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10 प्वाइंट्स में जानें तेलंगाना का इतिहास

तेलंगाना देश का 29वां राज्य बन गया है. तेलंगाना राज्य के गठन के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव इस नवीन राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने. उन्होंने हैदराबाद में पद और गोपनीयता की शपथ ली. उनके साथ 11 कैबिनेट मंत्रियों ने भी राजभवन में पद की शपथ ली. इसके साथ ही आंध्रप्रदेश से अलग एक राज्य बनाने के लिए क्षेत्र में चल रहा दशकों पुराना संघर्ष समाप्त हो गया. आइए यहां जानते हैं तेलंगाना का पूरा इतिहास-

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आज तक वेब ब्यूरो [Edited By: पंकज विजय]नई दिल्ली, 03 June 2014
10 प्वाइंट्स में जानें तेलंगाना का इतिहास आंध्र से अलग होकर तेलंगाना बना अलग राज्य

तेलंगाना देश का 29वां राज्य बन गया है. तेलंगाना राज्य के गठन के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव इस नवीन राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने. उन्होंने हैदराबाद में पद और गोपनीयता की शपथ ली. उनके साथ 11 कैबिनेट मंत्रियों ने भी राजभवन में पद की शपथ ली. इसके साथ ही आंध्रप्रदेश से अलग एक राज्य बनाने के लिए क्षेत्र में चल रहा दशकों पुराना संघर्ष समाप्त हो गया. आइए यहां जानते हैं तेलंगाना का पूरा इतिहास-

1. तेलंगाना नाम तेलुगू अंगाना शब्द से लिया गया है जिसका मतलब होता है वो जगह जहां तेलुगू बोली जाती है. निजाम (1724-1948) ने तेलंगाना शब्द का इस्तेमाल अपने राज्य में मराठी भाषी क्षेत्रों से अलग करने के लिए किया था.

2. 230 ई. पू. से 220 ई. पू. तक इस इलाके में कृष्णा और गोदावरी नदियों के बीच सातवाहन वंश ने शासन किया.

3. 1083 से 1203 ई. तक यहां काकतीय वंश के राजाओं ने शासन किया. उनके काल को यहां का स्वर्ण युग कहा जाता है. इस राजवंश ने वारंगल को अपनी राजधानी के तौर पर स्थापित किया.

4. 1309 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के जनरल मलिक काफूर ने वारंगल पर हमला बोल दिया जो काकतीय वंश के पतन का कारण बना. 1687 तक इस जगह पर दिल्ली सल्तनत की हुकूमत रही. 1687 में हैदराबाद के करीब स्थित गोलकुंडा पर मुगल सम्राट औरंगजेब का कब्जा हो गया था.

5. 1769 में निजाम उल मुल्क आसिफ जाह (आसिफ जाह निजाम वंश) ने हैरदाबाद को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया.

6. 1799 में अंग्रजों ने निजाम आसिफ जाह के साथ एक समझौता किया. तटीय आंध्र निजाम के पास रहा और रायलसीमा क्षेत्र ब्रिटिशों के अधीन आ गया.

7. 1946 तक ये क्षेत्र ब्रिटिश और निजाम के अधीन ही रहा. ये तेलंगाना विद्रोह का साल था. इसी वर्ष इस मांग की नींव पड़ गई थी. उस समय यह आंदोलन ज्यादा दिन तक नहीं चला.

8. 1947 में भारत के आजाद होने के बाद हैदराबाद के निजाम ने भारतीय संघ में मिलने से इनकार कर दिया. निजाम ने नेहरू और सरदार पटेल के आग्रह को भी ठुकरा दिया. ऐसी स्थिति में भारत सरकार ने सेना भेजकर हैदराबाद रियासत को 17 सिंतबर 1948 को भारतीय संघ में मिला लिया.

9. 1953 में राज्यों की सीमाओं के निर्धारण के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया. आयोग का पैनल नहीं चाहता था एक भाषा होने के बावजूद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को मिलाकर एक कर दिया जाए. नेहरू के दखल के बाद राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को 1 नंवबर, 1956 को एक कर दिया गया. 1 नवंबर 1956 को आंध्र प्रदेश राज्य बनाया गया जिसकी राजधानी हैदराबाद प्रांत की तत्कालीन राजधानी हैदराबाद शहर को बनाया गया. तब नेहरू ने कहा था 'इस शादी में तलाक की संभावनाएं बनी रहने दी जाएं.'

10. 29 नवंबर 2009 को चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में टीआरएस ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करते हुए तेलंगाना के गठन की मांग की. केंद्र सरकार पर बढ़ते दबाव के चलते 3 फरवरी 2010 को पूर्व न्यायाधीश श्रीकृष्ण के नेतृत्व में पांच सदस्यीय एक समिति का गठन किया. समिति ने 30 दिसंबर 2010 को अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी. आखिरकार तेलंगाना में भारी विरोध और चुनावी दबाव के चलते 3 अक्टूबर 2013 को यूपीए सरकार ने पृथक तेलंगाना राज्य के गठन को मंजूरी दे दी. 2 जून, 2014 को तेलंगाना देश का 29वां राज्य बना और चंद्रशेखर राव ने इसके पहले सीएम के तौर पर शपथ ली.

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