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साहित्य आजतक में निजामी ब्रदर्स ने बांधा समां, झूम उठे लोग

aajtak.in नवंबर 1, 2019
अपडेटेड 23:39 IST

साहित्य आजतक 2019 (Sahitya Aajtak 2019): साहित्य का सबसे बड़ा महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' आज से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में शुरू हो चुका है. साहित्य, कला, संगीत, संस्कृति का यह जलसा आज से 3 नवंबर तक चलेगा. शुक्रवार सुबह साहित्य आजतक का आगाज छायावादी युग के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की वाणी वंदना से हुआ. तीन दिन तक चलने वाले साहित्य के महाकुंभ साहित्य आजतक में कला, साहित्य, संगीत, संस्कृति और सिनेमा जगत की मशहूर हस्तियां शामिल हो रही हैं. बता दें कि साल 2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी.

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साहित्य आजतक में निजामी ब्रदर्स ने बांधा समां, झूम उठे लोग2019 Sahitya Aajtak

हाइलाइट्स

  • साहित्य आजतक 2019' आज से शुरू
  • 3 दिन तक चलेगा साहित्य आजतक
  • कई बड़ी हस्तियां कर रही हैं शिरकत
  • 21:17 ISTPosted by Rachit kumar

    निजामी ब्रदर्स ने बांधा समां

    साहित्य आजतक में निजामी ब्रदर्स ने समां बांध दिया. उनके अल्लाह-हू गाने पर लोग खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए. उनकी अद्भुत गायिकी से माहौल संगीतमय हो गया.

  • 20:02 ISTPosted by Mansi Mishra

    चुड़ैल-भूत शब्द डिक्शनरी से आउट हों: गीताश्री

    साहित्य आजतक मंच पर रहस्य, रोमांच और रोमांस सेशन में लेखिका गीताश्री और जयंती रंगनाथन ने हिस्सा लिया. यहां गीताश्री की किताब भूतखेल और जयंती रंगनाथन की किताब रूह की प्यास लांच की गई.

    ले‍खिका गीताश्री ने कहा कि भूत में मैं लिंगभेद नहीं मानती. लेकिन चुड़ैल और डायन स्त्री समाज के लिए गाली हैं. उनकी आत्मा का डैमेज करने के लिए हैं. जिस तरह तमाम इलाकों में डायन बताकर मार देते हैं. चुड़ैल जैसी औरत में भी महिला की अलग परिभाषा होती है. चुड़ैल और डायन जैसे शब्द को डिक्शनरी से निकाल देना चाहिए.

    लेखिका जयंती रंगनाथन ने कहा कि आज भी हम मानते हैं कि भूत प्रेत और लस्ट की किताबें तकिये के नीचे छुपाकर रखने वाली किताबें हैं. ये मेरे सामने चैलेंज था कि इस विषय को डील करने में अश्लील होने से बचा सकूं. इसकी पहली कहानी मेरी सहेली ने सुनाई थी, उसे सुनकर मेरे एक महीने झुरझुरी हुई थी. मुझे लगा कि ये एक बहुत बड़ी वजह थी कि मैंने ये जोनर चुना, मुझे लिखते वक्त मजा आया.

  • 20:00 ISTPosted by Mansi Mishra

    संगीत की महफिल में छाया नमक इश्क का....

    भारतीय फिल्मों की जानी मानी पार्श्वगायिका और हिंदुस्तानी संगीत की शान रेखा भारद्वाज साहित्य आजतक 2019 के मंच पर आते ही छा गईं. उन्होंने ओंकारा फिल्म के गीत नैना ठग लेंगे से महफिल का आगाज किया. सुनहरी शाम और संगीत के जादू ने साहित्य आजतक की महफिल को सुरमयी बना दिया है.

  • 19:09 ISTPosted by Mansi Mishra

    भारत में तवायफों का इतिहास कलंकित: सबा दीवान

    साहित्य आजतक 2019 के सत्र में भारतीय वृत्तचित्र फिल्म निर्माता सबा दीवान ने कहा कि वह हमेशा महिलाओं के जीवन, उनके संघर्ष और इतिहास में उनकी भूमिका में रुचि रखती हैं. उन्होंने कहा कि भारत में तवायफों का इतिहास कलंकित है. हम तवायफों को उतना ही जानते हैं, जितना कि उन्हें बॉलीवुड में देखा है.

