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क्‍या कमतर होते हैं सरकारी स्‍कूल के छात्र?

अक्‍सर ऐसा कहा जाता है कि अगर बच्‍चों को बेहतर शिक्षा देनी हो, तो उनका दाखिला प्राइवेट स्‍कूलों में ही करवाना होगा. इसी सोच की वजह से आजकल बच्‍चों का नर्सरी में भी दाखिला एक चुनौती बनता जा रहा है. मगर एक नए शोध से कुछ अलग तरह की बात सामने आई है.

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आजतक वेब ब्‍यूरो/भाषानई दिल्‍ली/वाशिंगटन, 14 October 2012
क्‍या कमतर होते हैं सरकारी स्‍कूल के छात्र?

अक्‍सर ऐसा कहा जाता है कि अगर बच्‍चों को बेहतर शिक्षा देनी हो, तो उनका दाखिला प्राइवेट स्‍कूलों में ही करवाना होगा. इसी सोच की वजह से आजकल बच्‍चों का नर्सरी में भी दाखिला एक चुनौती बनता जा रहा है. मगर एक नए शोध से कुछ अलग तरह की बात सामने आई है.

निजी स्कूल के छात्रों का प्रदर्शन बेहतर नहीं
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शिक्षा शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में कहा है कि भारत में निजी स्कूल के छात्र सरकारी स्कूलों के छात्रों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं.

इस अध्ययन ने भारत और अन्य विकासशील देशों की उस धारणा को तोड़ दिया है कि निजी स्कूलों के छात्र सरकारी स्कूलों के छात्रों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन करते हैं.

प्राइवेट स्‍कूलों की तादाद बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में करीब चार करोड़ बच्चों ने भारत की शिक्षा प्रणाली में प्रवेश किया है और इसी की बदौलत निजी स्कूलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.

शैक्षणिक प्रशासन की सहायक प्रोफेसर अमिता चुदगर ने कहा, ‘हमारे शोध में निजी स्कूल जाने का कोई विशेष लाभ सामने नहीं आया है.’ उन्होंने एक बयान में कहा, ‘मुख्य तात्पर्य इसकी पहचान करना है कि सरकारी और निजी स्कूल को लेकर विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है.’

10 हजार छात्रों के बीच सर्वे
इस अध्ययन में आठ से 11 वर्ष उम्र के 10,000 भारतीय छात्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया. चूंकि ज्यादातर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र धनी और शिक्षित परिवारों से आते हैं, इसलिए इस अध्ययन में ऐसे छात्रों को शामिल किया गया है जिनका पारिवारीक स्तर समान हो. इस शोध के निष्कर्षों को ‘इकोनॉमिक्स ऑफ एजुकेशन रिव्यू’ में प्रकाशित किया गया है.

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