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2019 लोकसभा चुनाव में NRC का मुद्दा होगा अहम, शाह ने बनाई रणनीति

2016 असम विधानसभा चुनाव से बीजेपी ने एनआरसी को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था. इसका फायदा बीजेपी को चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला. इस वजह से अब अमित शाह एक बार फिर इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव में भुनाना चाहते हैं.

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रणविजय सिंह/ हिमांशु मिश्रा नई दिल्ली, 01 August 2018
2019 लोकसभा चुनाव में NRC का मुद्दा होगा अहम, शाह ने बनाई रणनीति अमित शाह (फाइल फोटो)

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के आम चुनाव को लेकर अभी से अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. एनआरसी पर जिस तरह से अमित शाह ने अपनी पार्टी का रुख साफ किया और विपक्ष से कहा कि वो एनआरसी पर अपना रुख स्पष्ट करें. इसके बाद से साफ है कि बीजेपी एनआरसी मुद्दे को लेकर 2019 के चुनाव में जाएगी.

2016 असम विधानसभा चुनाव से बीजेपी ने एनआरसी को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था. इसका फायदा बीजेपी को चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला था. अमित शाह पहले ही नॉर्थ ईस्ट के दौरे में कह चुके हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नॉर्थ ईस्ट की 25 लोकसभा सीटों में से 21 जीतेंगे.

अमित शाह अच्छी तरह से जानते हैं कि एनआरसी के मुद्दे पर असम चुनाव में बीजेपी ने कैम्पेन चलाया था. असमी मुस्लिम Vs बांग्लादेशी मुस्लिम के इस कैम्पेन ने बीजेपी की जीत में बड़ा रोल प्ले किया था. लोकसभा चुनाव में भी एनआरसी का मुद्दा न सिर्फ़ नॉर्थ ईस्ट बल्‍कि पूरे देश में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा. बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि दिल्ली, एनसीआर, बिहार, मुंबई, झारखंड़ समेत देश के सभी मेट्रो शहरों में बंगलादेशी घुसपैठियों का एक बड़ा मुद्दा है.  

बीजेपी के रणनीतिकारों ने रिपोर्ट तैयार की है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के कारण भारत में गरीब तबके के नारगरिकों के रोजगार में कमी आई है. इस कारण गरीब तबके में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के प्रति बड़ी नाराजगी है. ऐसे में बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि आने वाले विधानसभा चुनावों और 2019 लोकसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाती है तो इसका फ़ायदा बीजेपी को असम विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिलेगा.

लोकसभा चुनाव में एनआरसी मुद्दे का नॉर्थ ईस्ट के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी को बड़ा फायदा मिलेगा. क्‍योंकि पश्चिम बंगाल के कई जिले बांग्लादेश के बॉर्डर से सटे हुए हैं. 2014 में बीजेपी को पश्चिम बंगाल में बीजेपी को दो ही सीटे मिली थीं, लेकिन विधानसभा और लोकल बॉडी के चुनाव में जिस तरह से बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा है उसके बाद बंगाल में बीजेपी टीएमसी के बाद दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभर रही है. टीएमसी के पूर्व नेता मुकुल रॉय के नेतृत्व में असम की तरह बीजेपी पश्चिम बंगाल में भी 2019 के चुनाव में बंगाली मुस्लिम Vs बांग्लादेशी मुस्लिम मुद्दा बनाती है तो 2 सीटों से सीधा 10 सीटों तक छलांग लगा सकती है.

अमित शाह जिस तरह की रणनीति के अनुसार 2019 के चुनाव में यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में होने वाले नुकसान  की भरपाई नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल में अपना जनाधार बढ़ा कर ज़्यादा से ज़्यादा लोकसभा सीटें जीतकर करेंगे. वैसे भी अमित शाह और उनकी टीम ने उन 120 सीटों पर पहले से ही फोकस किया हुआ है जहां 2014 के चुनाव में बीजेपी दूसरे स्थान पर रही थी. उनमें नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल की भी कई सीटें हैं.

एक तरह से देखें तो अमित शाह ने विपक्ष की एकजुटता के हिसाब से अपनी रणनीतियों पर अभी से काम करना शुरू कर दिया है. एक तरफ ट्रिपल तलाक पर मोदी सरकार ने अपने कदम आगे बढ़ाए हैं. इससे मुस्लिम समाज के अंदर ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है. क्‍योंकि मामला मुस्लिम समाज के हाथ से धीरे धीरे निकलता जा रहा है.

बीजेपी जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती की सरकार से समर्थन वापस लेकर अपने कोर वोटर को ये संदेश देने में कामयाब रही है कि वो अपनी विचारधारा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी. यदि ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस साल के अंत तक राम मंदिर हिंदुओं के पक्ष और जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 35 A को समाप्त करने का फैसला देती है तो फिर 2019 के चुनाव में पीएम मोदी और अमित शाह एनआरसी, ट्रिपल तलाक, राममंदिर, आर्टिकल 35A जैसे मुद्दों के सामने विपक्ष की एकता हवा हो जाएगी.

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