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अब अर्धसैनिक बलों की तैनाती राज्यों को पड़ेगी महंगी, केंद्र सरकार ने बढ़ाया चार्ज

गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर अगले 5 साल के लिए नई दरें तय की हैं. जिसके तहत साल 2018-19 में राज्यों को एक बटालियन की तैनाती के लिए करीब 13 करोड़ देने हैं तो वहीं हाई रिस्क और हार्ड शिप एरिया के लिए 34 करोड़ रुपये सालाना चुकाने होंगे.

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aajtak.in
जितेंद्र बहादुर सिंह नई दिल्ली, 10 October 2019
अब अर्धसैनिक बलों की तैनाती राज्यों को पड़ेगी महंगी, केंद्र सरकार ने बढ़ाया चार्ज अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर गृह मंत्रालय ने राज्यों को लिखी चिट्ठी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

  • राज्य सरकारों को चुकानी होगी 10 -15% अधिक धन राशि
  • गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर तय कीं दरें

अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा के एवज में राज्य सरकारों को अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को चिट्ठी भेजी है, जिसमें कहा गया है कि जिन राज्यों को अर्धसैनिक बलों की जरूरत होगी उनको अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. केंद्र सरकार पहले के मुकाबले अब राज्यों से अर्धसैनिक बलो की तैनाती के एवज में 10 से 15 फीसदी अधिक चार्ज वसूल करेगी.

गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि अब संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती के लिए अधिक भुकतान करना होगा. गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर अगले 5 साल के लिए नई दरें तय की हैं. जिसके तहत साल 2018-19 में राज्यों को एक बटालियन की तैनाती के लिए करीब 13 करोड़ देने हैं तो वहीं हाई रिस्क और हार्ड शिप एरिया के लिए 34 करोड़ रुपये सालाना चुकाने होंगे.

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इसके अलावा साल 2023-24  में राज्यों को एक बटालियन की तैनाती के लिए करीब 22 करोड़ देने हैं. वहीं हाई रिस्क और हार्ड शिप एरिया के लिए करीब 42 करोड़ सलाना देने होंगे. केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक कई ऐसे राज्य हैं जिन पर अर्धसैनिक बलों का करोड़ों रुपये बकाया है, और लंबे वक्त से पैसे नहीं चुकाए हैं.

बता दें कि आगामी विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में सुरक्षा के मद्देनदर राज्यों में भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है. चुनाव से पहले राज्यों में पुलिस के साथ ही अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की जाती हैं.

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