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रेल अथॉरिटी नहीं, इन 5 कामों से मुनाफे की पटरी पर दौड़ेगी भारतीय रेल

रेल के लिए बनी अथारिटी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले काम से यकीनन रेलवे में बड़े सुधार कार्यक्रम का रास्ता तय होगा. लेकिन महज अथॉरिटी बना देने से रेलवे की स्थिति नहीं सुधरेगी क्योंकि रेलवे की बदहाली के कारण अभी भी अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 07 April 2017
रेल अथॉरिटी नहीं, इन 5 कामों से मुनाफे की पटरी पर दौड़ेगी भारतीय रेल भारतीय रेल को मुनाफे की रेल बनाने के लिए जरूरी 5 बातें

केन्द्र सरकार ने रेलवे बजट का आम बजट में विलय करने के बाद रेलवे डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाने का फैसला लिया है. इस कदम से केन्द्र सरकार की कवायद घाटे की रेल को मुनाफे की पटरी पर दौड़ाने की है. रेल के लिए बनी अथारिटी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले काम से यकीनन रेलवे में बड़े सुधार कार्यक्रम का रास्ता तय होगा.

लेकिन महज अथॉरिटी बना देने से रेलवे की स्थिति नहीं सुधरेगी क्योंकि रेलवे की बदहाली के कारण अभी भी अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. लिहाजा, जिस तरह रेलवे का बजट अब वित्तमंत्रालय के अधीन हो चुका है उसी तरह रेलवे में सुधार का दारोमदार भी वित्त मंत्रालय पर है.

रेल अथॉरिटी यह तीन काम करेगी-
1. किराया तय करना

2. रेलवे बोर्ड की शक्तियों को कम कर निजी निवेशकों को लुभाएगी और

3. रेल की रफ्तार के साथ-साथ यात्री सुविधा में इजाफा करना

रेल अथॉरिटी के इस मैनडेट के जरिए रेलवे को ट्रैक पर लाने की कवायद कितनी कारगर होगी यह तो अथॉरिटी द्वारा लंबी दूरी तय कर लेने के बाद पता चलेगा.

लेकिन इन 5 कामों को बिना किए भारतीय रेल को फास्ट ट्रैक पर लाना नामुमकिन हैं.
1. रेलवे को समाज सेवा और बिजनेस इंटरेस्ट को अलग करना होगा

2. गैर रेलवे काम को प्राइवटाइज करे या उन्हें उचित विभागों के सुपुर्द करे (स्कूल, स्टेडियम, हॉस्पिटल)

3. देश में राजमार्ग निर्माण में आई तेजी से खड़ी हुई चुनौती का सामना करने के लिए फ्रेट पर युद्धस्तर से काम करना होगा.

4. रेलवे के संचालन की जिम्मेदारी को रेलवे की मैन्यूफैक्चरिंग, केटरिंग जैसे उपक्रमों से अलग करना होगा

5. रेलवे की नई कंपनियों में प्राइवेट सेक्टर और विदेश निवेश की मदद से शेयर बाजार में लिस्ट कराया जाए जिससे वह भी एक पूर्ण कंपनी की तरह कारोबार कर सके.

गौरतलब है कि माल भाड़ा और यात्री किराया भारतीय रेल की कमाई का प्रमुख श्रोत है. बीते तीन दशकों के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में कई गुना इजाफा हो चुका है लेकिन रेलवे की कमाई के लिए अहम इन दोनों श्रोत में कमाई घटकर आधी रह गई है. ट्रांस्पोर्ट मार्केट में रेलवे का शेयर 1990 में जहां 56 फीसदी था 2012 तक वह सिमटकर 30 फीसदी हो गया. वहीं देश में माल भाड़े से रेलवे की कमाई 62 फीसदी से घटकर 36 फीसदी रह गई है और यात्री भाड़े में कमाई का हिस्सा 28 फीसदी से घटकर 14 फीसदी रह गई है.

 

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