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साहित्य आजतक Day 3: शुभा मुद्गल के सुरों के साथ हुआ समापन, झूमे लोग

aajtak.in नवंबर 6, 2019
अपडेटेड 20:25 IST

साहित्य आजतक 2019 (Sahitya Aajtak 2019): साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' का समापन रविवार को संगीत के सुरों के बीच हुआ. महाकुंभ के आखिरी दिन कला, साहित्य और संगीत से जुड़ी कई हस्तियों ने शिरकत की. आज के पहले सत्र की शुरुआत भजन सम्राट के सुरों से हुई. शाम में मुशायरे का आयोजन हुआ, जिसमें वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी समेत कई शायरों ने समां बांध दिया. साहित्य आजतक की समाप्ति गायिका शुभा मुद्गल की संगीतमय प्रस्तुति से हुई. बता दें कि 2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी.

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साहित्य आजतक Day 3: शुभा मुद्गल के सुरों के साथ हुआ समापन समारोहशुभा मुद्गल

हाइलाइट्स

  • शुभा मुद्गल के सुरों के साथ साहित्य आजतक 2019 का समापन, 
  • कला, साहित्य और संगीत से जुड़ी कई हस्तियों ने की शिरकत
  • 21:04 ISTPosted by Mansi Mishra

    वीडियो में देखें आज की कवरेज

    साहित्य आजतक में शेफाली फ्रॉस्ट, दर्शकों को सुनाई अपनी कविताएं

    VIDEO: सैनी राज ने सुनाईं खूबसूरत कविताएं, जीता ऑडियंस का दिल

    शारीरिक संबंध को ही प्रेम का अवसर मानते हैं आज के युवा: बाबुषा

    सीता से बड़ा फेमिनिज्म का उदाहरण और कहीं नहीं मिलेगा: आनंद नीलकंठन


  • 21:02 ISTPosted by Mansi Mishra

    पढ़ें, साहित्य आजतक की आज की खास खबरें

    बाहुबली के डायलॉग पर मुंतशिर बोले- जो औरत का दर्द नहीं समझता, मैं उसे मर्द नहीं समझता

    प्यार-नफरत के बीच होती है बातचीत, वो कोई नहीं करता: साहित्य आजतक में असगर वजाहत


    गांधी पर बोले स्वानंद किरकिरे- 'गांधी एक ऐसा विचार जो 150 सालों से है वायरल'

    साहित्य आजतक 2019: इम्तियाज अली बोले- दिखना नहीं, दिखाना चाहता हूं

    Sahitya aajtak 2019- बेगम अख्तर ने ब्लाउज की डिजाइन के लिए मीना कुमारी की फिल्म की रील कटवा लिया था

    साहित्य आजतक 2019: अरूणिमा सिन्हा ने बताया, पैर गंवाने के बाद कैसे फतह किया एवरेस्ट

  • 20:57 ISTPosted by Mansi Mishra

    शुभा मुद्गल के गीतों पर झूमे लोग

    साहित्य आजतक का तीन दिवसीय उत्सव समापन की ओर है. नमी और ठंड समेटे तीन नवंबर की रात को आठ बजे भी लोग पूरे जोशोखरोश के साथ शुभा मुद्गल को सुन रहे थे. इस तरह साहित्य के अनोखे उत्सव का समापन हुआ. साहित्य की दुनिया के नामी चेहरों ने इस उत्सव में हिस्सा लेकर दर्शकों को साहित्य जगत की पुरानी परंपरा से लेकर ताजी हवा तक सराबोर किया.

  • 20:21 ISTPosted by Mansi Mishra

    वसीम बरेलवी ने पढ़ा, चिराग है बुझने का डर तो रहता है

    हवा के सामने सीना सिफर तो रहता है.
    मगर चिराग है बुझने का डर तो रहता है.....

