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गरीब कल्याण रोजगार योजना पर सियासत तेज, बंगाल-छत्तीसगढ़ में लागू करने की उठी मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिहार के खगड़िया से प्रवासी मजदूरों के लिए गरीब कल्याण रोजगार योजना की शुरुआत की है. इसे केंद्र सरकार ने अभी देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड , मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान के 116 जिलों में लागू किया है. वहीं, बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी इस योजना को शामिल करने की मांग कांग्रेस ने उठायी है.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 22 June 2020
गरीब कल्याण रोजगार योजना पर सियासत तेज, बंगाल-छत्तीसगढ़ में लागू करने की उठी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  • गरीब कल्याण रोजगार योजना देश के 6 राज्यों में शुरू
  • बंगाल-छत्तीसगढ़ में उठी रोजगार कल्याण योजना की मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिहार के खगड़िया से प्रवासी मजदूरों के लिए गरीब कल्याण रोजगार योजना की शुरुआत की है. पीएम मोदी ने कहा, 'ये हमारा प्रयास है कि श्रमिकों को उनके घर के पास ही काम मिले. अबतक आप शहरों का विकास कर रहे थे और अब आप अपने गांवों की मदद करेंगे.' केंद्र की मोदी सरकार ने इस योजना को अभी देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान के 116 जिलों में लागू किया है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने राज्य को गरीब कल्याण रोजगार योजना के तहत शामिल कराने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा है. सीएम बघेल ने कहा कि मध्य प्रदेश, झारखंड और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों को इस अभियान में शामिल किया गया है, लेकिन इन राज्यों जैसी आर्थिक एवं सामाजिक समानताओं के बावजूद छत्तीसगढ़ को उससे दूर रखा गया है. कोरोना संकट की सबसे अधिक मार श्रमिकों पर पड़ी है. अब तक पांच लाख से अधिक मजदूर छत्तीसगढ़ लौट चुके हैं.

ये भी पढ़ें: अमित शाह के बाद अब PM मोदी, बिहार में बजने लगा विधानसभा चुनाव का बिगुल

वहीं, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर पश्चिम बंगाल को इस गरीब कल्याण रोजगार योजना में शामिल किए जाने की मांग उठायी है. अधीर रंजन ने कहा कि मुझे इस बात पर आश्चर्य है कि पश्चिम बंगाल के एक भी जिले को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है. हालांकि, बंगाल में भी बड़ी तादात में श्रमिक देश के अलग-अलग राज्यों से लौटे हैं.

गरीब कल्याण रोजगार योजना के तहत पश्चिम बंगाल को शामिल न किए जाने पर ग्रामीण विकास मंत्री एन एन सिन्हा ने कहा था कि जब यह कार्यक्रम तैयार किया जा रहा था उस समय राज्य ने अपने घर लौटने वाले श्रमिकों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया था. उन्होंने कहा था कि अन्य जिलों के लिए कोई रोक नहीं है (कम से कम 25,000 प्रवासी श्रमिक) इस अभियान में शामिल हो सकते हैं यदि हमें आंकड़ा मिलेगा, तो भविष्य में निश्चित रूप से उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा.

ये भी पढ़ें: गरीब कल्याण रोजगार योजना से UP के 31 और बिहार 32 जिलों को होगा फायदा

दरअसल गरीब कल्याण रोजगार योजना भले ही बिहार से शुरू हुआ है, लेकिन यूपी और मध्य प्रदेश को भी कम महत्व नहीं मिला है. बिहार के 32 जिले इस अभियान में शामिल किये गये हैं तो उत्तर प्रदेश के भी 31 जिले को जगह दी गई है. मध्य प्रदेश के 24, राजस्थान के 22, ओडिशा के 4 और झारखंड के 3 जिले को शामिल किया गया हैं. इनमें से तीन राज्यों में बीजेपी की सरकारें है जबकि दो जगह कांग्रेस और ओडिशा में बीजेडी की सरकार है. इसीलिए गैर-बीजेपी राज्यों ने भी अपने प्रदेश के जिलों को इस योजना के तहत शामिल करना की मांग उठा रहे हैं.

गरीब कल्याण रोजगार योजना के तहत सरकार इन प्रवासी मजदूरों को 25 तरह के काम के विकल्प उबलब्ध कराएगी. मिशन मोड में इस योजना के तहत 125 दिनों तक का रोजगार दिया जाएगा. जल जीवन मिशन, ग्राम सड़क योजना जैसी कई सरकारी योजनाओं के जरिए प्रवासियों को काम उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके तहत सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण, ग्राम पंचायत भवन, राष्ट्रीय राजमार्ग के काम, कुओं का निर्माण, आंगनवाड़ी केंद्र का काम, पीएम आवास योजना का काम, ग्रामीण सड़क और सीमा सड़क, पीएम कुसुम योजना, पीएम ऊर्जा गंगा प्रोजेक्ट, पशु शेड बनाने का काम, केंचुआ खाद यूनिट तैयार करना, पौधरोपण, जल संरक्षण और संचयन सहित कामों को भी शामिल किया गया है.

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