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खुदरा महंगाई के मोर्चे पर सरकार को राहत, जुलाई में आई गिरावट

खुदरा महंगाई के मोर्चे पर मोदी सरकार को राहत मिली है. दरअसल, जून के मुकाबले जुलाई में महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्‍ली, 14 August 2019
खुदरा महंगाई के मोर्चे पर सरकार को राहत, जुलाई में आई गिरावट खुदरा महंगाई के मोर्चे पर सरकार को राहत

ईंधन और बिजली सस्ता होने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर में गिरावट आई है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में खुदरा महंगाई दर 3.15 फीसदी पर आ गई है. इससे पहले जून में यह आंकड़ा 3.18 फीसदी पर था. इस लिहाज से एक महीने में 0.03 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं एक साल पहले जुलाई 2018 में खुदरा महंगाई दर 4.17 फीसदी पर रही थी. यानी 1 फीसदी से अधिक की कमी देखने को मिली है. बता दें कि सरकार ने केंद्रीय बैंक को खुदरा महंगाई दर 4 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया है.

हालांकि खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में वृद्धि हुई है. आंकड़े के मुताबिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई में 2.36 फीसदी रही जो इससे पूर्व महीने में 2.25 फीसदी से थोड़ा अधिक है. वहीं सब्जियों की महंगाई दर जुलाई में कम होकर 2.82 फीसदी रही जबकि जून में इसमें 4.66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. इसी तरह दाल और उसके उत्पादों की कीमतों में जुलाई महीने में 6.82 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. इससे पिछले महीने जून में यह 5.68 फीसदी थी.

फलों के मामले में कीमत में तेजी देखने को मिली. मांस और मछली जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की महंगाई दर इस साल जुलाई में 9.05 फीसदी रही जो जून के 9.01 फीसदी के लगभग बराबर है. हालांकि अंडों के मामले में महंगाई दर घटकर 0.57 फीसदी पर आ गयी जबकि इससे पिछले महीने जून में यह 1.62 फीसदी थी. अगर ईंधन और बिजली की कैटेगरी की बात करें तो कीमतों में जुलाई महीने में 0.36 फीसदी की गिरावट आई है जबकि इससे पूर्व महीने में इसमें 2.32 फीसदी की तेजी थी.

रेटिंग एजेंसी  इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में मामूली गिरावट का कारण ईंधन और बिजली के दाम में कमी है. यह स्थिति तब है जब खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं. कुछ राज्यों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए खाद्य वस्तुओं के दाम की प्रवृत्ति पर सतर्कता पूवर्क ध्यान देने की जरूरत है. इससे सब्जियों के दाम चढ़े हैं और खरीफ फसलों की की बुवाई में देरी हो रही है..’’ बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक रेपो रेट में बदलाव करता है.

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