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अगली तीन लड़ाइयां जीतने में जुटे अमित शाह: बनाया गेम प्लान, PM मोदी निकलेंगे मिशन पर

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ सत्ता में वापसी के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव में विजय रथ को जारी करने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सक्रिय हो गए हैं. माना जा रहा है कि इसी साल अंत में होने वाले इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे के सहारे मैदान में उतरेगी.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 10 June 2019
अगली तीन लड़ाइयां जीतने में जुटे अमित शाह: बनाया गेम प्लान, PM मोदी निकलेंगे मिशन पर अमित शाह हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के नेताओं के साथ बैठक

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ सत्ता में वापसी के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव में विजय रथ को जारी करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह सक्रिय हो गए हैं. इस साल के अंत में होने वाले इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में राज्य सरकार के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी को थामने के लिए बीजेपी ने पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे के सहारे ही उतरने की रणनीति बनाई है.

हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के कोर ग्रुप की रविवार को हुई बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नाराज कार्यकर्ताओं को हर हाल में मनाने और स्थानीय मुद्दों का हल निकालने के लिए तीनों राज्यों की सरकार और संगठन को एक महीने का समय दिया है.

इन तीन राज्यों (महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा) में बीजेपी सत्ता में है. जबकि इन सभी राज्यों में बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस ही है. शाह की अगुवाई वाली इस बैठक में पार्टी के महामंत्री रामलाल, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस, सरोज पांडेय, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, अनिल जैन, झारखंड के सीएम रघुवर दास समेत कई अन्य नेता मौजूद थे.

अमित शाह ने अपने आवास पर ली बैठक

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने अपने आवास पर बुलाई बैठक में तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि सभी लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के पक्ष में बने वातावरण को बनाए रखने की रूपरेखा तैयार करें. इसके लिए खासतौर पर नाराज कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करते हुए उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों में लगाएं.

स्थानीय समस्याओं मसलन बिजली-पानी जैसे मुद्दें को हर हाल में एक महीने के अंदर दुरुस्त करें. इसके अलावा केंद्र की महत्वाकांक्षी योजनाओं मसलन उज्वला, मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य बीमा के लाभार्थियों के साथ पहली बार मत डालने वाले युवाओं से लगातार संपर्क बनाए रखने की की भी रूपरेखा तैयार करें.

दिग्गजों की सीट पर पिछड़ने पर चिंता

लोकसभा चुनाव में हरियाणा में मिली जबर्दस्त जीत के बावजूद दिग्गज मंत्रियों की सीटों पर पिछड़ने और सरकार के कई प्रमुख चेहरों की सीटों पर अपेक्षित बढ़त नहीं मिलने पर चिंता जाहिर की गई. लोकसभा चुनाव में पार्टी को राज्य की 90 में से 79 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. मगर पार्टी मुस्लिम और जाट बाहुल्य सीटों पर पीछे रही थी.

बैठक में खासतौर पर दिग्गज मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की सीट बादली में 11500 मतों से तो कैप्टन अभिन्यु की नारनौद सीट पर 3300 वोटों से बीजेपी के पीछे रहने पर चिंता व्यक्त की गई. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रहे चौधरी बीरेंद्र सिंह की घर की सीट ऊंचाना में महज 9000 की बढ़त, बेरी, सांपला किलोई, महम के साथ-साथ गुरुग्राम की 3 सीटों पर पिछड़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई. शाह ने इन सीटों पर तत्काल हालात संभालने के संकेत दिए हैं और पार्टी के सामने 51 फीसदी से ज्यादा वोटों को हासिल करने टारगेट रखा गया है.

अमित शाह की बैठक में शामिल हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को कहा कि जनता ने विपक्षी दलों को नकार दिया है जिनका एकमात्र मकसद सत्ता हथियाना है. उन्होंने कहा, ' हम मिशन 75 सीट की रणनीति के साथ विधानसभा चुनाव की ओर आगे बढ़ रहे हैं .' राज्य में बीजेपी की चुनौती है कि वह गैर जाट जातियों को एकजुट रखकर जाट वोटों का ध्रुवीकरण रोक सके.

PM मोदी के चेहरे पर होंगे चुनाव

झारखंड के इतिहास में बीजेपी ने पहली बार पांच साल की स्थिर सरकार दी. लोकसभा में भी जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर विश्वास जताया है. बात महाराष्ट्र की करें तो पिछला विधानसभा चुनाव बीजेपी ने शिवसेना के साथ के बिना अकेले लड़ा था. हालांकि लोकसभा चुनाव में दोनों दल साथ आ गए थे. आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच हुए समझौते के मुताबिक दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और जिसकी सीटें ज्यादा होंगी उसका सीएम होगा. ऐसे में बीजेपी पर यह दबाव होगा कि वह ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करे.

दरअसल बीजेपी का मानना है कि लोकसभा चुनाव राष्ट्रवाद और पीएम मोदी के नाम पर लड़ा गया. इससे इन राज्यों में स्थानीय मुद्दे गौण हो गए. जबकि इन राज्यों में सरकार के खिलाफ नाराजगी मानी जा रही है. पार्टी ने पिछला विधानसभा चुनाव भी किसी चेहरे को सामने लाने की बजाए पीएम मोदी के चेहरे के सहारे लड़ा था. विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी न हो जाएं, इससे बचने के लिए पार्टी एक बार फिर से पीएम मोदी को ही अपना चेहरा बनाना चाहती है. बीजेपी ने इन तीनों राज्यों में 2014 के चुनाव में सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया था. चुनावी नतीजे के बाद यहां सीएम बनाए थे.

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