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कोविड-19 डेटा रिपोर्टिंग में कर्नाटक अव्वल, UP-बिहार फिसड्डीः स्टडी

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक ग्रुप के रिसर्च के अनुसार, बिहार और उत्तर प्रदेश अपनी सरकार या स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर कोई डेटा प्रकाशित नहीं करते हैं. इसलिए उनका CDRS (कोविड डेटा रिपोर्टिंग स्कोर) 0 है, हालांकि बिहार ट्विटर पर कुछ डेटा जारी करता है.

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aajtak.in
मिलन शर्मा नई दिल्ली, 27 July 2020
कोविड-19 डेटा रिपोर्टिंग में कर्नाटक अव्वल, UP-बिहार फिसड्डीः स्टडी  एक अध्ययन में भारत में कोविड-19 डेटा रिपोर्टिंग में असमानता पाई गई (पीटीआई)

  • स्टडी में राज्यों को कोविड डेटा रिपोर्टिंग पर स्कोर दिए
  • 10 राज्यों ने डेटा में ट्रेंड का विजुअल रिप्रेजेंटेशन दिया
  • 18 मई तक 10 से कम केस वाले राज्य शामिल नहीं
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के एक ग्रुप ने कोरोना वायरस को लेकर भारत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से रिपोर्टिंग में बड़े अंतर और विसंगतियों पर रोशनी डाली है. इस रिसर्च में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य फिसड्डी साबित हुए जबकि कर्नाटक को शीर्ष स्थान मिला है.

‘भारत भर में कोविड-19 डेटा रिपोर्टिंग में असमानता’ शीर्षक वाली इस स्टडी के मुताबिक “बिहार और उत्तर प्रदेश की कोविड-19 डेटा रिपोर्टिंग में सबसे खराब रैंकिंग रही जबकि कर्नाटक का प्रदर्शन सभी राज्यों में सबसे अच्छा रहा. हालांकि, भारत में कोविड-19 रिपोर्टिंग की गुणवत्ता केवल 0.26 थी, जिसने पूरे देश में खराब रिपोर्टिंग दिखाई.” इस स्टडी का अभी Peer Review (सहकर्मी की ओर से समीक्षा) होना बाकी है.

रिसर्च में यह भी पाया गया कि केवल 10 राज्यों ने कोविड-19 डेटा में ट्रेंड का विजुअल रिप्रेजेंटेशन मुहैया कराया. 10 राज्य उम्र, लिंग, सह-रुग्णता (Co-morbidities) या जिलों में वर्गीकृत डेटा डेटा रिपोर्ट नहीं करते हैं. इसके अलावा, रिसर्चर्स ने यह भी इंगित किया कि पंजाब और चंडीगढ़ ने क्वारनटीन वाले लोगों की निजता से समझौता किया और उनकी पहचान की जा सकने वाली जानकारी आधिकारिक वेबसाइट्स पर जारी कर दी.

कोविड-19 पर राज्यों की डेटा रिपोर्टिंग

स्टडी में गुणवत्ता के हिसाब से कर्नाटक (0.61), केरल (0.52), ओडिशा (0.51), पुड्डुचेरी (0.51), और तमिलनाडु (0.51) की रिपोर्टिंग अच्छी बताई गई.

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश (0.0), बिहार (0.0), मेघालय (0.13), हिमाचल प्रदेश (0.13), और अंडमान निकोबार द्वीप समूह (0.17) की रैंकिंग नीचे रही.

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बिहार और उत्तर प्रदेश अपनी सरकार या स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर कोई डेटा प्रकाशित नहीं करते हैं. इसलिए उनका CDRS (कोविड डेटा रिपोर्टिंग स्कोर) 0 है, हालांकि बिहार ट्विटर पर कुछ डेटा जारी करता है.

उपलब्धता में कर्नाटक और पंजाब का स्कोर सबसे ज्यादा है. इन दोनों राज्य हर दिन पुष्ट केस, रिकवर्ड लोग और मौतों की संख्या से जुड़ा डेटा रिपोर्ट करते हैं. वे गहन देखभाल यूनिट्स (ICUs) में कोविड-19 केसों को भी रिपोर्ट करते हैं. दोनों राज्यों के लिए ऐतिहासिक डेटा डेली बुलेटिन्स के तौर पर उपलब्ध है.

डेटा रिपोर्ट करने वाले राज्यों में, असम, हिमाचल प्रदेश और मेघालय उपलब्धता के लिए सबसे कम स्कोर करते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि वे सिर्फ पुष्ट केसों, मौतों और ठीक हुए लोगों के कुल आंकड़े जारी करते हैं. 83% राज्यों के लिए कोविड-19 डेटा को उनकी आधिकारिक वेबसाइट्स से एक्सेस किया जा सकता है.

