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इकोनॉमी पर कम हुआ लोगों का भरोसा, 5 साल के निचले स्‍तर पर कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस

आर्थिक मोर्चे पर सुस्‍ती की वजह से आलोचना झेल रही मोदी सरकार के लिए एक और बुरी खबर है. दरअसल, लोगों का देश की इकोनॉमी पर भरोसा 5 साल के निचले स्‍तर पर है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्‍ली, 07 December 2019
इकोनॉमी पर कम हुआ लोगों का भरोसा, 5 साल के निचले स्‍तर पर कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस सरकार के लिए एक और बुरी खबर

  • कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) 5 साल के निचले स्‍तर पर
  • दो महीने के भीतर कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस में 3.7 अंक की गिरावट

सुस्‍ती के दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को एक और झटका लगा है. दरअसल, देश का कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) 5 साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर महीने में कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स गिरकर 85.7 अंक पर पहुंच गया. यह 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद सबसे निचला स्तर है. यहां बता दें कि बीते सितंबर महीने में कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स 89.4 पर था. इस लिहाज से सिर्फ दो महीने में 3.7 अंक की गिरावट है.

क्‍या है इसके मायने?

कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स में गिरावट का मतलब ये हुआ कि देश की इकोनॉमी को लेकर लोगों का भरोसा कम हुआ है और ग्राहक खरीदारी नहीं कर रहे हैं. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए यह चिंता की बात है. कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स जितना मजबूत होता है, अर्थव्यवस्था के लिए वह उतनी ही अनुकूल स्थिति मानी जाती है. इंडेक्‍स में मजबूती का मतलब ये होता है कि ग्राहक बाजार और अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी हैं. इस इंडेक्‍स में मजबूती तभी मिलती है जब ग्राहक सर्विस और गुड्स की जमकर खरीदारी करते हैं. जाहिर सी बात है, इससे अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलती है.

बहरहाल, आरबीआई ने यह सर्वे रिपोर्ट देश के 13 बड़े शहरों में कुल 5,334 घरों से जुटाए गए आंकड़े के आधार पर तैयार की है. ये 13 शहर- अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्‍नई, दिल्‍ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना और त्रिवेंद्रपुरम हैं.

आरबीआई के सर्वे में शामिल उपभोक्ताओं से मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, रोजगार सृजन, महंगाई और आय व खर्च के मुद्दों पर उनकी धारणा और अपेक्षा जानी गई है.आरबीआई के सर्वे से मालूम होता है कि उपभोक्ताओं को भविष्य में महंगाई बढ़ने का संकट दिख रहा है.

जीडीपी 6 साल के निचले स्‍तर पर

बता दें कि चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही में भारत की विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ 6 साल के निचले स्‍तर पर आ गई है. अब जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया है. चालू वित्त वर्ष (2019-20) की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ की दर 5 फीसदी पर थी. इस लिहाज से सिर्फ 3 महीने के भीतर जीडीपी की दर में 0.5 फीसदी की गिरावट आई है.

वहीं लगातार छठी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों में गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में ग्रोथ रेट 8 फीसदी, दूसरी तिमाही में 7 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.8 फीसदी पर थी. इसके अलावा वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में जीडीपी गिरकर 5 फीसदी पर आ गई.

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