    ठोकरों को भी नहीं होती हरएक सिर की तलाश
    भांप लेती हैं किसे आता है सजदा करना

  • 20:19 ISTPosted by Mansi Mishra

    मुशायरे में वसीम बरेलवी ने पढ़े ये शेर

    बात बढ़ जाती तो खोटा होता दोनों का सफर  
    मैं ही पीछे हट गया और उसको रस्ता दे दिया

  • 20:17 ISTPosted by Mansi Mishra

    राहत इंदौरी ने पढ़ा, तेरी परछाई, मेरे घर से नहीं जाती है

    तेरी परछाई, मेरे घर से नहीं जाती है
    तू कहीं हो, मेरे अंदर से नहीं जाती है
    आसमां मैंने तुझे सर पर उठा रखा है
    ये है तोहमत, जो मेरे सर से नहीं जाती है

  • 19:25 ISTPosted by Mansi Mishra

    राहत इंदौरी ने पढ़े ये शेर, बजीं तालियां

    अपना आवारा सर पटकने को तेरी दहलीज देख लेता हूं
    फिर, कुछ दिखाई दे के न दे, काम की चीज देख लेता हूं

  • 19:08 ISTPosted by Mansi Mishra

    जीशान निजामी ने पढ़ा, मुद्दतों खुद से मुलाकात नहीं होती है

    मुद्दतों खुद से मुलाकात नहीं होती है....
    रात होती है मगर रात नहीं होती है...
    शहर में अब कोई दरवेश नहीं है शायद...
    अब कहीं कोई करामात नहीं होती है

  • 19:07 ISTPosted by Mansi Mishra

    रंजीत सिंह ने सुनाया, हम सोचते ही रह गए किरदार

    दिल ये तो जानता है कि गुनहगार कौन है
    आए जो नाम उसका तो तैयार कौन है
    चेहरे बदल बदल के वो बर्बाद कर गया
    हम सोचते ही रह गए किरदार कौन है

  • 19:06 ISTPosted by Mansi Mishra

    कुंवर रंजीत सिंह को मिली वाहवाही

    उस दिलनशीं को देखकर हमबस वहीं ठहर गए
    ये भी नहीं कि जिंदा हैं, ये भी नहीं कि मर गए

  • 18:56 ISTPosted by Mansi Mishra

    नवाज देवबंदी ने सुनाई, उसकी बातें फूल हो जैसे

    उसकी बातें तो फूल हो जैसे, बाकी बातें बबूल हो जैसे उसका हंसकर नजर झुका लेना, सारी शर्तें कबूल हो जैसे छोटी-छोटी सी उसकी वो आंखें, दो चमेली के फूल हो जैसे

  • 18:54 ISTPosted by Mansi Mishra

    नवाज देवबंदी ने संभाली मुशायरे की महफिल

    जाने माने शायर नवाज देवबंदी ने सुनाया कि अपना न कहा जाए तो बेगाना कहा जाएदीवाना हूं दीवाने को दीवाना कहा जाए मैखाने को मैखाना तो कहती है ये दुनिया, उन झील सी आंखों को भी मैखाना कहा जाए.

  • 18:49 ISTPosted by Mansi Mishra

    'इश्क पानी की अजामत तो है, पर पानी नहीं'

    साहित्य आजतक मुशायरा में कवि अभिषेक शुक्ल ने पढ़ा कि
    इश्क पानी की अजामत तो है, पर पानी नहीं. मैंने समझाया बहुत, पर वो मानी नहीं.

  • 18:10 ISTPosted by Mansi Mishra

    इतिहास बदला नहीं जा सकता: स्वानंद

    साहित्य आजतक के सीधी बात मंच पर गीतकार स्वानंद किरकिरे ने कहा कि गांधी पर मेरा मानना ये है कि मेरे गांधी, तुम्हारे गांधी करने से बेहतर होगा कि गांधी को आत्मसात किया जाए. गांधी हम सबमें है. उन्होंने ये भी कहा कि इतिहास हमेशा से बदलने की कोशिश की जाती है, मगर इतिहास को बदला नहीं जा सकता है.

  • 17:57 ISTPosted by Mansi Mishra

    'हमारे समय में प्यार' पर चर्चा

    साहित्य आजतक 2019 के मंच पर 'हमारे समय में प्यार' सेशन में कवियत्री अनामिका और बाबुषा कोहली ने हिस्सा लिया. इस मौके पर बाबुषा कोहली की किताब आईनाबाज का लोकार्पण किया गया.

