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जानिए कैसी है आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी, जिस पर मचा है सियासी बवाल

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के गढ़ रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी अचानक विवादों में आ गई है. विश्वविद्यालय के भीतर का परिसर बेहद भव्य है. बीए, बीकॉम से लेकर इंजीनियरिंग और मेडिकल तक की पढ़ाई इस विश्वविद्यालय में होती है.

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aajtak.in
आशुतोष मिश्रा रामपुर, 01 August 2019
जानिए कैसी है आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी, जिस पर मचा है सियासी बवाल आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी (तस्वीर- फेसबुक)

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के गढ़ रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी अचानक विवादों में आ गई है. मदरसा आलिया ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसके यहां रखे सैकड़ों साल पुराने ऐतिहासिक इस्लामिक ग्रंथ चोरी हो गए. छापेमारी में पुलिस ने उन किताबों को विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी से बरामद किया है.

छापेमारी का विरोध करने के चक्कर में आजम खान के बेटे अब्दुल्लाह को हिरासत में ले लिया गया. कई वर्ग किलोमीटर में बसी अली जौहर यूनिवर्सिटी साल 2006 में आजम खान द्वारा शुरू की गई थी.

विश्वविद्याल के भीतर का परिसर बेहद भव्य है. बीए, बीकॉम से लेकर इंजीनियरिंग और मेडिकल तक की पढ़ाई इस विश्वविद्यालय में होती है. प्रवेश द्वार के भीतर ही एक एकेडमिक विंग मुलायम सिंह यादव के नाम पर रखा गया है. विश्वविद्यालय के भीतर चमचमाती चौड़ी सड़क है.

विश्वविद्यालय के भीतर वाइस चांसलर विंग बनकर तैयार हो रहा है तो दूसरे हिस्सों में भी लगातार निर्माण कार्य जारी है. छापेमारी के बाद से ही विश्वविद्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई है. जिसके चलते यहां पढ़ने वाले छात्रों के भीतर भय का माहौल है.

छात्रों का आरोप है कि पुलिस रोक रही है लेकिन रामपुर के एडीएम एचसी गुप्ता का कहना है कि ये सारे बंदोबस्त सिर्फ 1 दिन के लिए है. छात्रों को कोई तकलीफ नहीं होने दी जाएगी.

धार्मिक ग्रंथ चोरी के विवाद पर विश्वविद्यालय के कई छात्रों का कहना है कि यह सारी घटनाएं और आरोप झूठे हैं. विश्वविद्यालय के आखिरी हिस्से के एक किनारे पर आलिशान मस्जिद है तो बीच में मॉल के लिए भी जगह बनाई गई है. विंटेज गाड़ियों का कलेक्शन भी यूनिवर्सिटी के भीतर देखने को मिलता है.

आजम खान के इस विश्वविद्यालय के आखिरी छोर पर भी कुछ इमारतें आपको दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की याद दिलाएंगी. यह विश्वविद्यालय का वह हिस्सा है जहां मेडिकल की शिक्षा दी जाती है.

इस विश्वविद्यालय में 1971 के युद्ध में पाकिस्तान से लोहा लेने वाला टैंक भी रखा है. इसी तोप के पास कई बच्चे यहां सेल्फी खींचते भी दिख जाते हैं. लेकिन विश्वविद्यालय का नाम विवादों में आने के बाद यहां पढ़ने वाले बच्चों के भीतर भी भविष्य को लेकर चिंता है.

मुरादाबाद, बरेली से लेकर कानपुर तक के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं. यहां पढ़ने वाले एक छात्र सचिन का कहना है कि मां-बाप  चिंता में हैं और कह रहे हैं कि वापस आ जाओ. कई छात्रों को लग रहा है कि विवाद के बाद कहीं यूनिवर्सिटी बंद तो नहीं हो जाएगी.

विश्वविद्यालय में छापेमारी के बाद से ही लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर बड़ा सा ताला लटका हुआ है. आजम खान की इस यूनिवर्सिटी में कई हजार बच्चे पढ़ते हैं. ऐसे में उनका विश्वविद्यालय ही विवादों के साए में आ जाए तो फिक्र करना लाज़मी है.

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