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कैसे जन्मी कहावतें, किसने किया होगा ऊंट से मजाक...सुनें कवि की जुबानी

संजय कुंदन ने कहा कि शब्द मनुष्य की उत्पत्ति से ही जुड़े हुए हैं पहले पत्तों पर लिखते थे, फिर कागज और अब मोबाइल पर लिख रहे हैं. उन्होंने कहावतों के जन्म पर कविता सुनाते हुए कहा कि कितना हसोड़ रहा होगा वो आदमी जिसने एक ऊंट के साथ मजाक किया होगा, उसके मुंह में जीरे के एक दाना रखकर

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 03 November 2019
कैसे जन्मी कहावतें, किसने किया होगा ऊंट से मजाक...सुनें कवि की जुबानी साहित्य आजतक में कवि (फोटो- के आसिफ)

साहित्य आजतक 2019 के महामंच पर कवि और पत्रकार प्रताप सोमवंशी, कवि संजय कुंदन, कवि और पत्रकार निधीश त्यागी के साथ कवि आलोक यादव ने कार्यक्रम शब्दों का शोर में शिरकत की. इस कार्यक्रम में सोमवंशी ने कहा कि शब्दों का शोर ही कविताएं बनाता है. साथ ही चारों कवियों ने अपनी कविताएं और रचना दर्शकों के सामने प्रस्तुत की.

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सोमवंशी ने मोबाइल पर शेर सुनाते हुए कहा कि आज अगर कोई परेशान होकर फिर रहा है तो समझ लीजिए उसका मोबाइल गुम हो गया. उन्होंने आगे शेर पढ़ा, उफ्फ अकेलापन कितना बढ़ गया है, सबके मोबाइल में सिर्फ सेल्फियां हैं. आगे कहा कि तुम्हारी बात पूरी सुन रहा हूं, मेरी आवाज क्यों जाती नहीं है, ये दिक्कत फोन के नेटवर्क जैसी कहां से अपने बीच आ गई है. प्रताप सोमवंशी ने ऐसे ही कई शेर श्रोताओं के साथ साझा किए.

कैसे जन्मी होंगी कहावतें

कवि संजय कुंदन ने कहा कि शब्द मनुष्य की उत्पत्ति से ही जुड़े हुए हैं पहले पत्तों पर लिखते थे, फिर कागज और अब मोबाइल पर लिख रहे हैं. उन्होंने कहावतों के जन्म पर कविता सुनाते हुए कहा कि कितना हसोड़ रहा होगा वो आदमी जिसने एक ऊंट के साथ मजाक किया होगा, उसके मुंह में जीरे के एक दाना रखकर...सचमुच बड़ा फक्कड़ रहा होगा वह जिसने छछूंदर के सिर पर चमेली का तेल मले जाने की बात सोची होगी.

shor-1_110219071801.jpgफोटो- के आसिफ

संजय कुंदन ने कहा कि कहावतों के जन्म के बारे में सोचो, किसने कहा होगा पहली बार अधजल गगरी झलकत जाए...वे हमारे पूर्वज थे जिन्हें न प्रसिद्ध होना था और न कवि बनना था. यही वजह है कि रही कि उन्होंने कहावतों में अपना नाम नहीं जोड़ा, वे जिंदगी के कटु आलोचक रहे होंगे. उनमें कोई उत्साही मल्लाह रहा होगा जिसने निष्कर्ष निकाला जिन खोजा तिन पाइयां... उन अनाम पूर्वजों ने डरना तो सीखा नहीं होगा क्योंकि मौत को सामने से रंगा सियार कहकर वो चिढ़ाते होंगे. आज चालाक कवियों और प्रायोजित शब्दों को दौर है, काश मैं इस दौर के बारे में एक सटीक कहावत कह पाता.

कवि और पत्रकार निधीश त्यागी ने कहा कि 20 साल से जाने कितनी बुरी खबरों को कवर कर रखा है, ऐसे में कविताएं हमें मनुष्य बने रहने के लिए बचाए रखती हैं क्योंकि हम लोग काफी तामसी जीवन जीते हैं, सालों तक नाइट शिफ्ट की है. उन्होंने अपनी कविता 'पिछले एक घंटे में' पढ़कर सुनाई. इसके बोल थे,

पिछले एक घंटे में...

पृथ्वी पर इस वक्त आबादी 7 अरब से ज्यादा है, हर घंटे की तरह इस घंटे भी कई करोड़ लोग रोजमर्रा के बाकी कामों की तरह इस्तेमाल करेंगे प्यार नाम का शब्द, इस घंटे इस शब्द के करोड़ों इस्तेमाल का जो औसत अर्थ होगा, वही मतलब उस घंटे के इतिहास में दर्ज और सच माना जाएगा, पर हर किसी का संदर्भ और प्रसंग जरूरी नहीं वही हो, जो घंटे के औसत से निकाला जाएगा.

आगे कविता पढ़ते हुए निधीश ने कहा...प्यार के नाम पर कोई फिसल पट्टी पर होगा, कोई धधक रहा होगा, कोई कुड़ रही होगा जलकुकड़ी बन, कोई सलीके से झूठ कह रहा होगा, कोई शक से जर्द हो रहा होगा, कोई यकीन पर बदलने पर राख, कोई जिस्म में टटोल रहा होगा प्यार जैसा कुछ, कोई रिश्तों के आर-पार, कोई खुदकुशी के तरीकों का गूगल कर रहा होगा, कोई सिहर-पसर-ठिठक गुजर रहा होगा, कोई उछल-फुदक-दौड़ भी रहा होगा, आंखों में झांकने के लिए...प्यार का औसत प्यार नहीं हो पाएगा.

धोखा देकर वोट लिया...

कवि आलोक यादव ने अपने गजल सुनाई, मेरी दिल की कौन कहेगा छोड़ो भी, दीवाने की कौन सुनेगा छोड़ो  भी...जिसके झूठ पर बलिहारी जाते हो तुम, वो तुमसे क्या सच बोलेगा छोड़ो भी...गिरगिट रंग बदलने में माहिर है पर इंसानों से जीत सकेगा छोड़ो भी...तुमने उसकी बात सुनी और मान भी ली, अब वो तुम्हारी बात सुनेगा छोड़ो भी...सच सुनने की जिद छोड़ो रहने भी दो, तुमको एक-एक लफ्ज चुभेगा छोड़ो भी..धोखा देकर वोट लिया और जीत गया, अब वो तुम्हारा काम करेगा छोड़ो भी..तुमने दूर चला तो जाऊं मैं लेकिन कौन तुम्हारा ध्यान रखेगा छोड़ो भी.

कवि निधीश त्यागी ने अपनी कवित इतनी आत्मा भी पढ़कर सुनाई. फिर संजय ने अपनी कविता आदमीनामा सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया. उन्होंने महानगरों के जलसंकट पर लिखी अपनी कविता 'मोहल्ले में पानी' के जरिए इस गंभीर समस्या की ओर लोगों का ध्यान खींचा.

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