  • 17:45 ISTPosted by Mansi Mishra

    पढ़ें- डायरेक्टर इम्तियाज अली ने कैसे दिए इन सवालों के जवाब

    एक जवाब में उन्होंने कहा कि ''शाहरुख खान की मूवी माई नेम इज खान दुनिया के लिए थी. किसी भी संप्रदाय में कुछ अच्छे लोग भी होते हैं, कुछ मेरी तरह भी. मुझे नहीं लगता कि कोई इतना बेवकूफ बोता है कि उस कम्यूनिटी के सभी लोगों को गलत या बुरा समझे. मुझे इस देश या शहर में कभी गलत महसूस नहीं हुआ.'' नीचे दी जा रही लिंक में पढ़ें सभी सवालों के जवाब साहित्य आजतक 2019: क्या इम्तियाज अली को देश में खतरा महसूस होता है?

  • 17:41 ISTPosted by Mansi Mishra

    वो पर्दे पर पर्दा किए जा रहे हैं... झूमे लोग

    दस्तक दरबार में सूफियाना शाम ने हंसराज हंस के गीतों ने लोगों को सूफी रंगत से रंग दिया. उन्होंने मजा ए इश्क और जिन्हें देखने के लिए जा रहे हैं, वो पर्दे पर पर्दा किए जा रहे हैं, कव्वाली सुनाई तो पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया.

  • 17:40 ISTPosted by Mansi Mishra

    सीता ने उसे मारा जिससे भगवान राम खुद हार गए थे: नीलकंठन

    मुस्लिम काल से पहले लिखी गई सभी रामायण में सीता बेहद मजबूत कैरेक्टर हैं. राम से भी ज्यादा. रावण को मारने के बाद सहस्त्रमुख रावण आता है. जो राम को हरा देता है. उसे मारने के लिए सीता ने मां काली का रूप धारण किया था. इसका वर्णन तेलुगू भाषा के रामायण में है. सीता से बड़ा फेमिनिज्म का उदाहरण और कहीं नहीं मिलेगा. सीता लवकुश को तैयार करती हैं. ये दोनों बच्चे राम की पूरी सेना को हरा देते हैं. इससे बड़ा उदाहरण सिंगल मदर का कहीं और नहीं मिलेगा.

  • 17:14 ISTPosted by Mansi Mishra

    इम्तियाज अली बोले, मुझे देश में कोई खतरा नहीं

    रोमांटिक फिल्मों के रॉकस्टार इम्तियाज अली ने साहित्य आजतक 2019 के मंच पर गीत संगीत के साथ देश के हालातों पर चर्चा की. क्या उन्हें भी दूसरे एक्टर्स की तरह देश में खतरा महसूस होता है? के सवाल पर इम्तियाज ने कहा कि मैं ये सब नहीं देखना चाहता. बहुत से काम हैं देखने और सोचने के लिए. मुझे अभी तक ऐसा फील नहीं हुआ है. राष्ट्रवाद को लेकर कोई विवाद नहीं हो सकता. पार्टियों को लेकर विवाद हो सकते हैं. मुझे देश में कोई खतरा महसूस नहीं होता.

  • 16:03 ISTPosted by Mansi Mishra

    राहत इंदौरी ने सुनाई अपनी पसंदीदा कविता

    राहत इंदौरी ने संवाद के मंच से अपनी पसंदीदा ये लाइनें सुनाईं. अपने हाकिम की फकीरी पर तरस आता है, जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे है, सारा दिन जेल की दीवार उठाते रहिए, ऐसी आजादी कि हर शख्स रिहाई मांगे है. कविता पर लोगों ने खूब वाहवाही दी.

  • 15:59 ISTPosted by Mansi Mishra

    मैंने जिन सरकारों पर लिखा वो बैठ गईं: हरिओम पंवार

    ये देश है वीर जवानों का सेशन में कवि डॉ हरिओम पंवार ने कहा कि ये देश है वीर जवानों का मिल जुलकर दुख सहना चाहिए. यहां उन्होंने कहा कि मैं देश का स्थायी विपक्ष हूं

  • 15:56 ISTPosted by Mansi Mishra

    एवरेस्ट से भी ऊंचा सेशन में बोलीं अरुणिमा सिन्हा

    साहित्य आजतक 2019 के एवरेस्ट से भी ऊंचा सेशन में पर्वतारोही व लेखिका अरुणिमा सिन्हा ने अपनी जिंदगी से जुड़े अनुभव साझा किए. सेशन में ट्रैवल राइटर नीरज मुसाफिर और उमेश पंत भी मौजूद रहे.

