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हरियाणाः हुड्डा ने खुद को बताया कांग्रेस का CM उम्मीदवार, 370 हटाने का किया समर्थन

हरियाणा के रोहतक में महापरिवर्तन रैली कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया.

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aajtak.in
अशोक सिंघल नई दिल्ली, 18 August 2019
हरियाणाः हुड्डा ने खुद को बताया कांग्रेस का CM उम्मीदवार, 370 हटाने का किया समर्थन भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सोनिया गांधी (फोटो-getty images)

कांग्रेस से नाराज चल रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को रोहतक में आयोजित महापरिवर्तन रैली में खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार घोषित किया. उन्होंने इस दौरान कांग्रेस पर करारे वार करते हुए कहा कि पार्टी रास्ते से भटक गई है. हुड्डा ने कहा कि वह 370 हटाने का समर्थन करते हैं. वह देश के साथ हैं. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मैं यहां अपनी सारी पाबंदियों से मुक्त होकर आया हूं.

उन्होंने खट्टर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 5 साल पहले ये सरकार बनी, इस सरकार ने क्या किया. कीटनाशक दवाई पर, सब पर टैक्स बढ़ा दिया. आज पूरे प्रदेश की स्थिति बिगड़ चुकी है. बीजपी ने माइनिंग से लेकर हर जगह घोटाला किया है.

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार बनेगी तो मैं सबसे पहले अपराधियों का सफाया करूंगा. दो महीने में सबको अंदर कर दूंगा. किसानों का सबसे पहले कर्ज माफ करूंगा. 2 एकड़ तक के किसानों को बिजली फ्री की सुविधा दूंगा. पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू होगी.

रैली में उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा पूर्व शिक्षा मंत्री और झज्जर विधायक गीता भुक्कल, महम विधायक आनंद सिंह दांगी, बेरी विधायक रघुबीर कादियान भी पहुचे. कांग्रेस से हुड्डा के अलग होने की अटकलों के बीच आयोजित इस रैली में एक दर्जन विधायकों सहित हरियाणा के कई वरिष्ठ बड़े नेता पहुंचे हैं. महापरिवर्तन में हुड्डा ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस रास्ते से भटक गई है. देश मेरे लिए पहले हैं. मैने अनुच्छेद 370 हटाने का स्वागत किया है.

कांग्रेस नेतृत्व की अनुमति के बगैर हुड्डा  की ओर से बुलाई आयोजित इस रैली को लेकर तरह-तरह की अटकलें लग रहीं हैं. कहा जा रहा है कि रैली में हुड्डा कांग्रेस से अलग राह पकड़ने की घोषणा कर सकते हैं. हालांकि यह कहा जा रहा है कि इस रैली में हुड्डा एक कमेटी की घोषणा कर सकते हैं. जो कुछ समय में यह रिपोर्ट देगी कि भविष्य के लिए क्या कदम उठाना उचित होगा.

सोनिया से हो चुकी है हुड्डा की भेंट

कांग्रेस से नाराज चल रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रैली से पूर्व कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात हो चुकी है. ऐसे में कहा जा रहा है कि हो सकता है कि उनकी पार्टी नेतृत्व से नाराजगी दूर हो गई हो और वह कांग्रेस छोड़कर किसी नई राह पकड़ने का इरादा छोड़ दें क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए कम वक्त बचा है, ऐसे में नई राह चुनने में मुश्किल खड़ी होगी.

हालांकि जिस तरह से रविवार को आयोजित इस रैली में सोनिया और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं की तस्वीरें रैलियों से नदारद हैं, उससे तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. इस रैली के जरिए खट्टर सरकार को घेरने की बात कही गई है.

दीपेंद्र हुड्डा के ट्विटर पर रैली को लेकर जारी पोस्ट में एक नारा लिखा है- खट्टर सरकार धोखा है, हरियाणा बचा लो एक मौका है. माना जा रहा है कि इस रैली के जरिए हुड्डा कई निशाने साधना चाह रहे हैं. एक तरफ बीजेपी की खट्टर सरकार के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेता की छवि बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिना कांग्रेस की अनुमति के रैली कर अपनी नाराजगी के साथ शक्ति प्रदर्शन दिखाना चाहते हैं.

रोहतक से ही सोनिया ने की थी राजनीति की शुरुआत

यह वही रोहतक है, जहां 20 साल पहले 1998 में कांग्रेस के स्टार प्रचारक के तौर पर सोनिया गांधी ने एक रैली को संबोधित कर अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी. रविवार(18 अगस्त) को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा उसी रोहतक में रैली शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं.

खास बात है कि सोनिया गांधी ने 2005 में हरियाणा में पार्टी के वरिष्ठ नेता भजनलाल पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को तरजीह दी थी. जिससे नाराज हुए भजनलाल ने कांग्रेस को अलविदा कहकर अपनी अलग पार्टी बना ली थी. जबकि हुड्डा 10 साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. अब विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा पार्टी आलाकमान को अपनी सियासी ताकत का एहसास कराने के लिए रोहतक में परिवर्तन रैली करने जा रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रोहतक की 'परिवर्तन महारैली' में प्रदेश संगठन और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के किसी नेता को नहीं बुलाया है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस रैली में भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस से नाता तोड़कर अलग अपनी पार्टी बनाने का एलान कर सकते हैं. इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले सौदेबाजी के लिए महौल बनाने की उनकी कवायद है.

बता दें कि सोनिया से रिश्ते में खटास तब आई थी, जब 2016 में हुड्डा ने कांग्रेस के राज्यसभा कैंडिडेट आरके आनंद का सपॉर्ट करने से मना कर दिया था. इसका नतीजा रहा कि आरके आनंद हार गए और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सुभाष चंद्रा जीतकर राज्यसभा पहुंच गए.

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