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क्या नोटबंदी का सबसे बड़ा झूठ पुरानी करेंसी की गिनती में छिपा है?

नोटबंदी के बाद अमान्य की गई 500 और 1000 रुपये की करेंसी को बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया कई दिनों तक चली. लेकिन अभी भी केन्द्र सरकार के पास नोटबंदी के बाद देश के बैंकों के पास जमा हुई पुरानी करेंसी का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है.

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 13 July 2017
क्या नोटबंदी का सबसे बड़ा झूठ पुरानी करेंसी की गिनती में छिपा है? क्या बैंकों ने जनता से पुरानी करेंसी बिना गिने जमा करा ली?

8 नवंबर 2016 को केन्द्र सरकार ने नोटबंदी का अहम ऐलान करते हुए संचार में कुल 86 फीसदी करेंसी को अमान्य घोषित कर दिया. इसके बाद अमान्य की गई 500 और 1000 रुपये की करेंसी को बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया कई दिनों तक चली. लेकिन अभी भी केन्द्र सरकार के पास नोटबंदी के बाद देश के बैंकों के पास जमा हुई पुरानी करेंसी का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है.

संसद की समिति नोटबंदी को लेकर अपनी रिपोर्ट संसद के आसन्न मानसून सत्र में पेश करेगी और नोटबंदी के मुद्दे पर रिजर्व बैंक के गवर्नर को अब और नहीं बुलाया जाएगा. वित्त पर संसद की स्थायी समिति की तीन घंटे से अधिक चली बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल से कई सवाल पूछे गए.

इन सवालों में भी सबसे अहम सवाल बैंकों में जमा हुई पुरानी करेंसी की संख्या को लेकर उठा. लेकिन एक बार फिर रिजर्व बैंक के गवर्नर इस सवाल का जवाब यह देते हुए टाल गए कि उनके पास फिलहाल आंकड़ा नहीं है क्योंकि जमा हुई प्रतिबंधित करेंसी को गिनने का काम अभी भी जारी है.

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अब सवाल यह है कि नोटबंदी के ऐलान के बाद क्या बैंकों ने अपने ग्राहकों से पुरानी करेंसी को बिना गिने और बिना अपने लेजर में एंट्री किए जमा किया? यदि ऐसा नहीं है तो क्यों केन्द्रीय बैंक देश के सभी बैंकों से उनके लेजर आंकड़ों को नहीं एकत्र कर पाया जिससे साफ-साफ बताया जा सके कि 8 नवंबर के बाद देश में पुरानी करेंसी की कितनी संख्या बैंक में वापस आ चुकी है.

बार-बार रिजर्व बैंक से इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाने से संभावना बन रही है कि देश का केन्द्रीय बैंक पुरानी करेंसी की संख्या के मामले में कुछ छिपा रहा है. शायद वो नोटबंदी का सबसे बड़ा झूठ है जिसके सामने आने के बाद न सिर्फ रिजर्व बैंक बल्कि मोदी सरकार की किरकिरी होनी तय है. यही वजह है कि इसे छुपाया जा रहा है.

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