एडवांस्ड सर्च

Advertisement

ऑटो इंडस्ट्री के लिए कुछ खास नहीं रहा 2014

भारतीय वाहन उद्योग 2014 में आम तौर पर लंबे समय तक नरमी से जूझने के बाद अब सुधार के मार्ग पर है और उसे 2015 में अच्छे दिन आने की उम्मीद है. उद्योग इस साल हुई पांच अरब डॉलर के निवेश की घोषणा पर निर्भर है. साल खत्म होने को है और बिक्री के आंकड़े अब भी निराशाजनक हैं और 2014 के पहले 11 महीनों में कारों की बिक्री में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है. त्योहारी मौसम भी बिक्री बढ़ाने में नाकाम रहा.
ऑटो इंडस्ट्री के लिए कुछ खास नहीं रहा 2014
aajtak.in [Edited by: संदीप कुमार सिन्हा]नई दिल्ली, 19 December 2014

भारतीय वाहन उद्योग 2014 में आम तौर पर लंबे समय तक नरमी से जूझने के बाद अब सुधार के मार्ग पर है और उसे 2015 में अच्छे दिन आने की उम्मीद है. उद्योग इस साल हुई पांच अरब डॉलर के निवेश की घोषणा पर निर्भर है. साल खत्म होने को है और बिक्री के आंकड़े अब भी निराशाजनक हैं और 2014 के पहले 11 महीनों में कारों की बिक्री में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है. त्योहारी मौसम भी बिक्री बढ़ाने में नाकाम रहा.

उद्योग के सामने इस साल जो चुनौतीपूर्ण हालात रहे उसमें सुधार के लिए बहुत प्रयास- कंपनियों और शुल्क रियायत के तौर पर सरकार द्वारा करने की जरूरत है. उद्योग को अनुकूल कारोबारी माहौल पैदा करने के लिए नीति निर्माताओं से निरंतर समर्थन की उम्मीद है ताकि वृद्धि दर्ज हो और सुरक्षा तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों के रूप में किसी नई चुनौती का मुकाबला किया जा सके. यह साल वाहन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण समारोह ‘वाहन प्रदर्शनी’ (ऑटो एक्सपो) से शुरू हुआ और बाजार में कई मॉडल आए जिससे मुश्किल माहौल में बिक्री बढ़ाने में मदद मिली. हालांकि इसके बाद इस उद्योग के लिए एक बड़ा झटका आया जबकि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 14 कार निर्माताओं पर 2,545 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकार्प और फॉक्सवैगन ने इस अवधि में देश में 20,500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की और कुल निवेश कुछ अन्य छोटे-छोटे निवेशों के साथ मिलकर करीब पांच अरब डॉलर रहने का अनुमान है.

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा, ‘यह साल बदलाव का दौर रहा. लंबे समय की नरमी के बाद वृद्धि दिख रही है. हम कह सकते हैं कि हम न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुके हैं और सुधार की दिश में अग्रसर हैं.’

वाहन उद्योग ने उत्पाद शुल्क में कटौती के रूप में सहायता की मांग की जिसके मद्देनजर पूर्व यूपीए सरकार ने छोटी कार, स्कूटर, मोटरसाइकिल एवं वाणिज्यिक वाहनों के लिए उत्पाद शुल्क 12 प्रतिशत से घटाकर आठ प्रतिशत, एसयूवी के लिए 30 प्रतिशत से घटाकर 24 प्रतिशत, मध्यम आकार की कारों पर 24 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत और बड़ी कारों पर 27 प्रतिशत से घटाकर 24 प्रतिशत कर दिया. प्रमुख कार निर्माताओं ने वाहनों की कीमत घटाकर इसका लाभ ग्राहकों को दिया जिसे कुछ महीने बिक्री के लिहाज से अच्छे रहे लेकिन साल के अंत तक लागत बढ़ने के कारण कीमत भी बढ़ने लगी. मई में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आने पर उत्पाद शुल्क में कटौती की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई जिससे उद्योग को राहत मिली और कार निर्माता अब उम्मीद कर रहे हैं कि नए साल में यह समर्थन जारी रहेगा.

इनपुट-भाषा

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay