एडवांस्ड सर्च

अयोध्या केस: SC में सुनवाई का 28वां दिन, धवन बोले- जानबूझकर गिराई गई मस्जिद

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुनवाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग-अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे. लिहाजा सीधे तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई.

Advertisement
aajtak.in
संजय शर्मा नई दिल्ली, 20 September 2019
अयोध्या केस: SC में सुनवाई का 28वां दिन, धवन बोले- जानबूझकर गिराई गई मस्जिद सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई का 28वां दिन (सांकेतिक तस्वीर)

  • सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुनवाई का 28वां दिन
  • मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया- 1992 में जानबूझकर गिराई मस्जिद
  • 'बाबरी मस्जिद को गिराए जाने का मकसद हकीकत को मिटाने की कोशिश'
  • सोमवार से बहस का समय बढ़ा, अब 4 की जगह 5 बजे तक चलेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुनवाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग-अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे. लिहाजा सीधे तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई. साथ ही यह भी कहा कि 1992 में जानबूझकर मस्जिद गिराई गई.

मुस्लिम पक्ष की ओर से कोर्ट में राजीव धवन ने कहा कि बाबरनामा में इस बात का भी जिक्र है कि बाबर ने कई दूसरी जगहों पर मंदिर का भी निर्माण कराया था. वो जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखते जो कई रिपोर्ट को मान रहे हैं. साथ ही धवन ने 3 शिलालेखों का हवाला देकर कहा कि इनमें कहा गया है कि बाबर के कमांडर मीर बाकी ने वहां बाबरी मस्जिद बनाई थी. इन शिलालेखों पर हिंदू पक्ष ने आपत्तियां उठाई जरुर हैं, लेकिन ये सही नहीं है क्योंकि इन शिलालेखों का जिक्र विदेशी यात्रियों के वर्णन और गजेटियरों में है.

'HC ने मामूली आधारों पर शिलालेखों को नकारा'

राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष भी जब यात्रियों के वर्णन और गजेटियर पर बात करते हैं तो इन चीजों को कैसे नकार सकते हैं. हाई कोर्ट ने मामूली आधारों पर इन शिलालेखों को नकार दिया, जो कि ठीक नहीं है. हाई कोर्ट का कहना था कि इनमें अंतर है, लेकिन बहुत मामूली है इस आधार पर इसे खारिज नहीं किया जा सकता.

इस बीच जफरयाब जिलानी ने कहा कि 1855 से पहले के किसी दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता. सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है. वो कैसे और क्या हैं?

इस पर राजीव धवन ने कहा कि इमारत बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे. बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे.

जानबूझकर गिराई गई मस्जिद

सुन्नी पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने का मकसद हकीकत को मिटाया जाना था. इसके बाद कोर्ट में दावे किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सब कुछ बेवजह ध्वस्त किए जाने के इरादे से स्पष्ट होता है कि कोर्ट में दावे को सही साबित करने के लिए ऐसा किया गया.

राजीव धवन ने कहा कि 1985 में शूट दाखिल किया गया. 1989 से वीएचपी रामशिला लेकर पूरे देश में घूमने लगी. वीएचपी ने पूरे देश का माहौल खराब किया और 1992 में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया. वीएचपी ने पूरे देश में राम मंदिर को लेकर अपना आंदोलन चलाया.

सुनवाई का समय बढ़ा

उन्होंने कहा कि जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति मानने के पीछे का मकसद यह है कि भूमि को कही शिफ्ट नहीं किया जा सकता है. भगवान विष्णु स्वयंभू हैं और इसके सबूत मौजूद हैं. भगवान राम के स्वयंभू होने पर यह दलील दी जा रही है कि रात में भगवान राम किसी के ख्वाब में आए और उसको बताया कि उनका सही जन्मस्थान किस जगह पर है, क्या इस पर विश्वास किया जा सकता है.

मुस्लिम पक्ष की तरफ अगले हफ्ते सोमवार को 29वें दिन भी बहस जारी रहेगी. सोमवार को संविधान पीठ की सुनवाई दोपहर 12 बजे से होगी. लेकिन सोमवार को बहस 5 बजे तक जारी रहेगी. अभी तक बहस सुबह 10.30 से 4 बजे तक होती है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay