एडवांस्ड सर्च

SBI ने ग्राहकों को दिया बड़ा तोहफा, होम लोन पर तीसरी बार घटाई ब्याज दर

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक बार फिर से MCLR रेट घटा दिया है. इससे फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन सस्ते हो जाएंगे, हालांकि इसका तत्काल लाभ नहीं मिलेगा. इसके अलावा एसबीआई ने एफडी पर ब्याज दरों में भी कटौती की है.

Advertisement
aajtak.in
ऐश्वर्या पालीवाल नई दिल्ली, 09 September 2019
SBI ने ग्राहकों को दिया बड़ा तोहफा, होम लोन पर तीसरी बार घटाई ब्याज दर होम लोन ग्राहकों को होगा फायदा

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक बार फिर से MCLR रेट घटा दिया है. एसबीआई ने इसमें 10 बेसिस पॉइंट की कटौती कर दी है. एसबीआई ने MCLR को 8.25 फीसदी से घटाकर 8.15 फीसदी कर दिया है. यह कटौती 10 सितंबर से लागू होगी. अब अन्य बैंक भी एसबीआई के रास्ते पर चल सकते हैं. इससे फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन सस्ते हो जाएंगे, हालांकि इसका तत्काल लाभ नहीं मिलेगा.

एफडी पर घटाई ब्याज दर

बैंक के मुताबिक 10 सितंबर से एक साल के लिए एसबीआई एसीएलआर 8.15 फीसदी होगा. इस वित्त वर्ष 2019-20 में एसबीआई ने लगातार तीसरी बार एमसीएलआर में कटौती की है. हालांकि, इसके अलावा एसबीआई ने फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी पर ब्याज दरों में 20 से 25 बेसिस प्वाइंट यानी करीब चौथाई फीसदी की कटौती कर दी है.

MCLR का मतलब होता है मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट और यह असल में बैंक की फंड की अपनी लागत पर आधारित होता है. यानी जब बैंक की फंड की लागत घटती है तो वह एमसीएलआर को घटा देता है.

कैस मिलेगा लाभ

MCLR घटने से होम लोन ब्याज दर या ईएमआई पर तत्काल कोई असर नहीं होगा. असल में एसबीआई की फ्लोटिंग रेट होम लोन इस एक साल के एमसीएलआर से जुड़ा होता है और इसमें एक साल के लिए रेट तय होता है. यानी अगर किसी के लिए रेट अगस्त में तय हो गया और उसके बाद एमसीएलआर में बदलाव होता है तो इसका फायदा अगले साल यानी अगले अगस्त तक ही मिल पाएगा.

एसबीआई की होम लोन और ऑटो लोन बाजार में क्रमश: 35 फीसदी और 36 फीसदी की हिस्सेदारी है. लगातार अपील के बाद हाल में  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को सभी लोन रेपो रेट से जोड़ने का निर्देश दिया है. RBI ने सभी बैंकों को 1 अक्टूबर से रेपो रेट के साथ होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और एमएसएमई सेक्टर के सभी प्रकार के लोन को जोड़ने के लिए कहा है.

दरअसल, पिछले कुछ महीनों से केंद्रीय बैंक लगातार सभी सरकारी और प्राइवेट बैंको से रेपो रेट के साथ बैंक लोन को जोड़ने के लिए कह रहा था. लेकिन कई बैंक RBI की अपील को नरअंदाज कर रहे थे. जिसके बाद केंद्रीय बैंक को डेडलाइन के साथ निर्देश देना पड़ा है. इसके अलावा आरबीआई ने रेपो जैसे बाहरी बेंचमार्क के तहत ब्याज दरों में 3 महीने में कम से कम एक बार बदलाव करने को कहा है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay