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सरकारी चंगुल से आजाद होगी CBI?

सीबीआई की आजादी को लेकर आज का दिन काफी अहम है. सरकार मंत्री समूहों के प्रस्ताव को आज सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगी. सरकार बताएगी कि कैसे ढांचे में बदलाव से सीबीआई को स्वायतत्ता मिल सकती है.

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aajtak.in
भाषानई दिल्ली, 03 July 2013
सरकारी चंगुल से आजाद होगी CBI? supreme court

सीबीआई की आजादी को लेकर आज का दिन काफी अहम है. सरकार मंत्री समूहों के प्रस्ताव को आज सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगी. सरकार बताएगी कि कैसे ढांचे में बदलाव से सीबीआई को स्वायतत्ता मिल सकती है.

इस हलफनामे को पिछले हफ्ते केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी. इसके जरिए सीबीआई निदेशक को वित्तीय शक्तियां प्रदान की गई हैं जो अन्य अर्धसैनिक बलों के महानिदेशकों के समान है.

सीबीआई जांच को राजनीतिक दखलंदाजी से बचाने के लिए हलफनामे में एक जवाबदेही समिति का गठन किए जाने का सुझाव दिए जाने की संभावना है जिसके सदस्य सेवानिवृत न्यायाधीश होंगे और जो जांच एजेंसी के स्वतंत्र कामकाज की निगरानी करेगी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निदेशक (अभियोजन) की नियुक्ति के लिए हलफनामे में एक नये तंत्र का सुझाव दिए जाने की संभावना है जो फिलहाल विधि मंत्रालय द्वारा नियुक्त किए जाते हैं.

प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता सहित अन्य लोगों की सदस्यता वाले एक कोलेजियम द्वारा सीबीआई निदेशक का चयन भी सरकार की सिफारिशों में शामिल होने की उम्मीद है.

सूत्रों ने बताया कि सरकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेबलीशमेंट (डीएसपीई) अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है जो सीबीआई के कामकाज को संचालित करती है. हालांकि, सरकार ने डीएसपीई अधिनियम से धार 6 ए को हटाने की सीबीआई की एक प्रमुख मांग को स्वीकार नहीं किया है.

यह धारा संयुक्त सचिव या इससे ऊपर स्तर के अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के लिए सीबीआई को सरकार से इजाजत लेने का प्रावधान करता है. सुप्रीम कोर्ट इस विषय की सुनवाई 10 जुलाई को करेगा.

सरकार ने 14 मई को वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता में एक मंत्रीसमूह का गठन किया था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की सुनवाई के दौरान सीबीआई के कामकाज की कटु आलोचना की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की दौरान सीबीआई को अपने राजनीतिक आकाओं के ‘पिंजरे में बंद तोता’ होने की बात कही थी और सीबीआई को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए एक कानून बनाने की कोशिश करने का निर्देश दिया था.

शीर्ष न्यायालय ने छह मई को एक सुनवाई के दौरान कहा था कि सीबीआई पिंजरे में बंद तोता बन गया है. यह एक ऐसी घृणित कहानी है जिसमें कई मालिक हैं और एक तोता है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के हलफनामे के बाद यह बात कही थी.

दरअसल, सिन्हा ने स्वीकार किया था कि उन्होंने कोयला ब्लॉक आवंटन जांच रिपोर्ट का मसौदा पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय एवं कोयला मंत्रालय के दो संयुक्त सचिवों के साथ साझा किया. मंत्री समूह की बैठक तीन बार हो चुकी है जिसने 24 जून को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 27 जून को इसे मंजूरी दी.

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