वो 10 राज्य जो ट्रेंड का विजुअल रिप्रेजेंटेशन उपलब्ध कराते हैं, उनमें कर्नाटक और केरल ने सबसे ज्यादा स्कोर (0.75) किया. ये राज्य कुल और दैनिक डेटा, दोनों के लिए पुष्ट केस, मौतों और रिकवर्ड केसों के ट्रेंड ग्राफिक्स मुहैया कराते हैं.

सामान्य तौर पर, सबसे खराब वर्गीकरण स्कोर ग्रैन्युलैरिटी (विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराने का स्तर) के लिए हैं, यहां तक ​​कि इस श्रेणी में टॉप राज्य, झारखंड ने भी केवल 0.50 का स्कोर बनाया. जबकि देश में औसतन सामान्य ग्रैन्युलैरिटी स्कोर 0.17 है.

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कर्नाटक और तमिलनाडु अकेले ऐसे राज्य हैं जो प्रत्येक मृत व्यक्ति के लिए मृत्यु का विवरण (सह-रुग्णता की जानकारी सहित) उपलब्ध कराते हैं.

स्टडी में पाया गया कि दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने उम्र, लिंग, सह-रुग्णता या जिलों या उन फैक्टर को लेकर जिनका कोविड-19 से सह-संबंध माना जाता है, को अलग से वर्गीकृत करते हुए कोई रिपोर्टिंग नहीं की है.

डेटा रिपोर्टिंग में खामियों का असर

स्टडी 19 मई से 1 जून, 2020 तक दो-सप्ताह की अवधि के दौरान आयोजित की गई. इस दौरान 29 राज्यों का मूल्यांकन किया गया. प्रत्येक राज्य में, पहला केस 19 मई से कम से कम 30 दिन पहले दर्ज हुआ था. इसलिए, इन राज्यों में से प्रत्येक के पास हाई क्वालिटी डेटा रिपोर्टिंग सिस्टम तैयार करने के लिए कम से कम एक महीने का समय उपलब्ध था.

राज्यों में CDRS में असमानता राष्ट्रीय, राज्य और व्यक्तिगत स्तर पर तीन महत्वपूर्ण निष्कर्षों पर प्रकाश डालती है-

पहला, यह भारत में कोविड-19 डेटा की रिपोर्टिंग के लिए एकीकृत ढांचे की कमी के साथ राज्यों की ओर से डेटा रिपोर्टिंग की गुणवत्ता की निगरानी या ऑडिट करने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की जरूरत को हाइलाइट करता है. एक एकीकृत ढांचे के बिना, विभिन्न राज्यों से डेटा एकत्र करना, उनसे इनसाइट्स हासिल करना और महामारी के लिए एक कारगर राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया का समन्वय करना मुश्किल है. यह पारदर्शिता को दर्शाता है और इसलिए सरकार में जनता के विश्वास को बढ़ाता है. जब जनता अच्छी तरह से अवगत हो जाती है, तो कंटेनमेंट आसान हो जाता है.

दूसरा, यह भारत में राज्यों के बीच संसाधनों के समन्वय या साझेदारी में तालमेल के अभाव को भी दर्शाता है. राज्यों के बीच समन्वय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले महीनों में अधिक लोग एक दूसरे राज्यों में आवाजाही कर सकते हैं. हालांकि यह संभव नहीं है कि सभी राज्यों में थोड़े समय में हाई क्वालिटी डैशबोर्ड स्थापित किया जा सके, लेकिन वे अन्य राज्यों की ओर से अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम डेटा रिपोर्टिंग प्रैक्टिस से मदद ले सकते हैं और सीख सकते हैं.

तीसरा, असमान रिपोर्टिंग स्कोर यह भी दिखाता है कि किसी शख्स की रिहाइश वाले राज्य के आधार पर उसकी सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी तक पहुंच में असमानता है. साथ ही उसकी गोपनीयता की सुरक्षा में भी भिन्नता है. असमानता इस बात को हाइलाइट करती है कि राज्य स्तर की कोशिशें केंद्र सरकार के उस दृष्टिकोण के साथ मेल नहीं खाती हैं जिसके तहत वो पब्लिक हेल्थ डेटा को डेटा प्रीवेसी के वैधानिक ढांचे के तहत सार्वजनिक वस्तु के तौर पर देखता है.

क्या रही मेथेडोलॉजी

स्टडी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा रिपोर्टिंग के चार प्रमुख पहलुओं को इंगित करती है - उपलब्धता, पहुंच, विस्तृत ब्यौरे जैसी बारीकियों और गोपनीयता.

रिसर्च के ढांचे का उद्देश्य 19 मई से 1 जून तक, दो सप्ताह की अवधि के दौरान 29 राज्यों के लिए कोविड-19 डेटा रिपोर्टिंग स्कोर (सीडीआरएस) का आकलन करना था.

CDRS 0 (सबसे कम) से लेकर 1 (उच्चतम) तक था. जिन राज्यों ने 18 मई तक 10 से कम पुष्ट केस रिपोर्ट किए उन्हें स्टडी से बाहर रखा गया.

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