  • 15:51 ISTPosted by Mansi Mishra

    मैंने जिन सरकारों पर लिखा वो बैठ गईं: हरिओम पंवार

    ये देश है वीर जवानों का सेशन में कवि डॉ हरिओम पंवार ने कहा कि ये देश है वीर जवानों का मिल जुलकर दुख सहना चाहिए. यहां उन्होंने कहा कि मैं देश का स्थायी विपक्ष हूं.

  • 15:44 ISTPosted by Mansi Mishra

    इसलिए नहीं बन पाया बड़ा शायर: राहत इंदौरी

    साहित्य आजतक के मंच पर पुस्तक मुझे सुनते रहे लोग वाकया मेरा, एन ऑफिशियल ऑफ राहत इंदौरी पुस्तक का विमोचन किया गया. ये किताब डॉ दीपक रूहानी ने लिखी है. संवाद मंच से राहत इंदौरी ने अपनी शायरी से लोगों से खूब वाहवाही लूटी. उन्होंने यहां कहा कि बड़ा शायर होने के लिए शायर को पागल आशिक दीवाना और थोड़ा बदचलन होना चाहिए. लेकिन मैं बड़ा शायर इसलिए नहीं बन पाया क्यों‍कि मैं आखिरी शर्त पूरी नहीं कर पाया.

  • 15:28 ISTPosted by Mansi Mishra

    पुस्तक मन अदाहन का विमोचन

    साहित्य आजतक के मंच पर मधु चतुर्वेदी की किताब मन अदहन का विमोचन किया गया. ये किताब एका वेस्टलैंड प्रकाशन से प्रकाशित की गई है.

  • 14:57 ISTPosted by Mansi Mishra

    राहुल अवस्थी ने सुनाई 'कुछ वतन से बड़ा नहीं' कविता

    कवि राहुल अवस्थी ने अपनी शुरुआत कविता, पूछा गया कक्षा में किससे बड़ा है कौन, एक ने कहा कुछ धन से बड़ा नहीं है, दूसरे ने कहा कुछ मन से बड़ा नहीं है, आखिरी ने कहा कुछ वतन से बड़ा नहीं है. यहां कविता का कुछ अंश दिया गया है.

  • 14:49 ISTPosted by Mansi Mishra

    बाबरी विध्वंश पर उदय प्रकाश ने कही ये बात

    राम जन्मभूमि आंदोलन पर लिखी कविता के बारे में उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर की घटना से काफी आहत हुआ था. उन्होंने बताया कि राम किसी लेखन और धर्म से पहले के हैं और उन्हें किसी कस्बे या जिले तक सीमित नहीं किया जा सकता. रामायण को कई लोगों ने और कई तरह से लिखा है जिनके अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं.
    बाबरी विध्वंस शीशे में दरार की तरह, राम सिर्फ अयोध्या के नहीं: उदय प्रकाश

  • 14:41 ISTPosted by Mansi Mishra

    लोग कहते हैं, मैं एक भटकती आत्मा हूं: असगर वजाहत

    साहित्य आजतक के गरजत- बरसत सेशन में प्रसिद्ध कथाकार, नाटककार और अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक असगर वजाहत ने बेबाकी से अपनी राय रखी.  असगर वजाहत ने कहा यह सवाल कई बार मुझसे पूछा गया है, "मैं एक भटकती हुई आत्मा हूं, एक ऐसा आदमी जिसे कहीं भी चैन नहीं है, संतोष नहीं है. जो हो रहा है जो कर रहे हैं उससे असहमति. आप कह सकते हैं कि एक व्यक्ति जो अपनी तरह-तरह की रचनाओं से अपना असंतोष व्यक्त करता है." सेशन का संचालन आजतक डिजिटल के एग्जिक्यूटिव एडिटर पाणिनी आनंद ने किया.

  • 14:34 ISTPosted by Mansi Mishra

    17 मिलियन हिट पाने वाला गीत

    पंकज उधास ने अपना गीत चिट्ठी आई है, सुनाया. उन्होंने बताया कि मेरे इस गीत को यू ट्यूब 17 मिलियन हिट मिले थे. एक साल में ये गीत सबसे ज्यादा सुना गया. इस गीत के साथ मुझे ऐसे ऐसे अनुभव हुए हैं कि इस गाने पर अकेले मैं किताब लिख सकता हूं.


  • 14:29 ISTPosted by Mansi Mishra

    लड़कियों के ख्वाब देखने की आजादी पर लेखिकाएं एकमत

    साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' के मंच के तीसरे दिन 'लड़कियों के ख्वाब' विषय पर गोष्ठी में महिला लेखकों ने कई महत्वपूर्ण बातें रखीं. ये  भी सही है कि लड़कियां लड़कों से अलग होती हैं और उनके ख्वाब भी अलग देखने की अनुमति मिलनी चाहिए. प्रोफेसर सविता सिंह ने कहा कि हम कितना जीवन साथ चाहते हैं और कितना अलग जीवन जीना चाहते हैं यह असल मुद्दा होता है. बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि स्त्रियों का जीवन अलग से नहीं होता है.

  • 14:14 ISTPosted by Mansi Mishra

    हुआ 'अंबर पर अबावील' का लोकार्पण

    साहित्य आजतक के मंच पर कवि, आलोचक और रचनाकार उदय प्रकाश ने सत्र 'साहित्य का उदय' में हिस्सा लिया. यहां उनके काव्य संग्रह 'अंबर में अबावील' प्रकाशित का लोकर्पण भी किया गया. इस संग्रह की एक कविता के बारे में उदय प्रकाश ने कहा कि ज्यादा बड़ी कविता के नीचे उतना ही बड़ा श्मशान होता है और जितना बड़ा श्मशान होगा उतना ही महान कवि और राष्ट्र होगा.

  • 13:55 ISTPosted by Mansi Mishra

    स्कूल की प्रार्थना से शुरू हुआ गायन: पंकज उधास

    मैं म्युनिसिपल स्कूल में पढ़ता था जहां बच्चे सुबह प्रार्थना गाते थे. टीचर को पता चला कि मैं अच्छा गाता हूं. वहां से फिर मुझे प्रार्थना लीड करने की जिम्मेदारी दी गई. बस वहां से मेरा गायन शुरू हुआ.

  • 13:47 ISTPosted by Mansi Mishra

    समाज ने सोशल मीडिया के महत्व को पूरी तरह स्वीकारा नहीं: असगर वजाहत

    साहित्य आजतक के मंच से गरजत बरसत सेशन में जाने माने लेखक, उपन्यासकार व प्ले राइटर असगर वजाहत ने साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर बात की. यहां उन्होंने सोशल मीडिया की भूमिका पर कहा कि आज के जागरूक समाज ने सोशल मीडिया के महत्व को पूरी तरह स्वीकार किया नहीं है. इसे समाज ने उपयोगी या बहुत गंभीर नहीं माना. जरूरी है कि सोशल मीडिया को हम महत्व दें या इस रूप में स्वीकार करें कि इसकी कोई भूमिका है.

  • 13:34 ISTPosted by Mansi Mishra

    नोट पुराने बंद हो गए, दोस्त पुराने चलते हैं: मनोज मुंतशिर

    मनोज मुंतशिर ने नोटबंदी पर लिखी लाइनें सुनाईं, जो इस तरह हैं-
    हम यारों के यार हैं हमसे पैसे वाले जलते हैं,
    नोट पुराने बंद हो गए, दोस्त पुराने चलते हैं
    मनोज मूल रूप से अमेठी के हैं, उन्होंने अमेठी पर लिखी है ये कविता
    वो एक नुक्कड़ जहां यारों का जमघट रोज लगता था, वहां एक चायखाने पर जवानी छोड़ दी हमने
    हमारे यारों को एक शिकायत है कि नई दुनिया बसाने के चक्कर में पुरानी छोड़ दी हमने

  • 13:25 ISTPosted by Mansi Mishra

    अनूप जलोटा ने साहित्य आजतक के मंच से ये भी कहा, पढ़ें

    साहित्य आजतक 2019: अनूप जलोटा ने खोली बिग बॉस की पोल, जो दिखा वो छलावा, सलमान को सब पता था


    साहित्य आजतक 2019: कैसा है जसलीन संग रिश्ता? अनूप जलोटा बोले- बिग बॉस में जो किया वो ड्रामा था

  • 13:20 ISTPosted by Mansi Mishra

    मैंने अपने बेटे पर लिखा था ये गीत: मनोज मुंतशिर

    उन्होंने अपने गीत कौन तुम्हें प्यार करेगा जैसे मैं करती हूं के बारे में बताया कि ये मैंने अपने बेटे आरव पर लिखा था. गीत की पंक्तियां थी कि 'मेरी अकेली जीत हो तुम, मैंने लिखा जो अपने लिए वो सबसे प्यारा गीत हो तुम.. कौन तुम्हें यूं चाहेगा जितना मैं करता हूं'. उन्होंने कहा कि मैंने अपने बेटे के लिए ये गीत लिखा था जो बाद में धौनी द अनटोल्ड स्टोरी में फीमेल वर्जन में दिया.

  • 13:07 ISTPosted by Mansi Mishra

    बाहुबली के डॉयलॉग पर बजीं तालियां

    गलत किया देवसेना, औरत पर हाथ डालने वाले की काटते नहीं उंगलियां, काटते हैं गला... बाहुबली के डॉयलॉग लिखने वाले मनोज मुंतशिर ने अपने इस डॉयलाग पर दिल्लीवालों से राय मांगी तो लोगो ने हां में हामी भरी. महिलाओं पर अत्याचार को लेकर उन्होंने कहा कि जो औरत का दर्द नहीं समझता, मनोज मुंतशिर उसको मर्द नहीं समझता. 

  • 12:59 ISTPosted by Mansi Mishra

    साहित्य आजतक के मंच के मुरीद हैं मनोज मुंतशिर

    तेरी गलियां, मैं फिर भी तुमको चाहूंगा जैसे लोकप्रिय बॉलीवुड के गीतकार मनोज मुंतशिर जल्द ही मंच पर आने वाले हैं. यहां आप उनकी नवीनतम किताब 'मेरी फितरत है मस्ताना' की आटोग्राफ दी हुई कॉपी पा सकते हैं.सुनिए, क्या कह रहे हैं मनोज मुंतशिर.

  • 12:53 ISTPosted by Mansi Mishra

    लोग मुझे ओपन बंदे के तौर पर याद करें: जलोटा

    पद्मश्री अनूप जलोटा खुद को कैसी छवि में दर्शकों के बीच याद रखना चाहते हैं, भजन सम्राट या कुछ और. इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि लोग मुझे ऐसे याद करें कि ये बंदा ओपन बात करता है. छुपकर कुछ नहीं करता. जो होता है बता देता है ये सच है कि ये झूठ है. उन्होंने इंटरव्यू के आखिर में कभी अलविदा न कहना गीत सुनाया.

  • 12:44 ISTPosted by Mansi Mishra

    अब बच्चे भी मुझे सुनते हैं: अनूप जलोटा

    साहित्य आजतक मंच पर अपनी छवि सुधरने के सवाल पर भजन सम्राट ने कहा कि दर्शकों श्रोताओं को सिर्फ संगीत से मतलब है. बिग बॉस से भी मुझे बहुत फायदा हुआ है, मेरी ऑडियंस तीन गुना बढ़ी है. कांसर्ट में पहले बच्चे नहीं आते थे, अब वो भी मुझे जानते हैं और माता-पिता से कहते हैं कि हमें भी ले चलो.

  • 12:39 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    क्या बिग बॉस की सच्चाई ये है?

    अनूप जलोटा ने कहा कि मेरे केस में छलावा था. बिग बॉस में कोई दर्द नहीं मिला. मैंने सलमान को कहा था कि मेरी स्टूडेंट आई है. लेकिन जसलीन ने कहा कि मैं तो रिलेशनशिप में हूं. प्यार मोहब्बत वाले सीन स्क्रिप्टेड थे. डेट के लिए अलग सेट बना था. डेट पर जाकर गाना गाया डांस किया.

  • 12:38 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    बिग बॉस में बहुत बढ़िया ड्रामा था

    अनूप जलोटा ने बातचीत के दौरान कहा कि बिग बॉस में बहुत बढ़िया ड्रामा था. देखो मैं कितना अच्छा एक्टर है. इसके बाद अनूप जलोटा ने कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना गाया....Du मान जाइए मैं बहुत अच्छा एक्टर हैं, सच एक ही बार होता है. मैं झूठ नहीं बोलता. अच्छे खासे पैसे मिल रहे थे. 6 हफ्ते का पेड वैकेशन मिला था.

