेमी उसके सौंदर्य और श्रृंगार को मोहित होकर निहारता है. और प्रेमी की ऐसी नजर पड़ते ही प्रेयसी शर्म से खुद में सिमट जाती है.

मेरे कैमरे में कैद उस खूबसूरत मॉडल की अदा कुछ और ही बन गई. शायद उसे जुबां से बयां करना कल्पनाओं से परे है. उसके चहरे के भाव, भारी भरकम गाऊन को जब उसने अपनी नाजुक हथेली से उठाकर भागने की कोशिश की और तेजी से शर्माती सकुचाती ड्रेस बदलने के लिए भागी तो ऐसा लग रहा था मानो कोई प्रेयसी सोलह श्रृंगार कर अपने प्रेमी से मिलने जा रही हो.

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विरह के बाद प्रेमी से मिलन की अवस्था में नायिका की ये स्थिति वैसी है जैसे बिना बादल के वो सावन की फुहारों में भीग रही है. और दौड़कर प्रेमी के पास पहुंचना चाहती है.

ठीक वैसे ही जैसे भारतीय कला की कृष्णा अभिसारिका. जो विरह की आग में तड़पती, प्रेमी से मिलने के लिए अपना सुदबुध खो देती है. वह सांप और अन्य खतनाक जीव-जन्तुओं से भरे घनघोर जंगल में अपने प्रेमी से मिलने के लिए बिल्कुल निर्भिक होकर आगे बढ़ती है. यहां मॉडल के हावभाव और मनोदशा उसी अभिसारिका की तरह लग रही थी.

अद्भुत था वह नजारा. मुख्य घटना से अलग यह कल्पना से परे नजारा था. यह बिल्कुल अपने तरह का शो बन गया.

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