  • 18:52 ISTPosted by Mansi Mishra

    कुमार विश्वास ने दिल्ली के प्रदूषण पर सुनाई ये कविता

    साहित्य आजतक 2019 के दस्तक दरबार में आयोजित KV Sammelan में शुक्रवार की कवि कुमार विश्वास की कविताओं और गीतों से रंगीन हो गई. दिल्ली के प्रदूषण, धुआं और स्मॉग और इस पर हो रही राजनीति पर कुमार विश्वास ने पंक्तियां सुनाईं.
    मुझे वो मार कर खुश है, कि सारा राज उसपर है
    यकीनन कल है मेरा, बेशक आज उस पर है
    उसे जिद थी झुकाओ सर, तभी दस्तार बक्शूंगा
    मैं अपना सर बचा लाया, महल और ताज उसपर है
    न पाने की खुशी है कुछ, न खोने का गम है...
    अजब कशमकश है रोज जीने रोज मरने में
    मुक्कमल जिंदगी तो है, मगर थोड़ी सी कम है
    हादसों की जद में हैं तो क्या मुस्कुराना छोड़ दें.

  • 18:37 ISTPosted by Mansi Mishra

    पत्रकार मंजीत सिंह नेगी के केदारनाथ प्रलय के अनुभव

    मंजीत सिंह नेगी, लेखक और पत्रकार ने केदारनाथ की घटना से संबंधित अनुभव बांटे. उन्होंने बताया कि किस तरह उत्तराखंड त्रासदी के दौरान प्रलय को आंखों से देख पाना मुश्किल था. मंदिर के अंदर जाना चाहता था, लेकिन वहां जाना मुश्किल था. उन्होंने कहा कि अगर आपदा की पहले तैयारी होती तो बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती थी. कई लोग ठंड और भूख से मर गए.

  • 17:45 ISTPosted by Mansi Mishra

    पंकज कपूर के पहले उपन्यास 'दोपहरी' का विमोचन

    साहित्य आजतक 2019 के मंच पर जाने माने बॉलीवुड अभिनेता और थि‍एटर आर्टिस्ट पंकज कपूर ने अपनी बात रखी. यहां उनके पहले उपन्यास 'दोपहरी' का विमोचन किया गया. इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए पंकज कपूर ने अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि करियर के मामले में उनके बेटे शाहिद कपूर उनसे ज्यादा समझदार हैं. अपने नॉवेल के बारे में बताया कि यह एक ऐसा नॉवेल है जो कि फिल्म की तरह है. यह नॉवेल आपको विजुअल की तरह लगेगा. यह अम्मा बी की कहानी है, जो लखनऊ में रहती हैं. मैंने यह पूरी कहानी 4 दिन में लिखी है.

  • 17:36 ISTPosted by Mansi Mishra

    आर्थिक मंदी होगी मेरी अगली किताब की पृष्ठभूमि: चेतन भगत

    बेस्टसेलर लेखक और स्तंभकार चेतन भगत ने साहित्य आजतक 2019 में कहा कि आर्थिक मंदी एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि उनकी अगली किताब की कहानी की पृष्ठभूमि भी आर्थिक मंदी है. ये एक मर्डर मिस्ट्री बुक है लेकिन इसकी पृष्ठभूमि आर्थिक मंदी है. उन्होंने शहर के प्रदूषण के बारे में कहा कि अब आपको सिगरेट खरीदने की जरूरत नहीं है, ये हवा में है.

  • 17:11 ISTPosted by Mansi Mishra

    शूटिंग से 10 दिन पहले फिल्म से निकाला नाम

    साहित्य आजतक 2019 के मंच पर बॉलीवुड की जानी मानी हस्ती अनुपम खेर दर्शकों से रूबरू हुए. सेशन 'जिंदगी ने जो अन्जाने ही सिखाया मुझे' में अनुपम खेर ने अपनी शुरुआती जिंदगी बयान की. बताया कि कैसे शुरुआती दिनों में तीन साल से बॉम्बे में रह रहा था मगर काम नहीं मिल रहा था. मैं रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोता था और दोस्तों के यहां खाता था. शूटिंग के 10 दिन पहले फिल्म से निकाल दिया गया था.

  • 15:41 ISTPosted by Richeek Mishra

    हास्य कवियों ने बहाई हंसी की धार, मैथिली ठाकुर के गीतों ने बांधा समां

    साहित्य आजतक 2019 के मंच पर देश भर के नामचीन दिग्गज जुट रहे हैं. शुक्रवार को हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा, सुनील जोगी और अरुण जैमिनी ने प्रेम, पत्नी, राजनीति और युवाओं के आज के माहौल पर हास्य रस की कविताओं को सुनाया. वहीं, मैथिली ठाकुर ने सूफी, बॉलीवुड और भोजपुरी गानों से समा बांध दिया.

