एडवांस्ड सर्च

अक्टूबर में मिलेंगे PM नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग, सीमा विवाद पर जारी रहेगी वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर में बैठक होने वाली है. यह बैठक भारत में होगी. लेकिन इससे पहले भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी सवालों को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.

Advertisement
गीता मोहनबीजिंग, 14 August 2019
अक्टूबर में मिलेंगे PM नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग, सीमा विवाद पर जारी रहेगी वार्ता पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो-IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर में बैठक होने वाली है. यह बैठक भारत में होगी. लेकिन इससे पहले भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी सवालों को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.

असल में, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने का फैसला किया है, और चीन ने लद्दाख को लेकर आपत्ति जाहिर की है. चीन की आपत्ति से माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों पर सीमा को लेकर को असर पड़ सकता है. बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर चीन की यात्रा पर आए हुए हैं.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के अपने समकक्ष के सामने यह बात रखी है कि भारत की बाहरी सीमाओं या चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर कोई बाधा सामने नहीं आएगी. भारत कोई अतिरिक्त क्षेत्रीय दावे नहीं कर रहा है और इस संबंध में चीनी चिंताएं गलत थीं. विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में यह बात कही गई है.

विदेश मंत्रालय के इस बयान से जाहिर है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को सफल बनाने के लिए दोनों देश ऐसे सभी मु्द्दों पर बातचीत करना चाहते हैं. चीनी विदेश मंत्री और स्टेट काउंसिलर वांग यी भी सीमा संबंधी मामले में विशेष प्रतिनिधि हैं. जबकि भारत का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे हैं.

लिहाजा दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात के बाद, सीमा संबंधी प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके समकक्ष वांग यी अनौपचारिक शिखर सम्मेलन से पहले मिलेंगे. हालांकि इनकी मुलाकात को लेकर अभी तारीख तय नहीं है. लेकिन भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले इनकी मुलाकात पक्की मानी जा रही है.

बता दें कि सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की मुलाकात पिछले साल 24 नवंबर को हुई थी. चीन में हुई इस मुलाकात में भारत-चीन संबंधों के रणनीतिक दृष्टिकोण से सीमा प्रश्न के महत्व पर सहमति व्यक्त की गई थी और कहा गया था कि इस विवाद का जल्द निपटारा दोनों देशों के मौलिक हितों के लिहाज से जरूरी है.

इस बीच,जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के साथ ही भारत ने बीजिंग को आश्वासन दिया है कि सीमाएं तब तक अप्रभावित रहेंगी जब तक कि दोनों पक्ष सीमा के मुद्दों को परस्पर हल नहीं कर लेते, लेकिन चीन का मानना है कि विशेष प्रतिनिधियों की मुलाकात जरूरी है ताकि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के मिलने से पहले इस पर चर्चा की जा सके.

बहरहाल, सीमा संबंधी विवाद की चिंताओं के बावजूद, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि तनाव के बजाय विकास एक-दूसरे के हित में है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay