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वर्चुअल बैठक में PM मोदी बोले, G-20 देशों से कोरोना के 90 फीसदी मामले

बैठक में प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस की महामारी की ओर सबका ध्यान खींचा. उन्होंने यह भी बताया कि इस महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि कोविड-19 के 90 फीसदी मामले और 88 फीसदी तक मौत जी-20 के देशों में सामने आए हैं.

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aajtak.in नई दिल्ली, 27 March 2020
वर्चुअल बैठक में PM मोदी बोले, G-20 देशों से कोरोना के 90 फीसदी मामले जी-20 वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PTI)

  • आतंकवाद से जूझने में नाकाम रहा ग्लोबलाइजेशन
  • कोरोना वायरस के 88 फीसदी मामले जी-20 क्षेत्र में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम जी-20 ग्रुप के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की. यह वर्चुअल बैठक इसलिए खास रही क्योंकि इसका केंद्र बिंदु कोरोना वायरस से फैली महामारी थी. बैठक में अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने कोरोना वायरस से लड़ने की तैयारियों के बारे में जानकारी दी. बैठक में इस पर जोर दिया गया कि इस महामारी के मानवीय और आर्थिक प्रभाव कैसे हैं और आगे किस प्रकार के असर देखे जा सकते हैं.

वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे. समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबलाइजेशन का मुद्दा उठाया और कहा कि आतंकवाद हो या जलवायु परिवर्तन, ऐसे मसलों पर ग्लोबलाइजेशन बहुत हद तक नाकाम रहा है.

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बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा, कोविड-19 ने हमें अच्छा मौका दिया है कि हम ग्लोबलाइजेशन की नई अवधारणा पर विचार करें. ऐसी अवधारणा जिसमें आर्थिक व वित्तीय पहलुओं से इतर इंसानियत, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद पर भी फोकस किया जाए.

सूत्रों के मुताबिक, जी-20 वर्चुअल समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह मंच वित्तीय और आर्थिक मुद्दे निपटाने का अच्छा जरिया है लेकिन कई बार ऐसा देखा गया कि ग्लोबलाइजेशन आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर नाकाम रहा है.

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बैठक में प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस की महामारी की ओर सबका ध्यान खींचा. उन्होंने यह भी बताया कि इस महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि कोविड-19 के 90 फीसदी मामले और 88 फीसदी तक मौत जी-20 देशों में सामने आए हैं. जबकि सच्चाई है कि दुनिया की जीडीपी का 80 फीसदी हिस्सा और कुल आबादी का 60 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 के राष्ट्राध्यक्षों से कहा कि कोविड-19 संकट के तीन महीने गुजर गए इसके बावजूद हम लोग आपसी सहयोग के रास्ते तलाश रहे हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया हमारे एक-एक कदमों और कार्रवाई पर निगाह लगाए हुए है.

वर्चुअल बैठक की शुरुआत में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ), संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुखों ने भी अपनी बात रखी. बैठक में फैसला लिया गया कि कोविड-19 को लेकर एक कार्रवाई पत्र (एक्शन पेपर) जारी किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: भारत में बढ़े कोरोना वायरस के मरीज, संक्रमितों की संख्या 694 हुई

बैठक में राष्ट्राध्यक्षों ने माना कि कोविड-19 की महामारी से निपटने में भारत केवल क्षेत्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अहम भूमिका निभा रहा है. बैठक में शामिल कोई राष्ट्राध्यक्ष यह नहीं बता पाया कि इस महामारी का दौर कब तक चलेगा, हालांकि इससे निपटने पर जोर देने की बात जरूर कही गई. कोरोना की जांच के लिए कितनी जल्दी डायग्नोस्टिक किट बनाए जाएं और फौरी तौर पर इसकी सप्लाई की जाए.

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