  • 14:30 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    आज के जमाने में कौन ऐसा है जो पद्म भूषण लेने से इनकार कर दे

    साहित्य आजतक का एक सत्र लेखिका कृष्णा सोबती और हिन्दी के आलोचक नामवर सिंह को समर्पित रहा. इस सत्र में कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी, लेखिका और आलोचक निर्मला जैन और कवयित्री गगन गिल ने शिरकत की. तीनों लेखकों ने कृष्णा सोबती और नामसिंह के लेखन को याद किया और साहित्य में उनके योगदान के बारे में जानकारी दी. अशोक वाजपेयी ने बताया कि मैंने पद्म पुरस्कार के लिए कृष्णा सोबती के नाम की सिफारिश की थी. लेकिन जब गृह मंत्रालय से उनके पास फोन आया तो उन्होंने मुझसे कहा कि इस सम्मान को वह नहीं लेना चाहतीं. बाद में मुझे ही पत्र लिखकर कहना पड़ा कि कृष्णा सोबती पद्म पुरस्कार नहीं लेना चाहती है. आज के जमाने में कौन ऐसा है जो पद्म भूषण को लेने से इनकार कर दे.

  • 14:08 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    खबरों के लिए यहां क्लिक करें

    सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की वाणी वंदना के साथ शुरू हुआ साहित्य आजतक 2019

    हमारी संस्कृति, परंपरा और कला का जश्न है साहित्य आजतक: कली पुरी 

    साहित्य आजतक 2019: कैलाश खेर की जादुई आवाज ने बांधा समा, झूमे दर्शक

  • 13:53 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    अच्छी हिंदी बुरी हिंदी सेशन

    अच्छी हिंद- बुरी हिंदी सेशन में नीलीमा चौहान, लेखक शशांक भारतीय, कुशल सिंह ने अपनी बातें रखीं. इस दौरान सभी ने हिंदी पर टिप्पणी करते हुए कई सुझाव शेयर किए.

  • 13:47 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    मनीष सिसोदिया बोले- आज एडमिशन की सिफारिशें आ रही हैं

    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शिक्षा क्षेत्र में आई क्रांति पर विस्तार से बातचीत की. सिसोदिया ने कहा कि मैं कहता था कि सरकारी स्कूल सुधारकर दूंगा तो लोग हंसते थे. आज एडमिशन की सिफारिशें आ रही हैं. उन्होंने कहा कि जल्द सीबीएसई की तर्ज पर दिल्ली का अपना एजुकेशन बोर्ड बन जाएगा.

  • 13:28 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    कैलाश खेर ने समां बांधा

    साहित्य आजतक 2019 में सूफी गायक कैलाश खेर ने अपने सुर से जोरदार समां बांधा. इससे पहले साहित्य आजतक का आगाज छायावादी युग के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की वाणी वंदना से हुआ, कलाकारों ने '...वर दे वीणावादिनी वर दे' को गुनगुनाया.

  • 13:21 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन

    रजिस्ट्रेशन के लिए यहां क्लिक करेंइस बार साहित्य आजतक में कई और भारतीय भाषाओं के दिग्गज लेखक भी आ रहे हैं, जिनमें हिंदी, उर्दू, भोजपुरी, मैथिली, अंग्रेजी के अलावा, राजस्थानी, पंजाबी, ओड़िया, गुजराती, मराठी, छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाएं और कई बोलियां शामिल हैं. साहित्य आजतक 2019 की शुरुआत सूफी संगीत के दिग्गज कैलाश खेर के गायन से हुई. इसके बाद कवि अशोक वाजपेयी, निर्मला जैन और गगन गिल हमारे दौर के प्रतिष्ठित आलोचक नामवर सिंह और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखिका कृष्णा सोबती को याद करेंगे.

  • 13:17 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    संस्कृति, परंपरा और कला का जश्न है साहित्य आजतक: कली पुरी

    इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में सबसे पहले यहां आए सभी साहित्यकारों, संगीतज्ञों, कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबका साहित्य आजतक का चौथा संस्करण आ गया है. लेकिन ऐसा लगता है अभी इस कार्यक्रम को शुरू हुए एक साल ही हुआ है. इस साल चुनाव हो रहे थे और पता नहीं चला कि साल कब बीत गया. अच्छी बात है कि हमारी और आपकी ये साहित्य की विशेष तारीख जल्दी आ गई.

    चुनावी साल एक चैनल के लिए बहुत जरूरी होता है. जिसे कहते हैं मेक या ब्रेक ईयर. हमारा ओलंपिक्स. आपके सहयोग और हौसले के साथ हमारी पूरी टीम गोल्ड मेडल ही गोल्ड मेडल लेकर आई है. एग्जिट पोल हो या प्रधानमंत्री का इंटरव्यू या ग्राउंड रिपोर्ट, कुछ भी कसर नहीं छोड़ी. पूरी टीम ने जान लगाकर काम किया. और आपने हमारे काम को जम कर पसंद किया.

