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मनी लॉन्ड्रिंग केसः कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रतुल पुरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है. दरअसल पूछताछ के लिए रतुल पुरी के नहीं पहुंचने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट से रतुल पुरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी.

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aajtak.in
मुनीष पांडे नई दिल्ली, 09 August 2019
मनी लॉन्ड्रिंग केसः कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी रतुल पुरी (IANS)

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रतुल पुरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है. दरअसल पूछताछ के लिए रतुल पुरी के नहीं पहुंचने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट से रतुल पुरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी. वहीं उनकी अग्रिम जमानत को भी सीबीआई की विशेष अदालत खारिज कर चुकी है. रतुल पुरी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे हैं.

ईडी ने बुधवार को दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसमें अगस्ता वेस्टलैंड मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे और उद्योगपति रतुल पुरी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करने की मांग की गई. यह कदम विशेष सीबीआई न्यायाधीश अरविंद कुमार द्वारा पुरी की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने के एक दिन बाद उठाया गया.

पुरी अपनी कंपनियों के माध्यम से अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में कथित तौर पर रिश्वत प्राप्त करने के आरोप में जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं. ईडी ने आरोप लगाया है कि पुरी के स्वामित्व और संचालन वाली फर्मों से जुड़े खातों का इस्तेमाल वीआईपी हेलीकॉप्टरों के लिए अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में रिश्वत और धनशोधन से जुड़े पैसे प्राप्त करने के लिए किया गया था.

इससे पहले, सीबीआई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को रतुल पुरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. विशेष सीबीआई न्यायाधीश अरविंद कुमार ने पुरी के उस आवेदन को भी ठुकरा दिया, जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए अपने स्वयं के बयानों की उन्होंने एक प्रति मांगी थी.

बता दें कि पुरी दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका को वापस ले लिया था, जिसमें उन्होंने न्यायालय से मांग की थी कि वह जमानत याचिका पर आदेश पारित करने से पहले ट्रायल कोर्ट को निर्देश पारित करे.

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