एडवांस्ड सर्च

संसद भवन, कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेंट्रल विस्टा- सब कुछ बनेगा नया!

राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र के सत्ता गलियारों का चेहरा बदलने के लिए सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव किया जाएगा. शहरी मामलों के मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने ये जानकारी दी है. 

Advertisement
aajtak.in
मिलन शर्मा नई दिल्ली, 12 September 2019
संसद भवन, कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेंट्रल विस्टा- सब कुछ बनेगा नया! नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का होगा दोबारा निर्माण (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र के सत्ता गलियारों का चेहरा बदलने के लिए सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर ढांचागत बदलाव किया जाएगा. शहरी मामलों के मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने ये जानकारी दी है. 

सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय की ओर से फेसलिफ्ट प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा. इसके तहत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक साढ़े तीन किलोमीटर के दायरे में स्थित सेंट्रल विस्टा का नक्शा बदल जाएगा. इसका निर्माण 1930 के दशक में हुआ था.

योजना के तहत संसद की नई इमारत के साथ ही एक और इमारत बनाई जाएगी जहां नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के दफ्तरों को समायोजित किया जा सके. एक कॉमन केंद्रीय सचिवालय भी बनाने का प्रस्ताव है जहां कई मंत्रालय के दफ्तर लाए जा सकेंगे.

सूत्रों ने बताया कि प्रस्ताव के लिए आग्रह (RFP)  तैयार किया जा चुका है. अभी सारे प्लान प्रारंभिक स्टेज में है. गुरुवार शाम को RFP की बैठक बुलाई गई है.

सरकार स्थित सूत्रों ने बताया कि उन्हें संसद के कई सदस्यों से प्रतिवेदन मिले हैं जिनमें इच्छा जताई गई कि उन्हें संसद इमारत में अलग से कक्ष दिए जाएं जिससे कि सरकारी कामकाज से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया जा सके. एक सामान्य समस्या थी कि कई सारे सासंदों के ऐसे आग्रहों को मौजूदा संसद भवन में पूरा नहीं किया जा सकता. ये भी खुलासा किया गया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के दफ्तर अब ढांचागत मजबूत नहीं रहे, साथ ही वो भूकंपरोधी भी नहीं हैं. 

सेंट्रल विस्टा में प्रस्तावित बदलावों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पूरा किया जाएगा. सेंट्रल विस्टा को ठीक उसी तर्ज पर बनाया जाएगा जैसे कि वाशिंगटन डीसी जैसी विश्व की अन्य बड़ी राजधानियों में बनाया गया है. मंत्रालय की योजना 2024 तक निर्माण कार्य पूरा करने की है.

सूत्रों के मुताबिक निविदाएं जल्दी खोली जाएंगी. प्रोजेक्ट की रूपरेखा और उस पर अमल के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाएगी. प्लान को पूरा करने के लिए फर्म का चयन 15 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दिलचस्पी जताई है कि राष्ट्र 75वां स्वतंत्रता दिवस नए संसद भवन और सरकारी दफ्तरों की पृष्ठभूमि में बनाए.

सूत्रों ने बताया कि फिलहाल सरकारी दफ्तरों के किराए के तौर पर हर साल 1000 करोड़ रुपए का बोझ सरकार को उठाना पडता है. सरकार में स्थित सूत्रों ने बताया,’ हम ऐसी स्थिति में हैं जहां कंपनियों को साथ लिया जाए जो प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए कार्ययोजनाओं की पहचान कर सकें.’

पूरे प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आएगा, इसका खुलासा नहीं किया गया है. फिलहाल, बड़े पैमाने पर बदलाव के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह की कंपनियों का साथ लेने के लिए सरकार के पास विकल्प खुला है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay