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भारत-अमेरिका में बड़ा करार, दोनों देश मिलकर बनाएंगे टेररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर

गृह सचिव राजीव महर्षि और अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा के बीच यह एग्रीमेंट साइन हुआ है.

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aajtak.in
ब्रजेश मिश्र/ जितेंद्र बहादुर सिंह नई दिल्ली, 02 June 2016
भारत-अमेरिका में बड़ा करार, दोनों देश मिलकर बनाएंगे टेररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर

भारत और अमेरिका ने आतंकवादी खतरे को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है. अब दोनों देशों ने एक मल्टी एजेंसी सेंटर के एग्रीमेंट पर साइन किया है जिसके जरिए भारत अमेरिका से बातचीत करेगा. इससे भारत को आतंकियों की रियल टाइम जानकारी मिलती रहेगी.

गृह सचिव राजीव महर्षि और अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा के बीच यह एग्रीमेंट साइन हुआ है. जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब से कुछ दिन बाद अमेरिका के लिए रवाना होंगे. इसके अलावा जुलाई के पहले सप्ताह में गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी अमेरिका में जाएंगे, जहां पर रियल टाइम टेररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर के बारे में विस्तृत चर्चा होगी. इसके साथ ही आतंकवादियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट का भी आदान-प्रदान किया जाएगा.

दूसरे देशों में रह रहे आतंकियों पर कसेगा शिकंजा
भारत में जो आतंकवादियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट है उनसे जुड़े हुए डोजियर को भी मल्टी एजेंसी स्क्रीनिंग सेंटर के पास दिया जाएगा. इसके चलते भारत उन तमाम आतंकवादियों पर नकेल कस सकेगा जो किसी न किसी रूप में दूसरे देशों में रह रहे हैं. ISIS और आतंकी गतिविधियों को लेकर भारत की खुफिया एजेंसी आईबी और रॉ, FBI के साथ टेररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर बनाएंगी.

कैसे काम करेगा टेरर स्क्रीनिंग सेंटर-
1. रियल टाइम आतंकी साजिशों की मिलेगी सूचना.
2. भारत और अमेरिका के बीच मल्टी एजेंसी सेंटर के बीच होगा हॉट लाइन संपर्क.
3. हॉट लाइन के जरिए आतंकियों और उनकी फंडिंग रोकने के लिए तुरंत दी जाएगी जानकारी.
4. मोस्टवांटेड आतंकियों की लिस्ट, उनसे संबंधित डॉजियर की पूरी जानकारी भी साझा होगी.
5. आईएसआईएस की गतिविधियों पर भी नजर रखेंगी दोनों देशों की एजेंसियां.
6. भारत-अमेरिका के साथ शामिल होकर अब 30 देशों के उस पूल में शामिल हो गया है जो पहले से आतंकियों की गतिविधियों को लेकर रियल टाइम जानकारी शेयर करते हैं.

आर्थिक आतंकवाद पर भी होगी कार्रवाई
गृह मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस एग्रीमेंट में उन तमाम चीजों को भी ध्यान में रखा गया है कि अगर भारत के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद फैलाने की कोशिश किसी देश के जरिए होती है और इसमें नकली नोट का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत में आता है, तो क्या कार्रवाई होगी. जानकारी के मुताबिक, करीब 400 करोड रुपए नकली नोट भारत में इस वक्त मौजूद हैं. भारत उन देशों पर भी कड़ा कदम उठाने के लिए अमेरिका से संपर्क कर रहा है जो देश भारत में नकली नोट सप्लाई करते हैं. उन देशों की स्याही की पहचान होने के बाद उनकी स्याही की सप्लाई बंद की जा सकती है.

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