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फाइलों से कब निकलेगी क्योटो जैसी काशी, बनारस का सिर्फ यही सवाल

लोकसभा चुनाव 2014 में वाराणसी से जीत हासिल करके सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी को क्योटो बनाने का वादा किया. इस वादे के तहत पीएम ने वाराणसी को 21वीं सदी के लिए मॉर्डन स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद करते हुए शहर को जापान की धार्मिक राजधानी क्योटो की तर्ज पर विकसित करने का खाका तैयार किया.

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aajtak.in [Edited by: राहुल मिश्र]वाराणसी, 06 March 2017
फाइलों से कब निकलेगी क्योटो जैसी काशी, बनारस का सिर्फ यही सवाल अब वाराणसी को है इंतजार, कब काशी बनेगा क्योटो?

लोकसभा चुनाव 2014 में वाराणसी से जीत हासिल करके सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी को क्योटो बनाने का वादा किया. इस वादे के तहत पीएम ने वाराणसी को 21वीं सदी के लिए मॉर्डन स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद करते हुए शहर को जापान की धार्मिक राजधानी क्योटो की तर्ज पर विकसित करने का खाका तैयार किया.

क्या है काशी-क्योटो पैक्ट
इस वादे के चलते 30 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने काशी-क्योटो पैक्ट पर समझौता किया. जिसके तहत दोनों देशों को इन दोनों शहरों के बीच ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण, शहरी आधुनिकीकरण और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग करना था.

कैसे काशी बनेगा क्योटो
वादे को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार ने स्टीयरिंग कमेटी बनाई जिसे वॉटर, वेस्ट, सीवर और ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट के लिए जापानी टेक्नॉलजी और मदद लेनी थी. क्योटो शहर के म्युनिसिपल डिपार्टमेंट के सहयोग से शहर के एतिहासिक विरासत को संभालने का ढ़ांचा तैयार किया गया. और क्योटो युनीवर्सिटी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बीच शोध संपर्क स्थापित करने का मसौदा तैयार किया गया.

फाइलों में काशी बन रहा क्योटो
वाराणसी और क्योटो के बीच पार्टनर सिटी करार प्रधानमंत्री मोदी की अगस्त में 5 दिनी जापान यात्रा के दौरान किया गया. इसके बाद फरवरी 2015 में इस करार पर काम करने के लिए अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्ट्री द्वारा बनाई गई स्टीयरिंग कमेटी की पहली मीटिंग हुई. इस कमेटी को शहर में वॉटर मैनेजमेंट, सीवेज मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और अर्बन ट्रांस्पोर्टेशन के क्षेत्र में जापान से टेक्नोलॉजी और एक्सपर्ट सहयोग का खाका तैयार करना था. काशी-क्योटो करार के तहत बीएचयू और जापान की क्योटो और शिमेन युनीवर्सिटी के बीच रिसर्च, स्टूडेंट और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एमओयू किया गया.

काशी को क्योटो बनाने की लगभग तीन साल की कोशिश के बाद प्रधानमंत्री एक बार फिर अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी में भाजपा के लिए विधानसभा चुनावों का प्रचार कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि इन तीन साल के दौरान आखिर वाराणसी को किस हद तक क्योटो बनाया जा चुका है. यह सवाल आम आदमी के साथ-साथ विपक्ष भी प्रधानमंत्री से पूछ रहा है कि काशी को क्योटो बनाने में कितना वक्त लगेगा.

 

 

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