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LAC पर तनाव के बीच सेना प्रमुख के दौरे से चीन को संदेश, हरकतों का मिलेगा करारा जवाब

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने शनिवार को लद्दाख का दौरा किया. उन्होंने टॉप फील्ड कमांडरों के साथ बैठक की और हालात का जायजा लिया.

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aajtak.in
मंजीत सिंह नेगी नई दिल्ली, 23 May 2020
LAC पर तनाव के बीच सेना प्रमुख के दौरे से चीन को संदेश, हरकतों का मिलेगा करारा जवाब LAC पर जारी तनाव के बीच सेना प्रमुख ने किया लद्दाख का दौरा (फाइल फोटो)

  • LAC पर तनाव के बीच सेना प्रमुख का दौरा
  • लेह में 14 कॉर्प्स मुख्यालय भी पहुंचे जनरल एमएम नरवणे

भारत और चीन के बीच एलएसी पर चल रहे विवाद को देखते हुए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने शनिवार को लद्दाख का दौरा किया. उन्होंने टॉप फील्ड कमांडरों के साथ बैठक की और हालात का जायजा लिया. मकसद साफ था. शीर्ष अधिकारियों के साथ मुलाकात करना और हालात का जायजा लेना. जो हालात हैं, उसके मद्देनजर वो लेह में 14 कॉर्प्स मुख्यालय पहुंचे और उत्तरी कमांड के अधिकारियों के साथ अहम चर्चा की.

'अटैक ही बेस्ट डिफेंस'

चीन ने सोचा था कि वो LAC यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने विस्तारवादी पंजे मारता चला जाएगा और भारत चुपचाप बैठा रहेगा. चीन की रणनीति ये थी कि वो अपने इलाके में मनचाहे निर्माण करेगा, लेकिन जैसे ही भारत कोई निर्माण करेगा तो गुंडागर्दी करके दबाव डालना शुरू कर देगा और कोई कुछ नहीं कर पाएगा. लेकिन नये भारत ने चीन को बता दिया है कि चीन की इन हरकतों पर करारा जवाब मिलेगा.

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भारत ने जान लिया है कि अटैक ही बेस्ट डिफेंस है. वैसे चीन सीमा पर आए दिन बढ़ रहे तनाव पर सेना प्रमुख लगातार अपनी चौकन्नी नजर बनाए हुए हैं. सीमा पर तनाव खत्म करने के लिए सेना प्रमुख के दौरे से पहले दोनों देशों के बीच सैन्य अधिकारियों के स्तर पर बातचीत शुरू हुई थी.

ये बातचीत लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारत और चीन के सैन्य अफसरों के बीच उत्तरी लद्दाख में गालवन नाला क्षेत्र में संघर्ष को देखते हुए चल रही है. इस क्षेत्र में दोनों तरफ के सैकड़ों सैनिक आमने सामने हैं. चीन वहां पर अपना दावा कर रहा है. यहां पिछले दो हफ्ते से टकराव बना हुआ है. इसे लेकर ब्रिगेड कमांडरों की फ्लैग मीटिंग भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

भारत को मिला अमेरिका का साथ

उधर, अमेरिका भी चीन के आक्रामक बर्ताव के विरोध में भारत का साथ दे चुका है. चीन खुद कुछ भी करता रहे, लेकिन वो भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकता. ज्यादा दिन नहीं हुए जब उसके हेलीकॉप्टर भारतीय सीमा के बिल्कुल करीब उड़ते देखे गए थे. जिसका माकूल जवाब भारतीय वायु सेना ने दिया था.

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चीन भारतीय सीमा के करीब गालवान नदी के पास अपने सैनिकों के लाने-ले जाने और सामानों की सप्लाई के लिए कई सड़क बना चुका है. इसी को देखते हुए सीमा सड़क संगठन ने अपने क्षेत्र में सड़क बनाने के काम में तेजी ला दी थी. फिलहाल दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में 81 ब्रिगेड के अधिकारियों और उनके चीनी समकक्षों के बीच बैठकें हो रही हैं. दोनों तरफ से सैन्य गश्त भी बढ़ा दी गई है.

दुनिया कोरोना वायरस फैलाने के मुद्दे पर चीन पर दबाव बना रही है. ऐसे में वो पूरा फोकस सीमा विवादों पर शिफ्ट करना चाहता है. मई में भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख और सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में झड़प हो चुकी है .भारत की कोशिश है कि ये विवाद आगे ना बढ़े.

अमेरिका भी इस मामले में भारत के साथ है. दक्षिण एशिया में चीन के बल प्रयोग के खिलाफ अमेरिका ने खुलकर बोलना शुरू कर दिया है. कोरोना काल में चारों तरफ से दबाव झेल रहे चीन के खिलाफ भारत और अमेरिका का एक साथ होना एक बड़ा कूटनीतिक कदम है.

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