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जम्मू कश्मीरः फारूक अब्दुल्ला की हिरासत तीन महीने और बढ़ी

जम्मू कश्मीर में पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के दौरान फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लिया गया था.

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aajtak.in
कमलजीत संधू श्रीनगर, 14 December 2019
जम्मू कश्मीरः फारूक अब्दुल्ला की हिरासत तीन महीने और बढ़ी नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला की हिरासत बढ़ी (फाइल फोटो-ANI)

  • फारूक अब्दुल्ला की हिरासत 3 महीने के लिए बढ़ी
  • 370 हटाए जाने के बाद से हिरासत में हैं अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर में पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के दौरान फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लिया गया था. अधिकारियों के मुताबिक अब्दुल्ला अपने घर में ही रहेंगे, जिसे सब-जेल बनाया गया है. तीन बार के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके फारूक अब्दुल्ला की हिरासत तीन महीने के लिए बढ़ाई गई. अब उनके आवास को ही सब जेल में तब्दील कर दिया गया है.

बीते 5 अगस्त से ही वे हिरासत में हैं. उनके ऊपर पब्लिक सेफ्टी एक्ट(PSA) के तहत कार्रवाई की गई है. उन्हें पहले 17 सितंबर को हिरासत में लिया गया था. इस एक्ट के तहत किसी भी व्यक्ति को 6 महीने तक बिना किसी ट्रायल के जेल में रखा जा सकता है.

इस आदेश के बाद अब फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ लगाए गए पीएसए को तीन और महीने यानी 14 मार्च, 2020 तक बढ़ा दिया गया है. अब्दुल्ला पर 17 सितंबर को पीएसए लगाया गया था, जो श्रीनगर में यहां लगातार अपने आवास में हिरासत में हैं, जिसे उप-जेल घोषित कर दिया गया है.

वहीं महबूबा मुफ्ती को चश्मे शाही स्थित एक सरकारी भवन से श्रीनगर के एमए रोड पर नए स्थान पर भेजा गया है. उमर अब्दुल्ला हरि निवास में हिरासत में हैं. इसके अलावा, मुख्यधारा के 35 विधायकों को पहले डल झील के किनारे कंटूर होटल में हिरासत में रखा गया था , इन्हें अब विधायकों के होस्टल में रखा गया है.

शीत कालीन सत्र में भी फारूक अब्दुल्ला की अनुपस्थिति नेताओं को भी खली. विपक्ष के नेताओं ने इस पर कई सवाल खड़े किए थे. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी हिरासत का मुद्दा उठाया था.

शशि थरूर ने फारूक अब्दुल्ला के एक पत्र को ट्वीट करते हुए लिखा था कि संसद सदस्यों को संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि उन्हें इस मामले में संसदीय विशेषाधिकार मिला हुआ है. अन्यथा गिरफ्तारी का इस्तेमाल विपक्षी आवाज़ों को दबाने के लिए किया जा सकता है. संसद में भागीदारी लोकतंत्र और लोकप्रिय संप्रभुता के लिए आवश्यक है. हालांकि इसके बाद भी फारूक अब्दुल्ला को संसद आने की इजाजत नहीं मिली.

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