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Modi Mantra, जिसका देश है दीवाना, ऐसे करोड़ों लोगों को बना दिया मुरीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से देश के करोड़ों-करोड़ लोगों से सीधा नाता जोड़ लेते हैं, वो संवाद अदायगी किसी और नेता में नहीं है. एक एक दिन में चार-चार पांच-पांच चुनावी सभाएं करना और वो भी पूरे जोश से लबरेज होकर. इससे लोगों पर इतना प्रभाव पड़ा कि लोगों ने मोदी को अपना मसीहा चुन लिया.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 24 May 2019
Modi Mantra, जिसका देश है दीवाना, ऐसे करोड़ों लोगों को बना दिया मुरीद पीएम मोदी और अमित शाह

23 मई को आए लोकसभा चुनाव के नतीजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी और एनडीए ने इतिहास रच दिया. चुनाव में बीजेपी और एनडीए गठबंधन ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 343 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल कर लिया. इस चुनाव में बीजेपी ही नहीं, एनडीए के उम्मीदवार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही वोट मांग रहे थे और खुद प्रधानमंत्री मोदी भी मतदाताओं से यही कह रहे थे कि लोगों का एक एक वोट उनको ही जाने वाला है.

अब सवाल उठता है कि आखिर बीजेपी और एनडीए को ऐसा प्रचंड बहुमत क्यों और कैसे मिला, किन मुद्दों पर मिला? ऐसे में हम आपको इस ऐतिहासिक जीत के वो  8 बड़े कारण बता रहे हैं जिसने चुनाव की पूरी बाजी पलट दी और पीएम मोदी को एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च पद पर पहुंचा दिया.

मोदी का जानदार और प्रभावशाली वक्ता होना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से देश के करोड़ों करोड़ लोगों से सीधा नाता जोड़ लेते हैं, वो संवाद अदायगी किसी और नेता में नहीं है. एक एक दिन में चार-चार पांच-पांच चुनावी सभा करना और वो भी पूरे जोश से लबरेज होकर. इससे लोगों पर इतना प्रभाव पड़ा कि लोगों ने मोदी को अपना मसीहा चुन लिया.

जाति का बंधन तोड़ा, काम से नाता जोड़ा

उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र तक विपक्षी दलों ने आपस में कई गठबंधन किए. लेकिन विपक्ष के इन गठबंधनों पर मोदी का नाम भारी पड़ा. वास्तव में जाति के नाम पर वोटों का समीकरण बैठाने वाली पार्टियों के आगे प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं पर लोगों ने ज्यादा भरोसा किया. एक रैली में मायावती ने पीएम मोदी को नकली पिछड़ा, कहा तो पीएम मोदी ने जवाब देते हुए कहा कि अब रैलियों में मोदी की जाति पर बात होती है.

राष्ट्रवाद का नया माहौल बनाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमोबेश अपनी सभी चुनावी रैलियों में राष्ट्रवाद का नारा उछाला. हर सभा में राष्ट्रवाद के मुद्दे को जिंदा रखा. वो लोगों को ये बताने में कामयाब रहे कि आतंकवादियों के खिलाफ उनकी सरकार कड़े कदम उठाने में चार कदम आगे रही. प्रधानमंत्री की इस छवि ने चुनाव में उनको भरपूर फायदा पहुंचाया.

पुलवामा कांड के जवाब में बालाकोट एयरस्ट्राइक

पुलवामा के आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत ने हिंदुस्तान को झकझोर दिया. आम लोगों के गुस्से को प्रधानमंत्री ने अपने गुस्से में बदल दिया और बिहार की एक रैली में इसे लेकर कहा 'जो आग आपके अंदर है वही मेरे अंदर है'  फिर जिस तरह हमारी एयरफोर्स ने पाकिस्तान में घुसकर जैश के आतंकी ठिकानों को मटियामेट किया, उससे मोदी की छवि एक एक्शन वाले और दबंग नेता की बनी जो दुश्मन की कायराना हरकतों पर उसे छोड़ता नहीं.

जनभावनाओं को पढ़ने में माहिर राजनेता

हर वक्त का इस्तेमाल कैसे अपने चुनावी फायदे के लिए किया जा सकता है, इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं. इसीलिए जिस वक्त आखिरी दौर की वोटिंग चल रही थी, वो केदारनाथ और बदरीनाथ की यात्रा से हिंदुस्तान के श्रद्धालु भाव को जीतने में कामयाब रहे. ऐसे ही नहीं जब वाराणसी जाते हैं तो बाबा विश्वनाथ की धार्मिक आस्था से अपनी आस्था को जोड़कर लोगो का दिल जीत लेते हैं.

सहयोगी दलों पर दरियादिली

जब चुनाव सिर पर आया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पुराने और रूठे सहयोगियों को मना लिया. महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री की जबर्दस्त आलोचना करने वाली शिवसेना साथ आ गई तो बिहार में जेडीयू को अपने बराबर सीटें लड़ने के लिए दे दिया. इसका फायदा महाराष्ट्र में भी मिला और बिहार में भी.

सब पर भारी ब्रैंड मोदी

बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी छवि को प्रधानमंत्री मोदी की छवि के नीचे कर लिया और बीजेपी ही क्यों, एनडीए तक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही वोट मांगा.

प्रधानमंत्री मोदी की जनहित योजनाएं

पिछले पांच सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने जमीनी स्तर पर लोगों को बीजेपी से जोड़ा. उससे प्रधानमंत्री मोदी ने इसका भरपूर प्रचार किया जिसका भरपूर फायदा उनको भी मिला.

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