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वायुसेना की सनसनी और मेक इन इंडिया की ताकत तेजस पर अमरीकी वायुसेना प्रमुख ने भरी उड़ान

अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल डेविड एल गोल्डफिन ने जोधपुर एयरबेस पर भारत में बने लड़ाकू विमान तेजस से उड़ान भरी.

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मंजीत सिंह नेगी [Edited By: सुरभि गुप्ता]जोधपुर, 03 February 2018
वायुसेना की सनसनी और मेक इन इंडिया की ताकत तेजस पर अमरीकी वायुसेना प्रमुख ने भरी उड़ान अमेरिकी वायु सेना प्रमुख ने तेजस से भरी उड़ान

भारतीय वायुसेना की नई सनसनी और मेक इन इंडिया की ताकत लड़ाकू विमान तेजस ने शनिवार को एक बार फिर नई उड़ान भरी. अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल डेविड एल गोल्डफिन ने जोधपुर एयरबेस पर भारत में बने लड़ाकू विमान तेजस से उड़ान भरी.

मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह तेजस

ये पहला मौका है, जब किसी विदेशी वायुसेना के प्रमुख ने स्वदेशी तेजस से उड़ान भरी हो. देश में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी तेजस को बनाया गया है, जिसे भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है. आने वाले दिनों में मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह तेजस की तैनाती होगी.

सिंगापुर के रक्षा मंत्री भी भर चुके हैं उड़ान

खास बात ये है कि अमेरिका के वायुसेना प्रमुख का तेजस पर उड़ान भरना इस विमान के निर्माण में लगे लोगों और वायुसेना के लिए मनोबल बढ़ाने वाली बात होगी. इससे पहले पिछले साल नवंबर में सिंगापुर के रक्षा मंत्री क्लाइकोंडा एयरबेस पर तेजस मे उड़ान भर चुके हैं.

वायुसेना में 2 तेजस विमान शामिल

देश का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट तेजस वायुसेना के बेड़े में शामिल हो चुका है. तेजस को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल ने बनाया है. बेंगलुरु में एचएएल के प्लांट में दिनरात तेजस बनाने का काम चलता रहता है. फिलहाल वायुसेना में 2 तेजस विमान शामिल हो चुके हैं. तेजस वायुसेना में मिग-21 की जगह लेगा.

वायुसेना ने दिया 120 तेजस का ऑर्डर

वायुसेना ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 120 तेजस का ऑर्डर दिया है. यकीनन देर से सही इसके वायुसेना में शामिल होने से वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और देसी होने की वजह से इसके किसी भी चीज के लिये किसी दूसर देश का मोहताज नहीं होना होगा.

ये हैं तेजस की खूबियां

तेजस की लंबाई 13.2 मीटर और ऊंचाई 4.4 मीटर है. तेजस का वजन 6,560 किलोग्राम है. इसके विंग्स 8.2 मीटर चौड़े हैं. अगर खूबियों की बात करें तो ये 50 हजार फीट तक उड़ सकता है. दुश्मन पर हमला करने के लिए इसमें हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइल लगी है तो जमीन पर निशाना लगाने के लिये आधुनिक लेजर गाइडेड बम लगे हुए हैं.

अगर ताकत की बात करें तो तेजस पुराने मिग 21 से कहीं ज्यादा आगे है और मिराज 2000 से इसकी तुलना कर सकते हैं. ये ही नहीं चीन और पाकिस्तान के साझा उपक्रम से बने जेएफ-17 से कहीं ज्यादा बेहतर है. तेजस का फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जबरदस्त है.

तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है. 1350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेजस एक उड़ान में 2,300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है, जबकि जेएफ-17 2,037 किलोमीटर की दूरी. तेजस जहां 3000 किलो विस्फोटक और बम लेकर उड़ सकता है, वहीं जेएफ-17 2,300 किलो लेकर ही जा सकता है. तेजस हवा में ही तेल भरवा सकता है, पर जेएफ-17 ऐसा नहीं कर सकता. सबसे अहम बात यह है कि तेजस 460 मीटर चलने के बाद ही हवा में उड़ सकता है जबकि चीनी विमान को ऐसा करने के लिए 600 मीटर की दूरी तय करनी होती है.

तेजस में लगे लेजर गाइडेड बम दुश्मन के ठिकाने पर सटीक निशाना लगा सकते हैं. दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान सियाचिन से लेकर देश की किसी भी सरहद पर तेजस अपनी तेजी से दुश्मन के छक्के छुड़ा सकता है. तेजस को सीसीएम यानी क्लोज कॉम्बेट मिसाइल और बीबीएम बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल से भी लैस किया गया है.

विमान का ढांचा भी भारत में बने कार्बन फाइबर से बना है, जो कि धातु की तुलना में कहीं ज्‍यादा हल्‍का और मजबूत होता है. यहां तक कि विमान में लगे सामान्‍य सिस्‍टम जिसमें ईंधन प्रबंधन से लेकर स्‍टीयरिंग तक सब भारत में ही निर्मित है.

तेजस के लिए खास शूट और हेलमेट

तेजस पर सवार होने से पहले एक खास जी शूट पहना जाता है. जी शूट उड़ान के दौरान पायलट और को पायलट के खून के दबाव को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है. जी शूट के साथ एक खास हेलमेट भी पहनना होता है. इस हेलमेट के साथ ही ऑक्सीजन मास्क भी जुड़ा होता है, जो उड़ान के दौरान कलाबाजी के वक्त जी शूट के साथ शरीर में खून और ऑक्सीजन का संचार बनाए रखता है.

तेजस को वायुसेना में 45वीं स्‍क्‍वाड्रन 'फ्लाइंग डैगर्स' के रूप में शामिल किया गया है. विमान का परीक्षण करने वाले सभी पायलट तेजस के फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम से संतुष्‍ट हैं. चाहे कलाबाजी में इसकी कुशलता हो या फिर इसके फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम की रिस्‍पॉन्‍सिवनेस. तेजस की परीक्षण उड़ानों के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना में किसी भी पायलट को कभी कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ा है. अब तक इसकी 3000 से ज्‍यादा उड़ानें सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं.

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