  • 12:35 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    अनूप जलोटा ने लंबी सांस की ये वजह बताई

    अनूप जलोटा ने अपने भजन के बीच में कहा कि लंबी सांस का राज है, बाबा रामदेव का प्राणायाम. एक आदमी भगवान रामदेव का प्राणायाम किया करता था. उसकी मृत्यु 105 साल की उम्र में हुई. वो स्वर्ग में गया उसका खूब स्वागत किया गया. एक अपसरा ने फूलों की माला चढ़ाई और एक ने नृत्य कर के दिखाया. शख्स खुश हो गया मगर उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसने बाबा रामदेव की वजह से आने में लेट कर दी.

  • 12:24 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    आज आयोजित होने वाले खास इवेंट

    3 नवंबर- तीसरे दिन का कार्यक्रम
    11.00-12.00
    ऐसी लागी लगन फेम अनूप जलोटा अपनी धुन छेड़ेंगे.
    12.00-12.45
    कवि अशोक वाजपेयी, लेखक और पत्रकार राहुल देव, लेखर पुष्पेश पंत मंच पर होंगे.
    12.45-01.30
    कवि और गीतकार मनोज मुंतशिर अपना गायन पेश करेंगे.
    01.30-02.30
    सिंगर पंकज उधास अपने गानों से समा बांधेंगे.
    02.30-03.30
    यह देश है वीर जवानों का सत्र में कवि हरिओम पवार, राहुल अवस्थी, विनीत चौहान अपने देशभक्ति कविताएं प्रस्तुत करेंगे.
    03.30-04.15
    लेखक और फिल्मकार इम्तियाज अली अपने अनुभव साझा करेंगे.
    04.15-05.00
    गीतकार हंस राज हंस अपना सूफियाना कलाम पेश करेंगे.
    05.00-05.30
    गीतकार स्वानंद किरकिरे महफिल जमाएंगे.
    05.30-06.00
    गीतकार और संगीतकार विद्या शाह और लेखर यतींद्र मिश्र मंच पर अपने अनुभव साझा करेंगे
    06.00-08.00
    मुशायरा में शायर वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी, नवाज देवबंदी, अभिषेक शुक्ला, एस आर जीशान नियाजी, कुंवर रंजीत चौहान शिरकत करेंगे.
    08.00-09.00
    सिंगर शुभा मुद्गल का गायन

  • 12:23 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    भजन सम्राट ने बांधा समां

    भजन सम्राट अनूप जलोटा 'श्याम पिया मोरे रंग दे चुनरिया' गीत पर प्रस्तुति दे रहे हैं. उन्होंने अपने सुरों समां बांध दिया है. साहित्य आज‍तक के तीसरे दिन की शुरुआत बेहद खुशनुमा माहौल में हुई है.

  • 11:54 ISTPosted by Mansi Mishra

    यूं चल गया भजन सम्राट का जादू

  • 11:42 ISTPosted by Mansi Mishra

    भजन सम्राट ने बताया रियाज का महत्व

  • 11:39 ISTPosted by Mansi Mishra

    साहित्य आजतक के मंच पर भजन सम्राट का साम्राज्य

    भजन सम्राट अनूप जलोटा ने जिस तरह केवट राम संवाद को भजन और व्याख्या के जरिये सुनाया, हर कोई राम धुन में रम गया. उनके भजनों को लोग उनके साथ साथ गुनगुना रहे थे. साहित्य आज‍तक के तीसरे दिन की शुरुआत बेहद खुशनुमा माहौल में हुई है. रविवार का दिन और आध्यात्मिक माहौल से दिन की शुरुआत ने समां बांध दिया.

  • 11:35 ISTPosted by Mansi Mishra

    अनूप जलोटा ने सजाई भजन की महफिल

  • 11:34 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    साहित्य आजतक-2019 की महफिल सजी

    साहित्य आजतक-2019 में महफिल सज चुकी  है. तीसरे और आखिरी दिन के इवेंट की शुरुआत हो चुकी है. भजन सम्राट अनूप जलोटा प्रस्तुति दे रहे हैं.

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