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अमर सिंह: काफी दिलचस्प है 'मिडिलमैन' से 'मिडिएटर' तक का सफर

यूपीए-1 के पक्ष में समाजवादी पार्टी का समर्थन जुटाकर अमर सिंह ने मनमोहन सिंह की सरकार बचाई थी. तब अमेरिका के साथ एटमी समझौते के विरोध में 60 से ज्यादा वामपंथी सांसदों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. इस काम में अमर सिंह आगे आए और उन्होंने समाजवादी पार्टी के समर्थन से सरकार बचाई.

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aajtak.in
राहुल श्रीवास्तव नई दिल्ली, 02 August 2020
अमर सिंह: काफी दिलचस्प है 'मिडिलमैन' से 'मिडिएटर' तक का सफर पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह (फाइल फोटो)

  • सिंगापुर के अस्पताल में अमर सिंह का निधन
  • राजनीति से लेकर फिल्मी दुनिया पर रही पकड़

राज्यसभा सांसद और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह का शनिवार को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया. अमर सिंह विशिष्ट प्रतिभा के धनी थे. उनकी 'मिडिलमैन' से 'मिडिएटर' तक की खास यात्रा अब गुमनामी में खो गई है. लोगों को याद हो तो इस साल मार्च महीने में एक ऐसी ही अफवाह उड़ी थी कि अमर सिंह का सिंगापुर के अस्पताल में देहांत हो गया है. अमर सिंह ने खुद इसका खंडन किया था और फिल्मी स्टाइल में एक वीडियो मैसेज जारी करते हुए कहा था कि मैं बीमार जरूर हूं लेकिन डरा नहीं हूं. अमर सिंह ने मैसेज में कहा था, मेरे कुछ शुभेच्छू और मित्रों ने अफवाह फैला दी कि यमराज मेरे प्राण ले गए. यह सही नहीं है. इसी वीडियो को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा था- टाइगर अभी जिंदा है.

हालिया इतिहास में देखें तो अमर सिंह की तरह शायद ही कोई नेटवर्कर था. दिल्ली के पावर सर्कल में नीरा राडिया के आने से पहले से अमर सिंह का नाम था. अपने करियर के चरम पर उन्होंने मशहूर हस्तियों को जोड़ा, कारोबारियों को जोड़ा और ये उनके न केवल राजनीतिक कारनामे थे बल्कि वे राजनीति की दुनिया में लोगों के लिए बड़ी हस्ती बन गए थे. बातचीत में वे खुद को अक्सर 'कलकत्ता बॉय जो दिल्ली के जंगल में खो गया' बताते थे.

1991 में देश में आर्थिक उदारवाद की शुरुआत के बाद दिल्ली दरबार में अमर सिंह जैसे लोगों की जगह बन गई. कुछ लोग उन्हें पसंद करते थे, कुछ की वे जरूरत थे. कई लोग उनसे नफरत करते थे और उन्हें 'दलाल' बोलते थे. हालांकि उन्होंने इसे कभी बुरा नहीं माना और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डंके की चोट पर कहा था कि 'हां वे मुलायम सिंह यादव के लिए एक दलाल हैं.'

अमर सिंह के कई किस्से मशहूर

अमर सिंह से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं. एक बार जब मीडिया की टीमें किसी विवाद पर साउंड बाइट के लिए उनके लोधी एस्टेट के सरकारी बंगले को घूर रही थीं, तो वे फर्श पर फ्लैट लेट कर फरार हो गए. कॉरपोरेट लोगों के बीच नेटवर्कर का काम और राजनीतिक संबंध बनाने में प्रतिभा संपन्न थे. बाद में उन्हें समाजवादी पार्टी में जगह मिली. 1996 में मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राज्यसभा की सीट दी और एक तरह से समाजवादी पार्टी को चलाने की पूरी कमान उनके जिम्मे सौंप दी थी.

'सीडी अंकल' अमर सिंह

अमर सिंह के बारे में लिखना मुश्किल है. उन्होंने कई बार 'सीक्रेट' बताने की बात कही थी. एक बार उन्होंने कहा था कि उनके पास सीडी और रिकॉर्डिंग्स का बड़ा जखीरा है जिससे देश में भूचाल आ सकता है. शायद इसीलिए समाजवादी पार्टी के एक नेता उन्हें 'सीडी अंकल' के नाम से पुकारते थे. अमर सिंह के बारे में सबसे खास बात यह थी कि वे एक मिडिलमैन तो थे ही, उनका पॉलिसी, राजनीतिक संबंध, विवाद और यहां तक कि सरकार पर भी अच्छा खासा प्रभाव था. दिल्ली में हाई प्रोफाइल मिडिलमैन की काफी मांग रही है लेकिन यहां अमर सिंह की तरह शायद ही किसी ने ऊंचाई प्राप्त की हो.

ऐसे बचाई यूपीए की सरकार

यूपीए-1 के पक्ष में समाजवादी पार्टी का समर्थन जुटाकर अमर सिंह ने मनमोहन सिंह की सरकार बचाई थी. तब अमेरिका के साथ एटमी समझौते के विरोध में 60 से ज्यादा वामपंथी सांसदों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. इस काम में अमर सिंह आगे आए और उन्होंने समाजवादी पार्टी के सहयोग से सरकार बचाई. इस बारे में जब मैंने अमर सिंह से पूछा था कि क्या समाजवादी पार्टी एटमी समझौते का समर्थन करेगी. इस पर अमर सिंह ने एक फिल्मी गाने के साथ जवाब दिया-कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे, तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा....

इसके कुछ दिनों बाद मुलायम सिंह और अमर सिंह दिल्ली में जामा मस्जिद के शाही इमाम से मिले. इनकी मुलाकात पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम से भी हुई थी. दोनों बैठकों के बाद मुलायम सिंह और अमर सिंह इस नतीजे पर पहुंचे कि बड़ी मुस्लिम हस्तियों ने एटमी समझौते पर समर्थन जताया है, इसलिए इसे बुरा नहीं मान सकते. बाद में 39 समाजवादी पार्टी सांसदों ने यूपीए-1 को बाहर से समर्थन दिया. परमाणु समझौता बच गया और समाजवादी पार्टी सरकार के साथ आ गई.

22 जुलाई 2008 को लोकसभा में यूपीए ने ट्रस्ट वोट का सामना किया. सभी सांसदों को संसद पहुंचने के लिए कहा गया. बीजेपी के तीन सांसद संसद के वेल में पहुंचे और नोटों की गड्डी लहराते हुए विरोध जताना शुरू कर दिया. तब स्पीकर सोमनाथ चटर्जी थे. आरोप यह था कि उन्हें सरकार को समर्थन देने के लिए पैसे दिए गए. इसमें आरोप अमर सिंह पर लगे और उन्हें संसदीय जांच समिति के सामने हाजिर होना पड़ा.

हर क्षेत्र में थे दोस्त

हर क्षेत्र में अमर सिंह के दोस्त थे. वे मेगा स्टार अमिताभ बच्चन के साथ भी खड़े हुए जिनकी कभी मुश्किल परिस्थितियों में अमर सिंह ने मदद की थी. उनके बच्चन परिवार, अनिल धीरूभाई अंबानी, मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय राजनीति के बीच बहुत अच्छे लिंक थे. उन्होंने समाजवाद या सोशलिज्म को ग्लैमर, पावर, बिजनेस एलिट और यहां तक कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से जोड़ा. क्लिंटन 2005 में लखनऊ में एक भोज में शामिल हुए थे. समाजवादी पार्टी के नेता मानते हैं कि मुलायम सिंह और उनके परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में अमर सिंह ने यूपीए सरकार पर दबाव देकर राहत दिलाने में मदद की थी.

साल 2006 में अमर सिंह और कई बड़ी हस्तियों के बीच फोन कॉल की रिकॉर्डिंग्स सामने आई थी. इसमें डील की कई बातें थीं. तत्कालीन समाजवादी पार्टी नेता राज बब्बर ने मुलायम सिंह से इस बारे में शिकायत भी की थी. मुलायम सिंह ने उस वक्त राज बब्बर को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. अमर सिंह ने उन रिकॉर्डिंग्स को एयर होने पर रोक लगवा दी थी. यूपीए-2 से पहले अमर सिंह काफी सशक्त व्यक्ति हुआ करते थे. नौकरशाह बताते हैं कि मंत्रालयों में अमर सिंह फाइल के साथ आते थे और अपने दोस्तों के काम करा कर आसानी से चले जाते थे.

समाजवादी पार्टी में करियर

अमर सिंह समाजवादी पार्टी में काफी महत्वूपर्ण हस्ती बनकर उभरे. उन्होंने मुलायम सिंह और कल्याण सिंह (बीजेपी से बाहर होने के बाद) के बीच भी मध्यस्थता कराई. 2009 में मुलायम सिंह ने खुद इस 'टाइअप' को फाइनल किया. 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले मुस्लिम समाजवादी पार्टी के खिलाफ चले गए थे.

तब भी अमर सिंह ने दुश्मनी को दोस्ती में बदलवाने में बड़ी भूमिका निभाई. इस बीच मुलायम के बेटे अखिलेश यादव को अमर सिंह की पार्टी पर पकड़ से खतरा महसूस होने लगा. इसे देखते हुए अमर सिंह 2010 में पार्टी से निकाल दिए गए. अमर सिंह न तो किसी पार्टी में थे और न ही सांसद, इसलिए उनकी शक्ति जाती रही. अमर सिंह उसके बाद कभी उतनी बड़ी ऊंचाई नहीं पा सके.

2016 में मुलायम सिंह ने कहा कि वे अमर सिंह को अपने छोटे भाई की तरह मानते हैं और वे अमर सिंह को दोबारा पार्टी में लेकर आए. 2016 में मुलायम सिंह के परिवार में दरार पड़ गई. अखिलेश ने पार्टी का मोर्चा संभाला, अपने पिता और चाचा को किनारे कर दिया. लेकिन 2017 में वे चुनाव हार गए और योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. सिंगापुर से जारी अपने अंतिम वीडियो में अमर सिंह ने कहा था कि मैं अच्छा हूं या बुरा, लेकिन आपका हूं. मैंने अपने तरीके से अपनी पूरी जिंदगी जी ली है, मैं दोबारा लौटूंगा. हालांकि अमर सिंह नहीं लौट सके. अमर सिंह की तरह अब शायद ही कोई 'डील मेकर्स' दिखे.

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