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केरल HC के जज बोले- ब्राह्मण समुदाय को जातिगत आरक्षण के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए

केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस वी चिताम्बरेश ने एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समुदाय से कहा कि उन्हें जातिगत आरक्षण के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 24 July 2019
केरल HC के जज बोले- ब्राह्मण समुदाय को जातिगत आरक्षण के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए सांकेतिक फोटो

केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस वी चिताम्बरेश ने हाल ही में ब्राह्मणों और ब्रह्माणों से जुड़े गुणों को लेकर टिप्पणी की है. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ब्राह्मण समुदाय से कहा कि उन्हें जातिगत आरक्षण के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए.

पिछले शुक्रवार 19 जुलाई को जस्टिस वी चिताम्बरेश तमिल ब्राह्मण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस क्रम में उन्होंने ब्राह्मण समुदाय की विशेषताओं का गुणगान किया. जस्टिस वी चिताम्बरेश ने कहा, "आखिर ब्राह्मण कौन है? एक ब्राह्मण द्विजन्मना होता है...यानी कि दो बार जन्म लेने वाला, अपने पूर्व जन्म सुह्रद की वजह से वो दो बार जन्म लेता है."

जस्टिस वी चिताम्बरेश एक ब्राह्मण के गुणों का बखान करते हुए आगे कहते हैं, "उसमें कुछ खास विशेषताएं होती है, जैसे कि, स्वच्छ आदतें, उत्कृष्ट सोच, शानदार चरित्र, वो ज्यादातर शाकाहारी होता है, शास्त्रीय संगीत का पुजारी होता है, जब ये सारी शानदार आदतें एक शख्स में आती हैं तो वो ब्राह्मण होता है."

इसके बाद जस्टिस वी चिताम्बरेश ब्राह्मणों की सामाजिक-आर्थिक हालात पर कुछ सख्त टिप्पणी करते हैं और ब्राह्मणों को आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए आंदोलन करने को प्रेरित करते दिखते हैं. हालांकि इस दौरान वह यह भी कहते हैं कि वो कोई अपनी राय जाहिर नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वो एक संवैधानिक पद पर हैं. ब्राह्मणों के समूह को संबोधित करते हुए जस्टिस वी चिताम्बरेश कहते हैं, "ये आपके लिए मंथन करने का वक्त है कि क्या आरक्षण सिर्फ समूह या जाति के आधार पर दिया जाना चाहिए. एक संवैधानिक पद पर रहने के नाते मेरे लिए ये अच्छा नहीं होगा कि मैं कोई राय दूं, यहां मैं किसी भी तरह से अपनी राय नहीं दे रहा हूं, मैं सिर्फ आपकी रुचि जगा रहा हूं, आपको याद दिला रहा हूं कि आंदोलन करने के लिए आपके पास एक मंच है, आप सिर्फ आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात उठाएं, जाति या धर्म पर आधारित आरक्षण की नहीं."  

वी चिताम्बरेश आगे कहते हैं, "निश्चित रूप से आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण है, एक ब्राह्मण रसोइए का बेटा, यदि नॉन क्रीमी लेयर के दायरे में आता भी है तो उसे कोई आरक्षण नहीं मिलेगा, जबकि एक लकड़ी के व्यापारी का बेटा जो ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखता है, यदि वो नॉन क्रीमी लेयर के दायरे में आता है तो उसे आरक्षण मिलेगा. मैं यहां कोई राय नहीं दे रहा हूं, ये आपको सोचना-समझना है और आपको अपने विचार आगे रखने हैं."

जस्टिस वी चिताम्बरेश कहते हैं कि ब्राह्मण समाज अपनी मांग और जरूरतों को लेकर मुखर नहीं है. वो कहते हैं, " जैसा कि अभी महोदय रमन ने कहा, जो बच्चा रोता है उसी को दूध मिल पाता है. अब वक्त आ गया है कि हम सामूहिक आवाज उठाएं, एकल गीत ना गाएं, वेदों की पाठशाला जो कम हो रही है उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने की जरूरत है."

जस्टिस चिताम्बरेश कहते हैं कि ब्राह्मण जैसे गुणों के स्वामी को हमेशा गतिविधियों का केंद्र होना चाहिए. वो बताते हैं, "यहां ये बताना जरूरी है कि ब्राह्मण कभी साम्प्रदायिक नहीं होता है, वो हमेशा विचारवान होता है, अहिंसावादी होता है, उसे व्यक्ति पसंद होते हैं, ये ऐसा शख्स होता है जो प्रशंसनीय कामों के लिए हमेशा दान करता है, ऐसे लोगों को हमेशा केंद्र में होना चाहिए, इस उद्देश्य के लिए ये तमिल ब्राह्मण सम्मेलन निश्चित रूप से एक अहम मोड़ साबित होगा."

बता दें कि गवर्मेंट लॉ कॉलेज तिरुवनंतपुरम के छात्र रहे हैं. उन्होंने 1981 में वकालत की शुरुआत की. 2007 में उन्हें सीनियर एडवोकेट नियुक्त किया गया. नवंबर 2011 में उन्हें केरल हाई कोर्ट के एडिशनल जज की शपथ दिलाई गई. दिसंबर 2012 में उन्हें पूर्णकालिक जज बनाया गया.

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