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केंद्रीय HRD मंत्री निशंक बोले- देश में कम से कम 2 संस्कृत बोलने वाले गांव बनाएं

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हिंदुस्तान में कम से कम दो ऐसे गांव बनाने का लक्ष्य होना चाहिए, जहां के लोग संस्कृत बोलते हों. उन्होंने संस्कृत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने संस्कृत के शिक्षकों और प्रोफेसरों से मदद लेने को कहा है.

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aajtak.in नई दिल्ली, 14 June 2019
केंद्रीय HRD मंत्री निशंक बोले- देश में कम से कम 2 संस्कृत बोलने वाले गांव बनाएं केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थाननों के प्रमुखों की बैठक ली और कहा कि देश में कम से कम दो संस्कृत भाषी यानी संस्कृत बोलने वाले गांव बनाए जाने चाहिए. केंद्रीय मंत्री निशंक ने भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाने पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं को सशक्त करना हमारा लक्ष्य है. इसके लिए खाली पदों को जल्द से जल्द भरना हमारी प्राथमिकता होना चाहिए. इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री संजय धोत्रे भी मौजूद रहे.

केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ केंद्रीय भाषायी संस्थानों के प्रमुखों की लगातार समीक्षा बैठक होती रहनी चाहिए, ताकि भारतीय भाषाओं के विकास को लगातार गति मिल सके.

उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक प्रशिक्षित संस्कृत शिक्षकों और प्रोफेसरों की संख्या को बढ़ावा देने का लक्ष्य होना चाहिए, ताकि संस्कृत भाषा को नया आयाम मिल सके. इस तरह से हम दुनिया तक संस्कृत को पंहुचा सकते हैं. निशंक ने बल दिया कि देश में संस्कृत संस्थानों के आसपास कम से कम दो ऐसे गांव बनाने का लक्ष्य होना चाहिए, जहां के लोग संस्कृत बोलते हों.

भारतीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक के दौरान रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के बारे में नए तरीके से सोचने की आवश्यकता है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के बारे में नए तरीके से सोचने की आवश्यकता है. भारतीय भाषाओं मे नए शोध और उनको वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करने की आवश्यकता है, जिससे ये भाषाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके.

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के साहित्य का दूसरी भाषाओं में अनुवाद करने की जरूरत है, ताकि सभी लोग इन सबसे शानदार साहित्यों का लाभ उठा सकें. केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि हिंदी प्रचारिणी सभाओं और स्थानीय भाषाओं के बीच में बेहतर समन्वय से सभी भारतीय भाषाओं का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है. निशंक ने कहा कि भविष्य में भाषा भवन की स्थापना की जाएगा, जहां भारतीय भाषाओं से जुड़े सभी संस्थान एक साथ भाषाओं के विकास के लिए काम करेंगे.

आपको बता दें कि भारतीय भाषा संस्थान भारतीय भाषाओं के विकास के लिए काम करते हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन साल 1969 में मैसूर में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान की स्थापना की गई थी. इसके क्षेत्रीय क्षेत्रीय भाषा केंद्र भुवनेश्व र, पुणे, मैसूर, पटियाला, गुवाहाटी, सोलन और लखनऊ में हैं. भारतीय भाषा संस्थान भारत सरकार की भाषा नीति को तैयार करने और इसके कार्यान्वयन में सहायता करने के साथ ही भाषा विश्लेषण, भाषा शिक्षा शास्त्र, भाषा प्रौद्योगिकी और समाज में भाषा के इस्तेमाल के क्षेत्र में अनुसंधान करते हैं.

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