    और इसलिए, साहित्य का ये तोहफा हमारी तरफ से आपके लिए इस साल और भी शानदार है. इस साल हमने पूरा ग्राउंड ही ले लिया. अब तीन दिन, सात मंचों से 200 हस्तियों के साथ ये सुहाना सफर चलेगा. लगातार कविताएं, शेर, शायरी, कहानी, संगीत, नाटक, मुशायरा, भारत के हर कोने से आपको देखने को मिलेगा. ये एक जश्न है हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारी कला का.

    एक मंच का मैं जिक्र करना चाहूंगी, वो अद्भुत है. माइक के लाल. ये मंच है जहां हमारे राइजिंग स्टार अपना हुनर दिखा सकते हैं. अपने टैलेंट को शेयर कर सकते हैं. तो अगर आप में एक कवि या गायक छिपा है तो इस माइक का पूरा लाभ उठाइए. क्या पता अगले साल आप इस बड़े मंच के स्टार हों.

  • 13:08 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    '...वर दे वीणावादिनी वर दे' से आगाज

    आज साहित्य आजतक का आगाज छायावादी युग के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की वाणी वंदना से हुआ, कलाकारों ने '...वर दे वीणावादिनी वर दे' को गुनगुनाया. इस कार्यक्रम में कई जानी मानी हस्तियां हिस्सा ले रही हैं.

  • 12:53 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    आज के कार्यक्रम

    1 नवंबर- पहले दिन का कार्यक्रम
    11.45-12.00
    सरस्वती वंदना के साथ साहित्य आजतक का आगाज
    12.00-13.00
    सूफी संगीत के दिग्गज कैलाश खेर बिखेरेंगे सुर.
    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शिक्षा क्षेत्र में आई क्रांति पर करेंगे बात.
    13.00-14.00
    कृष्णा और नामवर के नाम सत्र में मशहूर लेखक और कवि अशोक वाजपेयी, निर्मला जैन और गगन गिल शामिल होंगे. जो प्रतिष्ठित आलोचक नामवर सिंह और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखिका कृष्णा सोबती को याद करेंगे.
    14.00-15.00
    हंसते-हंसते दम निकले सत्र में लेखक और कवि अशोक चक्रधर, सुरेंद्र शर्मा, अरुण जेमिनी, सुनील जोगी अपनी कविताएं पेश करेंगे.
    15.00-16.00
    लेखक और अभिनेता अनुपम खेर अपनी आत्मकथा पर बात करेंगे.
    16.00-17.00
    कवि सम्मेलन में मशहूर कवि कुमार विश्वास अपनी कविताओं से समा बांधेंगे.
    17.00-17.30
    बापू के नाम सत्र में सिंगर विद्या शाह शामिल होंगे.
    18.45-19.30
    तबला वादक निखिल परालिकर की परफॉर्मेंस.
    20.30-21.30
    एक शाम सूफियाना संगीत के नाम सत्र में निज़ामी ब्रदर्स की जुगलबंदी

  • 12:47 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    कई बड़ी हस्तियां करेंगी शिरकत


    तीन दिन तक चलने वाले साहित्य के महाकुंभ साहित्य आजतक में कला, साहित्य, संगीत, संस्कृति और सिनेमा जगत की मशहूर हस्तियां शामिल हो रही हैं. बता दें कि साल 2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी. साहित्य आजतक कार्यक्रम के आयोजन का यह चौथा साल है. इस बार साहित्य आजतक में कई और भारतीय भाषाओं के दिग्गज लेखक भी आ रहे हैं. जिनमें हिंदी, उर्दू, भोजपुरी, मैथिली, अंग्रेजी के अलावा, राजस्थानी, पंजाबी, ओड़िया, गुजराती, मराठी, छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाएं और कई बोलियां शामिल हैं.

  • 12:46 ISTPosted by Tirupati Srivastava

    निराला की वाणी वंदना से शुरू हुआ साहित्य आजतक 2019

    साहित्य का सबसे बड़ा महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' का आगाज हो गया है. साहित्य, कला, संगीत, संस्कृति का यह जलसा आज से 3 नवंबर तक चलेगा. शुक्रवार सुबह साहित्य आजतक का आगाज छायावादी युग के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की वाणी वंदना से हुआ, कलाकारों ने '...वर दे वीणावादिनी वर दे' को गुनगुनाया. साहित्य आजतक कार्यक्रम का आयोजन इस बार भी दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में किया गया है.

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