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जेपी इंफ्रा ही नहीं, दिवालिया होने की कतार में हैं और भी बिल्डर

यदि जेपी इंफ्रा को दिवालिया घोषित किया जाता है तो इसका सबसे बड़ा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिन्होंने लंबे समय से जेपी प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाया है. दिवालिया घोषित होने के बाद लोगों का घर का सपना तो टूटना तय है लेकिन खतरा उनके निवेश किए गए पैसे पर भी मंडरा रहा है.

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 21 August 2017
जेपी इंफ्रा ही नहीं, दिवालिया होने की कतार में हैं और भी बिल्डर दिलाविया होने की कगार पर देश के और भी बिल्डर, जानें कैसे होगा बचाव

दिल्ली एनसीआर में बड़े रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट में निवेश कर चुकी जेपी इंफ्रा लगभग 50 हजार रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल यूनिट बना रहा है. सभी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए जेपी इंफ्रा ने ग्राहकों से पैसे भी ले लिए हैं. वहीं इलाहाबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) ने कर्ज में डूबी जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दायर ऋण शोधन याचिका (इंसॉल्वेंसी पेटीशन) स्वीकार कर ली है. यदि जेपी इंफ्रा को दिवालिया घोषित किया जाता है तो इसका सबसे बड़ा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिन्होंने लंबे समय से जेपी प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाया है. दिवालिया घोषित होने के बाद लोगों का घर का सपना तो टूटना तय है लेकिन खतरा उनके निवेश किए गए पैसे पर भी मंडरा रहा है.

यह खतरा सिर्फ जेपी इंफ्रा के ग्राहकों के ऊपर ही नहीं मंडरा रहा है. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक जेपी इंफ्रा के बाद देश के कई और बिल्डर्स और डेवलपर्स के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं. खबरों के मुताबिक गंदे कर्ज के चलते जेपी इंफ्रा महज पहली कंपनी है जिसके खिलाफ दिवालिया घोषित किए जाने का कठोर कदम उठाया गया है. लिहाजा, अन्य बिल्डर और डेवलपर्स के खिलाफ ऐसा कदम लिए जाने के बाद देश में घर का सपना संजोए बैठे कई और ग्राहकों पर खतरा है. गौरतलब है कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी दिल्ली एनसीआर में बड़ा प्रोजेक्ट कर रहे आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया है.

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वहीं इसके असर से रियल एस्टेट सेक्टर में काम करने वाली इंटरमीडियरी कंपनियां और सप्लायर भी नहीं बचे हैं. जेपी इंफ्रा के प्रोज्क्ट्स में रॉ और बिल्डिंग मटीरियल सप्लाई करने वाली कंपनियां भी अपने पेमेंट पर खतरा देख रहे हैं.

कैसे होगा ग्राहकों और कारोबारियों का बचाव

जेपी इन्फ्राटेक की फंसी परियोजनाओं में हजारों मकान क्रेताओं के फंसने के बीच उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि सरकार व एनसीएलटी को फ्लैट क्रेताओं को भी दीवाला संहिता के तहत बैंकों की तरह व्यवहार करना चाहिए. एसोचैम का कहना है कि इस बारे में जरूरत पड़ने पर दीवाला व शोधन अक्षमता संहिता आईबीसी में संशोधन के लिए अध्यादेश लाया जा सकता है. संगठन ने कहा है कि जेपी इन्फ्राटेक की आवासीय परियोजनाओं को पटरी पर लाने के लिए हरसंभव कोशिश की जानी चाहिए जहां 32000 ग्राहकों को उनके फ्लैट का कब्जा नहीं मिला है.

इसी महीने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण एनसीएलटी ने कर्ज में फंसी जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ आईडीबीआई बैंक की रिणशोधन याचिका स्वीकार की है. वहीं बैंक आफ बड़ौदा ने आम्रपाली समूह के खिलाफ एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया है. एसोचैम का कहना है कि सरकार, एनसीएलटी व रिण शोधन व दीवाला बोर्ड को रीयल इस्टेट परियोजनाओं में मकान खरीदने वालों को को भी बैंकों के समान ही मानना चाहिए.

सरकार ने दिया बिल्डरों-खरीदारों को भरोसा

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सरकार का कहना है कि इस कानून से खरीदार राजा बन जाएगा, दूसरी ओर चूंकि खरीदारों का विश्वास बहाल होगा इसलिए बिल्डरों को भी पहले की तुलना में ज्यादा ग्राहक मिलेंगे. शहरी आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि मैंने सभी संबंधित पक्षों को आश्वासन दिया है कि यह विधेयक सभी के हित में इस क्षेत्र का बस विनियमन समर्थ बनाता है न कि इस क्षेत्र का गला घोंटता है. मैं इतना कहना चाहता हूं कि डेवलपर अपने वादे पूरा करें. विज्ञापन में जो वादे किए गए हैं, उनका पालन हो.

आंकड़ों के आइने में भारत का रियल एस्टेट मार्केट

भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र के अंतर्गत कुल 76 हजार कंपनियां शामिल हैं. हर साल तकरीबन 10 लाख लोग अपने सपनों के घर में निवेश करते हैं. 2011 से लेकर 2015 तक हर साल 2349 से लेकर 4488 प्रोजेक्ट लॉन्च हुए. देश के 15 राज्यों के 27 शहरों में ऐसे कुल 17 हजार 526 प्रोजेक्ट लॉन्च हुए जिनमें 13.70 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ.

 

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