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ब्याज दरों में कटौती के ठोस कारण, क्या YES कहेंगे उर्जित पटेल?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बुधवार को होने जा रही द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कटौती होने की संभावना है. इस संबंध में जारी बयान के मुताबिक, सात जून को वित्तीय वर्ष 2017 की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था.

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 02 August 2017
ब्याज दरों में कटौती के ठोस कारण, क्या YES कहेंगे उर्जित पटेल? आरबीआई नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की कटौती करे : एसोचैम

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बुधवार को होने जा रही द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कटौती होने की संभावना है. इस संबंध में जारी बयान के मुताबिक, सात जून को वित्तीय वर्ष 2017 की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था.

जून महीने में खुदरा महंगाई दर 1.54 फीसदी के निचले स्तर पर रही है जबकि मई महीने का औद्योगिक उत्पादन आंकड़ा 1.7 फीसदी रहा है.

उद्योग संगठन एसोचैम ने रविवार को आरबीआई से ब्याज दरों में कटौती करने का आग्रह किया था.

एसोचैम की ओर से जारी बयान के मुताबिक, "एसोचैम ने महंगाई दर के पांच वर्षो के निचले स्तर तक जाने और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का हवाला देकर आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को पत्र लिखा है. दो अगस्त को होने वाली बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती के लिए कहा गया है."

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आरबीआई मौद्रिक नीति समीक्षा से ठीक पहले देश के अग्रणी उद्योग मंडल एसोचैम ने आरबीआई से ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती करने का आग्रह किया है. एसोचैम ने हाल ही में सामने आए उन आंकड़ों के मद्देनजर आरबीआई से यह अनुरोध किया है, जिसके अनुसार देश की महंगाई दर पांच वर्षो के दौरान सबसे नीचे रही और फैक्टरी आउटपुट जबरदस्त रहा.

एसोचैम ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है, "पांच साल में महंगाई दर के न्यूनतम स्तर और फैक्टरी आउटपुट की घोषणा के मद्देनजर एसोचैम ने आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल से अनुरोध किया है कि दो अगस्त को जब आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक हो तो मजबूत संदेश देते हुए आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती का फैसला करे."

एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने आरबीआई गवर्नर को लिखी चिट्ठी में कहा है, "लंबे समय तक रेपो रेट में कोई बदलाव न करने के बाद एसोचैम का मानना है कि आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती कर सकती है."

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जून, 2017 में भारत की महंगाई दर घटकर 1.54 फीसदी रह गई. वहीं औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों के मुताबिक मई, 2017 में फैक्टरी उत्पादन विकास दर घटकर 1.7 फीसदी रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आठ फीसदी था.

एसोचैम ने कहा है, "थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) भी 2.17 फीसदी से घटकर 0.9 फीसदी हो गया. खाद्य महंगाई दर के भी 2.12 फीसदी से घटकर 0.31 फीसदी रह जाने से आरबीआई को कटौती करने में सहूलियत होगी. मानसून में अच्छी बारिश की भविष्यवाणी से खाद्य महंगाई में कमी आने की संभावना को बल मिला है."

 

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