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Economic Survey 2017-18: तेज रहेगी ग्रोथ, पर चुनौतियां बरकरार, 10 खास बातें

वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान ग्रोथ रेट 6.75 फीसदी रहने का अनुमान है. लिहाजा, केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए अर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक मोजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से भागने वाली अर्थव्यवस्था है.

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aajtak.in [Edited by: राहुल मिश्र]नई दिल्ली, 29 January 2018
Economic Survey 2017-18: तेज रहेगी ग्रोथ, पर चुनौतियां बरकरार, 10 खास बातें आर्थिक सर्वेक्षण: जारी रहेेंगे बड़े आर्थिक सुधार

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 पेश किया. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान जीडीपी ग्रोथ रेट 7 से 7.5 फीसदी के बीच रह सकती है. वहीं वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान ग्रोथ रेट 6.75 फीसदी रहने का अनुमान है. लिहाजा, केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए अर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक मोजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से भागने वाली अर्थव्यवस्था है.

इसके साथ जानें आर्थिक सर्वेक्षण की 10 खास बातें:

1. डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या में बड़ा इजाफा

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक जीएसटी के तहत इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या पूर्व जीएसटी व्यवस्था से 50 फीसदी अधिक है. इसके साथ ही नवंबर 2016 के बाद 1.8 मिलियन अधिक लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया है.

2. गैर कृषि रोजगार उम्मीद से अधिक

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक सोशल सिक्योरिटी आंकड़ों (ईपीएफओ, ईएसआईसी) के आधार पर गैर-कृषि क्षेत्र (फॉर्मल सेक्टर) में रोजगार में 30 फीसदी की बढ़त है. वहीं जीएसटी के अंतर्गत रोजगार के आंकड़ों में 50 फीसदी की बढ़त है.

3. ग्लोबल ट्रेड पर राज्यों की कमाई

केन्द्र सरकार द्वारा दिए जारी आंकड़ों के आधार पर राज्यों की कमाई पर उनके द्वारा किए जा रहे ग्लोबल ट्रेड और इंटरस्टेट ट्रेड पर निर्भर रही. इन क्षेत्रों में जिन राज्यों का जितना ट्रेड रहा है.

4. भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर बाकी देशों से बेहतर

सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक देश की टॉप 1 फीसदी कंपनियां देश का कुल 38 फीसदी एक्सपोर्ट करती है. वहीं अन्य देशों में ये आंकड़ा भारत से खराब है. ब्राजील में टॉप एक फीसदी कंपनियां 72 फीसदी एक्सपोर्ट, जर्मनी में 68 फीसदी, मेक्सिको में 67 फीसदी और अमेरिका में 55 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं.

इसे पढ़ें: शेयर मार्केट की उछाल पर सेबी का हाई अलर्ट, उठाए सुरक्षा के कदम

5. क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ा खतरा

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक अगले वित्त वर्ष के दौरान केन्द्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में आती उछाल है. हालांकि इस दौरान वैश्विक स्तर पर विकास दर में सुधार दर्ज होने की उम्मीद, जीएसटी में सुधार और निवेश का स्तर सुधरने से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत रहेगी.

6. जारी रहेंगे आर्थिक सुधार

सर्वेक्षण के मुताबिक अगले वित्त वर्ष के दौरान केन्द्र सरकार को जीएसटी को सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाने के साथ-साथ दोहरी बैलेंस शीट, एयर इंडिया के निजीकरण और व्यापक आर्थिक मुद्दों की स्थिरता पर ध्यान देने की जरूरत है.

7. ये रहे सरकार के खास दांव

केन्द्र सरकार के मुताबिक 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू करने, दोहरी बैलेंस शीट समस्या को हल करने के लिए बैंकरप्सी कोड के प्रावधान, सरकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए रीकैपिटेलाइजेशन प्लान, विदेशी निवेश के नियमों को और सरल करने और वैश्विक आर्थिक सुधार की स्थिति में अच्छे एक्सपोर्ट के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 6.75 फीसदी की दर से बढ़ सकती है.

8. शहरों को जुटाना होगा वित्तीय संसाधन

देश की शहरी जनसंख्या 2031 तक 600 मिलियन का आंकड़ा पार कर सकती है. लिहाजा आर्थिक सर्वेक्षण ने केन्द्र सरकार को सलाह दी है शहरों को म्यूनिसिपल बॉन्ड, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और क्रेडिट रिस्क गारंटी के जरिए अपने लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की जरूरत है.

9. एफडीआई से बड़ी उम्मीद

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान देश में कुल एफडीआई संचार में 8 फीसदी की इजाफा हुआ है. पिछले वित्त वर्ष में 55.56 बिलियन डॉलर एफडीआई की तुलना में इस वर्ष देश में 60.08 बिलियन डॉलर का कुल एफडीआई संचार रहा.

10. कमाई में केन्द्र पर राज्य भारी

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक अप्रैल-नवंबर 2017 तक टैक्स में राज्यों का हिस्सा 25.2 फीसदी बढ़ा है जबकि केन्द्र सरकार का नेट टैक्स रेवेन्यू में महज 12.6 फीसदी का इजाफा.

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