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कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीते जेटली, पर संभालते रहे हैवीवेट मंत्रालय

अरुण जेटली भारत की सियासत के वो चेहरे थे जो चुनावी राजनीति की बिसात से तालमेल नहीं बिठा सके. लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान में उनका कद हमेशा टॉप फाइव नेताओं में रहा, चाहे वो वाजपेयी सरकार हो या फिर नरेंद्र मोदी की सरकार, उनकी मुट्ठी में हमेशा से हैवीवेट मंत्रालय रहा. यह उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता का नतीजा था कि उन्हें हमेशा वित्त, कानून और रक्षा जैसे मंत्रालय दिए गए.

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aajtak.in नई दिल्ली, 24 August 2019
कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीते जेटली, पर संभालते रहे हैवीवेट मंत्रालय 66 साल की उम्र में अरुण जेटली का निधन (फोटो-आजतक)

अरुण जेटली भारत की सियासत के वो चेहरे थे जो चुनावी राजनीति की बिसात से तालमेल नहीं बिठा सके. लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान में उनका कद हमेशा टॉप फाइव नेताओं में रहा, चाहे वो वाजपेयी सरकार हो या फिर नरेंद्र मोदी की सरकार, उनकी मुट्ठी में हमेशा से हैवीवेट मंत्रालय रहा. यह उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता का नतीजा था कि उन्हें हमेशा वित्त, कानून और रक्षा जैसे मंत्रालय दिए गए.

1974 में अरुण जेटली ने दिल्ली छात्र संघ का चुनाव जीता था. 1977 में वे जनसंघ में शामिल हुए. 1980 में वे बीजेपी में सक्रिय हो गए थे, लेकिन 34 सालों तक वे सीधे चुनावी रण में नहीं उतरे थे. 2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही थी, तो जेटली चुनाव लड़ने उतरे. जेटली के लिए चुनावी क्षेत्र चुनने में बीजेपी को अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ी. दिल्ली से सीट तलाशने में फेल होने के बाद बीजेपी ने जेटली को चुनाव लड़ने पंजाब भेजा. पार्टी ने जेटली के लिए पंजाब की अमृतसर लोकसभा सीट फाइनल की.

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पाकिस्तान से बंटवारे के दौरान भारत आने के बाद जेटली का परिवार अमृतसर में ही रुका था. जेटली की पत्नी का भी अमृतसर से ताल्लुक है. जेटली जब अमृतसर से कैंडिडेट बने तो कांग्रेस ने उनकी टक्कर में पंजाब की सियासत के धुरंधर कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस सीट से खड़ा करा दिया. अमृतसर की इस सीट से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया. कांग्रेस ने जेटली को बाहरी कहकर प्रचारित किया. इस आरोप का जवाब देने के लिए जेटली ने अमृतसर के ग्रीन एवेन्यू में एक शानदार घर खरीदा था.

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हालांकि मोदी लहर के बावजूद अरुण जेटली कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने नहीं टिक सके. धुआंधार प्रचार के बावजूद कांग्रेस कैंडिडेट कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें लगभग 1 लाख 2 हजार वोटों से हराया. बीजेपी में जेटली का प्रभाव कैसा था, नरेंद्र मोदी से उनकी नजदीकी कैसी थी इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि चुनाव हारने के बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें वित्त मंत्री बनाया था.

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इससे पहले अरुण जेटली गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे. मार्च 2018 में कार्यकाल खत्म होने के बाद उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए वे फिर से चुने गए. वे इस बार चौथी बार राज्यसभा सांसद बने थे.

सरकार में संभालते रहे हैवीवेट मंत्रालय

1999 में वाजपेयी की सरकार बनने के बाद जेटली सूचना प्रसारण राज्यमंत्री बने. इसके अलावा उन्हें विनिवेश राज्यमंत्री भी बनाया गया. 23 जुलाई 2000 को जेटली कानून, न्याय और कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री बने. 29 जनवरी 2003 में केंद्रीय कैबिनेट में जेटली को वाणिज्य, उद्योग, कानून और न्याय मंत्री बनाया गया.

2014 को पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें वित्त मंत्री बनाया. उन्हें कारपोरेट मामलों का मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का भी जिम्मा दिया गया था. 13 मार्च 2017 को उन्हें एक बार फिर रक्षा मंत्रालय का जिम्मा मिला.

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